कानपुर-मुस्लिम समाज के लोगो ने कराया कन्या भोज पेश की समाज मे भाई चारे की मिशाल - तहकीकात न्यूज़

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Tuesday, 16 October 2018

कानपुर-मुस्लिम समाज के लोगो ने कराया कन्या भोज पेश की समाज मे भाई चारे की मिशाल





ब्यूरो कानपुर -रवि गुप्ता

नवरात्र का पॉवन पर्व चल रहा है और आज नवरात्र के सप्तमी के अवसर पर मुस्लिम भाइयों ने एकता और भाईचारे का परिचय देते हुए जाजमऊ स्थित मां दुर्गा मंदिर प्रांगण में कन्याभोज का आयोजन किया साथ ही उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को आगे बढ़ाते हुए कन्याओं को कॉपी और पेन वितरण किये।

अमन चेन और भाईचारा हमेशा बना रहे


शारदीय नवरात्र के अवसर पर देश भर में नवरात्रि की धूम मची हुई है वहीं कानपुर में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र कहे जाने वाले जाजमऊ क्षेत्र में समाज सेवा समिति के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जाजमऊ स्थित मां दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के सप्तमी दिन के अवसर पर गंगा जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारा और सौहार्द की एक मिसाल पेश की हैं जहां दुर्गा माता मंदिर प्रांगण में 7 बच्चियों को  कन्याभोज करवाया और साथ ही  सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देते हुए बेटियों को कॉपी पेन वितरण किया हिन्दू धर्म में नवरात्र का महत्व है कन्याभोज के बिना नवरात्र के व्रत पूरे नही होते है और ऐसी संस्क्रति देश मे चली आ रही है और उसी संस्कृति का पालन करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दुर्गा माता मंदिर प्रांगण में इन 7 कन्याओं को हिन्दू धर्म की भांति उन्हें लाइन से बिठाया और जलेबी, दही और केला का प्रसाद परोसा वही उन्होंने बेटियो को पढ़ने लिखने के लिए कापियां भी बांटी।


समाज सेवा समिति के अध्यक्ष साजिद सिद्दीकी ने बताया कि हिन्दू धर्म की परंपरा को देखते हुए जिस तरह से इस धर्म मे कन्याओं का पूजन किया जाता है। हमारा पैगाम देश मे आगे जाए कि हम सब एक है उनकी बेटियां हमारी बेटियां है हमारी बेटियां उनकी बेटियां है। सरकार के नारे को आगे बढ़ाते हुए हम सभी ने बच्चो को कॉपी पेन वितरित किये है चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम बच्चे पढ़ेंगे तभी बढ़ेंगे।


कार्यकारिणी सदस्य हाफिजुल्ला खान देश की संस्क्रति बनी हुई है जिसमें बच्चो को भगवान का रूप और बेटियों को देवी का रूप दिया जाता है यह हम सभी का दायित्व है कि हम सभी को एक दूसरे की।खुशी में शरीक होना चाहिए जिससे हमेशा अमन चेन और भाईचारा बना रहे।
इस दौरान महफूज़ सिद्दीकी,अब्दुल हफ़ीज़ भी मौजूद रहे।

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