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Sunday, 1 April 2018

लखनऊ -झूठ के बुनियाद पर खड़ी केंद्रीय गृह मंत्री का गोद लिया हुआ गांव ,बेंती


ग्राउंड रिपोर्ट -
विश्वपति वर्मा , धर्म प्रकाश ,महेंद्र मिश्रा एवं राम प्रकाश पटेल के साथ समीक्षात्मक रिपोर्ट 

आदर्श ग्राम पंचायत का नाम जब आता है तब लोगों के मन में जिज्ञासाएं एवं अपेक्षाएं जाग उठती है कि अब गांव में साफ -सफाई ,अच्छी सड़कें ,घर -घर शौचालय ,रोजगार परक शिक्षा ,चिकित्सा की बेहतर व्यवस्था ,स्ट्रीट एवं सोलर लाइट की सुबिधा  ,वाई -फाई  ,झोपडी वालों को मकान ,सड़कों के किनारे पेड़ ,सार्वजनिक स्थान पर फूल -पत्ती , दीवालों पर वाल पेंटिंग ,कृषि को बढ़ावा के साथ मानव विकास ,सामाजिक उत्थान ,आर्थिक  उन्नयन,रोजगार की सुबिधा सहित वह सम्पूर्ण व्यवस्थाएं होंगी जिसके माध्यम से समता ,स्वतंत्रता ,बंधुता कायम रखते  हुए गांव के लोगों को हाईटेक बनाया  जायेगा। लेकिन खुद केंद्रीय गृह मंत्री के आदर्श ग्रामपंचायत के निवासियों के उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 



आदर्श ग्राम पंचायत (गांव को गोद लेने की योजना )मोदी सरकार  द्वारा 2014 में शुरू की गई थी।  जिसमे प्रत्येक सांसदों द्वारा  अपने संसदीय या गैर संसदीय क्षेत्र में  कम से कम तीन गांव को गोद लेकर गांव एवं गांव के लोगों को मॉडल बनाना था। इसी क्रम में लखनऊ के सांसद एवं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी लखनऊ से 27 किलोमीटर दूर गैर संसदीय क्षेत्र के सरोजनी नगर विकास खंड के अंतर्गत आने वाली पंचायत बेंती को गोद लिया था। लेकिन लगभग चार साल बीतने के बाद अभी तक गांव में बुनियादी सुबिधाओं की पंहुच भी  सुनिश्चित  नहीं हो पाई है। 

ग्रामपंचायत में जब टीम तहकीकात बेंती गांव में पंहुची तो  हर पुरवे पर जगह -जगह गंदगियों का अंबार लगा हुआ था। गांव के किसी भी कोने में कूड़ेदान की कोई व्यवस्था नहीं की गई है न ही सफाईकर्मी द्वारा गांव के सार्वजनिक स्थान को साफ किया जाता है। गांव की निवासिनी नूतन बाजपेयी ने बताया कि गृहमंत्री द्वारा जब से गांव को गोद लिया गया है उसके बाद से गांव के  किसी भी कोने में साफ -सफाई नहीं करवाई गई है। 

बेघर हैं सैकड़ो परिवार 
गांव में  1200 परिवार के साथ  7000 हजार की आबादी निवास करती है।  पंचायत के सात पुरवे ताराखेड़ा ,कल्लन खेड़ा ,दयाल खेड़ा ,नरेरा ,बेंती ,मिर्जापुर ,एवं चौकी चौकी खेड़ा में अभी लगभग 4 दर्जन से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनके पास रहने के लिए मकान नहीं है। अभी तक लोग घास -फूस की झोपडी में जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। 

जाम हुई नालियां 
गृहमंत्री के आदर्श ग्राम पंचायत में कुछ भी आदर्श नहीं है। घरों में प्रयोग होने वाले पानी से जलजमाव की समस्या न आये इसके लिए गांव भर में नाली निर्माण का कार्य कराया गया है। लेकिन नालियों के जाम हो जाने की वजह से पानी निकासी की व्यवस्था पूर्ण रूप से ठप हो चुका है जिसकी वजह से लोगों को अपने घर के सामने गड्ढा खोद कर पानी जमा करना पड़ता है।


