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Tuesday, 1 January 2019

गोरखपुर - सरैया डिस्टलरी के द्वारा दिशानिर्देश का पालन न करना महंगा पड़ सकता है

ब्यूरो गोरखपुर - कृपा शंकर चौधरी
 
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देश के तहत चौरीचौरा स्थित सरैया डिस्टलरी के चालू रहने का तीन महीने का समय पूरा होने वाले हैं और दिशानिर्देश के पालन न करने की स्थिति में डिस्टलरी प्रबंधन को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों के रोजगार पर भी संकट आ सकता है ‌‌।
 
 
 
कई शर्तों और दिशानिर्देशों के तहत केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सरैया डिस्टलरी को तीन महीने चलने की अनुमति प्रदान किया है और शख्त हिदायत दिया है कि बिना जांच के उपरांत उसके बाद डिस्टलरी न चलाई जाएं। दरअसल केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केन्द्र सरकार की वह शाखा है जो जल , थल , वायु में प्रदूषण की निगरानी रखती है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करती है चुकी प्रदूषण को लेकर सरैया डिस्टलरी की भी शिकायत केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को की गई है और साथ ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी इस विषय पर गंभीर है जिससे डिस्टलरी को कई बार बन्द रहने का सामना करना पड़ा है।
 
सरैया डिस्टलरी में बतौर सहायक चिकित्सा अधिकारी पद पर कार्य कर चुके और वर्तमान समय में प्राकृतिक संपदा संरक्षण समिति सरदार नगर के सचिव डॉ अनिल कुमार पाण्डेय ने बताया कि मानक विहीन सरैया डिस्टलरी हजारों व्यक्तियों के साथ-साथ जल, थल, वायु में रहने वाले प्राणियों के जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ करती आई है‌। उन्होंने कहा कि डिस्टलरी के द्वारा फैलाई गई प्रदूषण से इस क्षेत्र के लोग प्रभावित हो रहें हैं साथ ही गन्दे पानी को बायसी वाया राप्ती होकर गंगा में मिलने से गंगा मैली हो रही है ‌। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देश के संबंध में उन्होंने कहा कि डिस्टलरी द्वारा पालन किए जाने पर इस क्षेत्र में रहने वालों को नया जीवन मिल सकता है और बोर्ड का यह कदम सराहनीय है। दूसरी तरफ डिस्टलरी प्रबंधन के द्वारा इस नियम का पालन करना टेढ़ी खीर बनाने जैसा बताया और कहा कि डिस्टलरी को इन शर्तों का पालन करने पर करोड़ों रुपए का इन्वेस्टमेंट करना होगा जिसपर मालिक को अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा‌‌ ‌।
 
अनिल कुमार पाण्डेय ने बताया कि दिशानिर्देश के तहत अब डिस्टलरी को 55 के एल डी से ज्यादा उत्पादन नहीं करना है साथ ही निकलने वाले गंदे पानी के एक बूंद भी बाहर नहीं बहाया जा सकता है ‌। इसके अलावा लैगून में इकट्ठा हो रहे गंदे पानी के क्षमता पर भी नियंत्रण की बात कही गई है साथ ही डिस्टलरी क्षेत्र में कैमरा लगाने आदि विषयों पर दिशानिर्देश जारी किया गया है ‌।
 
अनिल कुमार पाण्डेय ने डिस्टलरी प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन द्वारा दिशानिर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है और जो कुछ बदलाव किए गए हैं वह भी मानक के अनुरूप नहीं है ‌‌। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्य पद्धति पर भी प्रश्न उठाया है क्योंकि इतना अनियमितता के बावजूद भी बोर्ड मौन क्यो रहा‌ जबकि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जांच में कमी पाई गई है।
 
पाण्डेय द्वारा लगाए गए आरोप के संबंध में सरैया डिस्टलरी के जिम्मेदारों से संपर्क करने पर कोई भी कुछ बताने से कतराता रहा जबकि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर से संपर्क करने पर उच्च स्तरीय जांच का विषय कह कर टाल दिया गया।

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