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Friday, 21 December 2018

ऐसा लगता है कि ,बुक्कल नवाब हनुमान मन्दिर पर कब्जा करने की नीयत बना रहे -सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी

चीफ रिपोटर UP - चन्द्र मोहन तिवारी 

राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा एम0एल0सी0 बुक्कल नवाब द्वारा हनुमान जी को मुसलमान बताने में उनकी नीयत पर शक उत्पन्न हो रहा है। ऐसा लगता है कि राजधानी लखनऊ के अलीगंज मन्दिर पर बुक्कल नवाब कब्जा करना चाह रहे हैं क्योंकि प्रामाणिकता के अनुसार यह मन्दिर अवध के नवाब की बेगम ने बनवाया था। 


इसके साथ साथ यह भी स्पष्ट होता है कि भाजपा में शामिल होेने के पीछे उनकी नीयत साफ नहीं है क्योंकि सपा शासन काल में रिवरफ्रन्ट के निर्माण के समय उन्होंने फर्जी तरीके से अपनी जमीन बताकर सरकार से दस करोड का मुआवजा लिया था और जब उसकी जांच तथा हुसैनाबाद में किये गये अनाधिकृत निर्माण की चर्चा भाजपा शासन मेें प्रारम्भ हुयी है तो उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब भाजपा में रहकर हनुमान मन्दिर पर कब्जा करने की नीयत बना रहे हैं। 

त्रिवेदी ने कहा कि आष्चर्य है कि विधान परिषद में ही भाजपा के कबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायन हनुमान जी को जाट कहकर बाहर निकले थे कि उसी परिषद से बाहर निकलने पर बुक्कल नवाब ने हनुमान जी को मुसलमान बता दिया। हैरत की बात है कि भाजपा के लोगो को देवी देवताओं की जाति और उनकी उत्पत्ति के विषय में ज्ञान की प्राप्ति कहां से हो रही है?
 
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के ज्ञान के मुताबिक हनुमान जी दलित थे और उपमुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा के अनुसार सीता माता टेस्ट टयूब बेबी थी। ऐसा भी लगता है कि इन सबके ज्ञानदाता भी अलग अलग हैं और उन ज्ञान दाताओं को भी ज्ञान का अभाव है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में जब षिवजी के विवाह के समय गणेष जी का पूजन कराया तो स्पष्ट लिखा है कि कोउ आचरज करहि जनि, सुर अनादि जिय जानि। स्पष्ट है कि देवताओं का न आदि है और न अंत। ऐसी स्थिति मे स्वतः स्पष्ट है कि वे किसी जाति अथवा धर्म से बंधे हुये नहीं हैं। सम्पूर्ण विष्व के हैं और सबके हैं। 
 
 
रालोद प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि चारों ओर राम के नाम की आस्था का ढिढोंरा पीटने वाले भाजपा नेताओं को शर्म आनी चाहिए कि देवताओं को उनके ही भाइयों द्वारा संकीर्णता के दायरे में बांधा जा रहा है। बहुत आष्चर्य न होगा कि भाजपा के लोग राजा दशरथ पर ही आरोप लगा दें कि वे बहुपत्नी वाद के पोषक थे।

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