प्रयोग से बाहर हुए शौचालय 
एक तरफ सरकार गांव को खुले से शौच मुक्त करने की बात कर रही है दूसरी तरफ सरकार में जिम्मेदार लोगों द्वारा किया गया कार्य भी गुणक्ताविहीन है। गांव को गोद लेने के बाद गांव में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है वंही पूर्व में बने 107 शौचालय में से अधिकांश शौचालय प्रयोग  में नहीं है।बालेश्वरी देवी ने बताया  कि  पंचायत द्वारा हमारे घर शौचालय बनवाया गया जिसका गड्ढा दो महीने के अंदर ही टूट गया इस लिए हमारे परिवार के लोग शौच के लिए खेत में जाते हैं। 

प्रेम चंद्र तिवारी ने बताया की राजनाथ सिंह ने गांव वालों को धोखा दिया हैं। उन्होंने बताया कि  राजनाथ सिंह खुद गांव में आये थे और उन्होंने घोषणा किया था कि गांव में अस्पताल का निर्माण कराया जायेगा एवं गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा के अतरिक्त भी लघु उधोग लगाए जाएंगे।उन्होंने बताया कि राजनेता अपने स्वार्थ के लिए किसी भी मुद्दे पर झूठ बोल सकते हैं। कहा कि गांव में एक प्राचीन मंदिर है इस मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद स्वयं राजनाथ सिंह ने मंदिर में पेंट -पत्थर लगाने के लिए कहा था लेकिन आज तक मंदिर में चूना भी नहीं लगा है। वंही उनके द्वारा की गई घोषणाओं में भी किसी कार्य की शुरुआत नहीं हुई है। 

शिक्षा की व्यवस्था बेहद खराब 
गांव में 6 सरकरी विद्यालय होते हुए भी गांव के बच्चों को बेशिक जानकारियों का ज्ञान नहीं  है। कक्षा 6 में पढ़ने वाले छात्र विकास  से पूछा गया कि  राजनाथ सिंह कौन है तो उसने गृहमंत्री को प्रधानमंत्री बताया , कक्षा 6 में पढ़ने वाले एक और छात्र बिनोद  से उत्तर प्रदेश की राजधानी पूछने पर उसने नई दिल्ली बताया ,इसी प्रकार पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा रोशनी और कंचन से राजनाथ सिंह के बारे में पूछा  गया तो वो कौन हैं तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।

घरों में पेय जल की व्यवस्था नहीं 
गांव में कुल 175 हैण्डपम्प लगे हैं। जिसमे से कुछ बंद हैं और अधिकतर दूषित जल दे रहे हैं। वंही गांव के कुछ घरों में पेय जल की व्यवस्था न होने से महिलाओं को 100 -200 मीटर की दूरी से पानी भर कर लाना पड़ता हैं ,जगराना देवी ने बताया कि  हमारे पास अपना नल था लेकिन शौचालय बनाने के लिए हमारे पास जमीन न होने की वजह से नल उखाड़ दिया गया और वंहा पर एक शौचालय बना दिया गया। उन्होंने बताया की हमारे घर पर पानी की टोटी लगाने की बात कही गई थी। हालांकि गांव में पानी के टंकी का निर्माण हो रहा है।

इसी प्रकार गांव के ललित ,लक्ष्मी ,शिवम ,विकास सहित  दर्जनों लोगों ने बताया कि  गृह मंत्री ने गांव के लोगों को गुमराह किया है। गांव में अभी तक बुनियादी सुबिधाओं की पंहुच भी नहीं हो पाई है। मनरेगा से रोजगार न मिलने की वजह से कई लोग खाली  समय व्यतीत कर रहे हैं। आवारा पशुओं की वजह से फसल नुकसान हो रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि सरकार और अधिकारी केवल झूठ बोलने में मस्त हैं जिसकी वजह से आदर्श ग्राम पंचायत का जो सपना देखा गया था वह टूट चुका  है।




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