कानपुर - बुजुर्गो ने बचपन की यादों को ताजा करते हुए कुछ यूं मनाई गई वृद्धाश्रम में दिवाली - तहकीकात न्यूज़

आज की बड़ी ख़बर

Tuesday, 6 November 2018

कानपुर - बुजुर्गो ने बचपन की यादों को ताजा करते हुए कुछ यूं मनाई गई वृद्धाश्रम में दिवाली

ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता

अपनो से अलग परायों के बीच परिवार मिल गया शायद सब कुछ खोने के बाद भी थोड़ी खुशियां समेटने की चाहत में बुजुर्ग दिखाई दिए जिसे अपनी कोख में 9 माह रख कर पाला और उसकी हर जरुरतो को पूरा किया जब बेटा बड़ा हो गया तब शायद उसे इन बूढ़े माता पिता की जरूरत नही थी और छोड़ दिया उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को आज उनके चेहरे पर खुशी जरूर है



कि परायो के बीच उन्हें ऐसा परिवार मिल गया अपने बीते दिनों और अपने बच्चो के साथ बिताए हुए और बचपन के उन पलों को याद करते हुए थोड़ी सी खुशियां समेटने की कोशिश करता है इन्हें उनके अपनो ने ठुकराया लेकिन फिर भी यह लोग खुशियां ढूंढने की वजह निकाल लेते हैं।

बुजुर्गों की आंखों में दिखाई दिया बचपन

ऐसा ही कुछ नज़ारा किदवई नगर स्थित वृद्धाश्रम में देखने को मिला जहां सपोर्ट फॉउंडेशन संस्था के द्वारा इन बुजुर्गों ने भी मिलजुलकर दीपावली सेलिब्रेट की। अपनो से ही टूटने के बावजूद भी वह अपनी ममता को न भूल सके और संस्था द्वारा उनके चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कान और उनको अपनो की कमी न महसूस हो जिसको लेकर वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्ग महिलाओ और पुरुषों के साथ मिलजुलकर दीपावली सेलिब्रेट की। इस अवसर पर बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों ने खुशी के दीपक जलाए और फुलझड़ी जलाई और अपने हाथों में अनार लेकर चलाया और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी और खूब गीत गाए।



वहीं इन बुजुर्गों के लिए तरह तरह के व्यंजनों का भी इंतज़ाम किया गया। अपनों की दी हुई तकलीफों को भूलते हुए और अपने वह दिन याद करते हुए जब वह अपने परिवार के साथ दिवाली मनाते थे लेकिन आज उन्हें इस तरह दिवाली मनानी पड़ रही है लेकिन फिर भी वह खुश है, उनके चेहरों पर कुछ दर्द भी था तो कहीं कुछ खुशी की झलक भी, कहीं खुशी के आंसू भी निकल रहे थे तो अपनो के न रहने का गम भी साफ उनके चेहरों ओर दिखाई दे रहा था। लेकिन उनके चेहरों पर छोटी सी खुशी की झलक फिर से दिखाई दी और  अपनो को याद करते हुए और बचपन की यादों को संजोए सभी बुजुर्गों ने दीवाली का पर्व मिलजुलकर सेलिब्रेट किया।

बेटे और पति की मौत के बाद टूट गयी दिया सहारा

वृद्धाश्रम में दो साल पहले आयी शोभा द्विवेदी ने बताया कि मेरे पति और बेटे दोनों इस दुनिया मे नही है बिल्कुल अकेले हो गए थे फिर यहां पहुंचकर एक परिवार पाया बेटे को याद करते हुए उनका गला भर आया और उन्हें बेटे की पति की कमी भी खली आज बहुत अच्छा लगा कि जैसे घर मे दिवाली मनाते थे वैसे ही लगा।








80 साल की बुजुर्ग महिला रीता जी ने बताया घर बच्चो से बात होती रहती है लेकिन शायद परिवार को मेरा रहना कहीं न कहीं खटक रहा था इसलिए यहां आ गयी। विद्या जी ने बताया कि प्रॉपर्टी को लेकर बेटों ने पति का नाम खराब किया जिसके चलते यहां आ गये बेटे पैसे देते है बात भी होती है बेटों ने मकान बेंच डाला तब से यहां आकर रह रहे है।

ये भी हमारी माएँ हैं

सपोर्ट फाउंडेशन की अध्यक्ष ज्योति शुक्ला ने बताया कि इन बुजुर्ग महिलाओ के साथ बहुत खुशी मिलती है घर पर तो हम दिवाली मनाते ही है लेकिन इनके साथ खुशी बांटने का हमे यह मौका मिलता है उनके चेहरों पर खुशी की झलक देख बहुत खुशी मिलती है अपने जब छोड़ कर इन्हें चले जाते है तो तकलीफ़ क्या होती है इसका अंदाज़ा नही लगाया जा सकता इसलिए उनके चेहरों पर खुशी की झलक देखने के लिए मिलजुलकर दिवाली सेलिब्रेट की है। ये सभी हमारी मां ही हैं। वृद्धाश्रम के कॉर्डिनेटर वीरन्द्र तिवारी ने बताया कि यहां पर घर से परेशान होकर टूटे हुए लोग यहां पर है यहां 80 लोग है जिनमे 45 महिलाएं है बाकी पुरुष है इस वृद्धाश्रम में आज उनके चेहरो पर खुशी लाने का काम संस्था ने किया है यह सराहनीय कार्य है। इस अवसर पर पूनम सिंह,शैलजा,मानी, दीपक समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment