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Sunday, 30 December 2018

भाजपा की सरकार में कानून के रक्षक पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं,तो आम जनमानस का क्या हाल होगा - अंशू अवस्थी

महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश  


उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा में आयी हुई भीड़ द्वारा पथराव करके उ0प्र0 पुलिस के हेड कान्सटेबल सुरेश प्रताप सिंह वत्स की की गयी निर्मम एवं बर्बर हत्या उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था की असफलता का एक जीता-जागता प्रमाण है
    



उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने बयान जारी कर कहा कि यह घटना दर्शाती है कि बी0जे0पी0 सरकार में कानून के रक्षक पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनमानस का क्या हाल होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। उ0प्र0 में जंगलराज और गुण्डा राज सर चढ़कर बोल रहा है। पहले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या और अब पुनः पुलिसकर्मी की हत्या यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का नहीं बल्कि भीड़तंत्र का राज है और भाजपा सरकार उस भीड़तंत्र के साथ खड़ी है। पहले भाजपा के नेताओं द्वारा बुलन्दशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या को आत्म हत्या बताना और जाॅंच के दौरान ही तरह-तरह की बात करना दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का दिवाला निकल चुका है। 

प्रवक्ता ने कहा कि जबसे उ0प्र0 में भाजपा की सरकार बनी है बराबर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है, पहले एक पुलिस कप्तान लव कुमार के घर में घुस कर उनके बूढ़े माॅ-बाप को भाजपा के सांसद एवं गुन्डों द्वारा डराना-धमकाना, एक डी.एस.पी. स्तर के अधिकारी पाराशर को भाजपा के नेता द्वारा सरेआम थप्पड़ मारना, मुख्यमंत्री अजय सिंह विष्ट के गृह जनपद गोरखपुर में एक महिला आई.पी.एस. अधिकारी को सरेआम भाजपा के विधायक द्वारा बेइज्जत करना और इस तरीके की गुन्डागर्दी की हिमाकत करने वाले बी.जे.पी. के नेताओं पर सरकार और पार्टी स्तर पर कोई कार्यवाही न करना यह दर्शाता है कि भाजपा वास्तव में आम जनमानस की संरक्षक नहीं गुंडों और अपराधियों का संरक्षण कर रही है।

पार्टी भाजपा सरकार से यह सवाल करती है कि आखिर ऐसे गुंडों और अपराधी प्रवृत्ति के भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही क्यों नहीं होती जो पुलिस अधिकारियों की हत्या करते हैं, उन पर हमला करते हैं। आखिर कैसे इन शहीद पुलिस कर्मियों को न्याय मिलेगा। कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि उपरोक्त घटनाओं इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या और गाजीपुर में हुई पुलिस काॅन्सटेबल की हत्या की सिटिंग जज से न्यायिक जाॅंच करवाई जाये, क्योंकि सरकार जिस तरीके से अपराधियों और हत्यारों का संरक्षण कर रही है ऐसे में इन जाॅंचों से पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पायेगा।

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