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Tuesday, 3 April 2018

लखनऊ-गोमती को संवारने के नाम पर भाजपा सपा बसपा कार्यकाल में हजारो करोड़ के घोटाले पर पर्दा

विश्वपति वर्मा ;

लखनऊ के गोमती नदी में साफ -सफाई के नाम पर चार मुख्यमंत्री के कार्यकाल में किस तरहं से भ्रष्टाचार हुआ है ,इसकी तहकीकात हमने कई विश्वसनीय श्रोत से किया है -आइये जानते हैं। 

सपा सरकार में तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां का दावा था कि स्विटजरलैंड की तर्ज पर गोमती तटों को संवारा जाएगा। इसके लिए भव्य गेट के साथ हनुमान सेतु से निशातगंज पुल तक गोमती के दोनों तटों को संवारते हुए पिकनिक स्पॉट बनाया जाना था। जिसकी जिम्मेदारी पूर्ववर्ती सरकार  में जलनिगम की सीएंडडीएस इकाई को दिया गया था। लेकिन सपा सरकार जाने के बाद इस योजना के तहत पास हुए 1513  करोड़ रूपये की धनराशि कंहा खर्च हुआ अभी इसपर पर्दा पड़ा हुआ है। 

सरकारी आंकड़ों पर ध्यान दें तो गोमती नदी को संवारने निकले अखिलेश के अलावां  पूर्व में भाजपा उसके बाद पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव एवं मायावती ने भी गोमती नदी को चमकाने -दमकाने के नाम पर करोड़ों रूपये उड़ा  दिए लेकिन इन सब लोगों द्वारा केवल गोमती और गोमती के किनारे रह रहे लोगों को छला गया है। 

करीब दो दशक पूर्व भाजपा सरकार में भी गोमती नदी को गंदगी से मुक्त करने के लिए बड़ी योजना बनी थी। कोलकाता से ड्रेजिंग मशीन स्वाति को मंगाया गया था और गंदगी को निकाला भी गया था, लेकिन निकाली गई गंदगी और भुगतान के बारे में कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई थी। 

 बसपा सरकार में ही अंबेडकर स्मारकों की रौनक बढ़ाने के लिए गोमती नदी में पानी का ठहराव करने के लिए करीब 40 करोड़ रुपये से लामार्ट कॉलेज के पीछे गोमती तट पर वीयर बनाई गई थी। इसमे ढाई मीटर चौड़ा 825 मीटर लंबा जॉगिंग ट्रैक का निर्माण भी कराया था। लेकिन यह सारा पैंसा  पानी में बह गया। 

अखिलेश यादव ही नहीं उनके पिता मुलायम सिंह यादव की सरकार में भी गोमती नदी को संवारने में रकम बहाई गई थी और वह परियोजना भी अधूरी रह गई , विजिलेंस ने जाँच की थी।  लेकिन रिपोर्ट का अतापता नहीं चला। तत्कालीन मुलायम सरकार में वर्ष 2004 में गोमती तटबंध संवारने की परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था, लेकिन उद्घाटन नसीब नहीं हो सका था। बीरबल साहनी मार्ग पर  शिलान्यास के पट भी इसका गवाह है।

प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद 27 मार्च को जब मुख्यमंत्री योगी ने गोमती नदी का निरीक्षण किया था, तब ही यह संभावना जताई जाने लगी थी कि अखिलेश सरकार में गोमती नदी तट को संवारने के नाम पर बेहिसाब रकम बहाने वाले गुनहगारों को जेल जाना होगा। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी गोमती नदी संवारने के नाम पर बरती गई अनियमितताओं से जुड़ी रिपोर्ट ने भी गड़बड़ी से परदा हटाया था। लेकिन योगी सरकार अपने  कार्यकाल को एक साल पूरा करने के बाद भी किसी परिणाम तक नहीं पंहुच पाई। 

वर्तमान समय की स्थिति यह है कि गोमती नदी में गंदे नालों  का पानी एवं जलकुंभी (Eichhornia)  भरा पड़ा हुआ है। 

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