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Friday, 5 October 2018

भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही हिंसा और दुराचार की घटनाएं बेतहाशा घटित हो रही हैं -अखिलेश यादव

लखनऊ -महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश  

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही हिंसा और दुराचार की घटनाएं बेतहाशा घटित हो रही हैं। उत्पीड़न और मानसिक तनाव से ग्रस्त अधिकारी और अधीनस्थकर्मी अपनी जान दे रहे है।

महिलाएं बच्चियां असुरक्षित हैं। नौजवान बदहाल और कुंठित है। किसान आत्महत्या को मजबूर है। सड़क पर चलते आदमी को हर समय अपनी जान का खतरा बना रहता है। पूरा उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार की नीतियों के कारण दहशत और अवसाद में है। अराजकता और जंगलराज से हर कोई सहमा-सहमा है।
      
 
 
विगत 05 महीनों में कई पुलिस अधिकारियों और अधीनस्थ ने फांसी लगाकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। जाहिर है, तनाव में उन्होंने जो कदम उठाया उसका जवाब भाजपा सरकार को देना चाहिए
 
दो आईपीएस अफसरों और एक एस.डी.एम. ने जान गंवा दी। एटीएस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश साहनी ने 29 मई 2018 को गोमतीनगर, लखनऊ स्थित दफ्तर में गोली मारकर जीवन लीला समाप्त कर ली। तब नौकरी में दबाव की बात थी। आईपीएस सुरेन्द्र दास ने तनाव की वजह से अधिक मात्रा में सल्फास खाकर जान दे दी। अस्पताल में उनकी मौत हो गई। 
        
सितम्बर में बांदा के कमासिन थाना में महिला कांस्टेबिल नीतू शुक्ला का शव थाना परिसर के आवास में मिला। उसने उत्पीड़न की शिकायत की। एसपी ने पुलिस स्टेशन इंचार्ज प्रतिमा सिंह को लाइन हाजिर किया। नीतू कौशाम्बी जिले की थी और गतवर्ष ही उसे तैनाती मिली थी। 30 सितम्बर को बाराबंकी के हैदरगढ़ कोतवाली में महिला कांस्टेबिल मोनिका ने पंखे से लटककर फांसी लगा ली। उसने सहयोगी पुलिस कर्मियों पर मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया। 
       
विगत 02 अक्टूबर 2018 को केन्द्रीय वित राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ल की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात दारोगा तार बाबू तरूण ने सर्विस रिवाल्वर से गोली मार ली। वह फिरोजाबाद के थाना टूंडला के गांव नगला सोना का निवासी था। भाजपा राज में ही 50 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सैकड़ों शिक्षामित्र अवसाद में फांसी लगा चुके हैं। प्रदेश में जो भी न्याय के लिए आवाज उठाता है उसे प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। युवा और छात्रों को भी पुलिस बर्बरता और जेल की यातना सहनी पड़ रही है।  
 
 
लोग भूले नहीं होंगे कि इधर जबसे मुख्यमंत्री जी ने ठोंक देने का निर्देश दिया है फर्जी एनकाउंटरों की बाढ़ आ गई है। राजधानी में लोग खौफ से सहमें हुए हैं। 28 सितम्बर 2018 की रात एप्पल कम्पनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की निर्मम ढंग से हत्या कर दी गई। इस जघन्य कांड की सभी ने निंदा की है।
 
लखनऊ के ठाकुरगंज में दो सगे भाइयों की हत्या, विदेशी टूरिस्टों की बस पर हमला कर लूटपाट, शहीद पथ पर लूट और अपहरण की ये वारदातें तो 03 अक्टूबर 2018 की ही हैं। 04 अक्टूबर 2018 को गोमतीनगर की एक नवयुवती का अपहरण कर उसे जबरन षराब पिलाकर दुष्कर्म किया गया। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब लूट, हत्या, दुष्कर्म की घटनाएं न होती हों। जब राजधानी में कानून व्यवस्था की इतनी बदहाली है तो अन्य जनपदों में स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना करने से ही डर लगता है

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