बस्ती-मंहगी सिंचाई करने को मजबूर किसान - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

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Sunday, 6 January 2019

बस्ती-मंहगी सिंचाई करने को मजबूर किसान






जिला- संवाददाता बस्ती 

हरित क्रांति के तहत हर खेत को पानी पहुंच सके किसान सस्ती सिंचाई का लाभ ले सकें उसके लिए
नहरो का संजाल बिछा दिया गया है, लेकिन यह व्यवस्था महज दिखावा बन कर रह गए हैं। यहां 70 फीसद खेती आज भी निजी संसाधनों से की जाती है।

2688 वर्ग किमी क्षेत्रफल के फैलाव वाले इस जनपद में एक लाख 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं  की खेती की जाती है। सिंचित क्षेत्रफल 1.49 हेक्टेयर है। नलकूपों की हालत यह है मरम्मत के नाम पर हर साल लाखो रुपये सालाना खर्च कर दिया जाता है, लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। ये कहीं खराब पड़े हैं, तो कहीं नाली टूट गई है। सबकुछ ठीक है तो विद्युत दोष ही बांधा बन जाती है। तालाब पोखरे जनवरी के पहले पखवाड़े में सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। इनमें जानवरों को पीने के पानी के लाले पड़ जाते हैं,खेतों की सिंचाई तो दूर की बात है।


 


                                                                सूखी नहरें :


जिले में सरयू नहर का फैलाव 139 किमी क्षेत्र में है। आधा दर्जन रजवाहा और अल्पिका नहरें हैं। इनमें से महज तीन पंप नहर कैनाल 30क्यू, चौधरी चरण सिंह कैनाल फैजाबाद और चौधरी चरण सिंह नहर डुमरियागंज हैं। इनसे 1511 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई का दावा किया जाता है। हकीकत यह है इनमें पानी तब आता है जब किसान सिंचाई कर चुके होते हैं। इसको लेकर हाल ही में किसानों ने खरीफ गोष्ठी में हो हल्ला मचाया था। आयुक्त की फटकार के बाद भी जिम्मेदारों की निद्रा नहीं टूटी है। इस समय गेहूं की सिंचाई का मध्य समय चल रहा है। किसान पानी के लिए परेशान हैं। खेती की तैयारी डीजल इंजन के सहारे की जा रही है। नहरों का पानी बहादुरपुर, कुदरहा, हर्रैया, विक्रजोत, दुबौलिया, राम नगर और सल्टौआ क्षेत्रों में जाता है।

 नहरों की सफाई : टेल तक पानी पहुंचाने के नाम पर मनरेगा से ही पिछले चार साल में लाखों से ज्यादा धन खर्च कर दिया गया है,लेकिन नहरों की स्थिति यह है वे झाड़-झंखाड़ से पट गए हैं। जिले की प्रमुख बस्ती पंप नहर कैनाल तक में सफाई नहीं कराई गई है। नहरों में कुल टेलों की संख्या 28 है, लेकिन बरसात के पहले किसी में भी टेल तक पानी नहीं रहता है।



                                                                43 नलकूप बीमार : 

जिले में 591 राजकीय नलकूप हैं। इनमें से 43 यांत्रिक एवं विद्युत दोष से खराब बताए जा रहे हैं। नलकूपों की स्थिति यह है कि अधिकांश की नालियां टूटी हुई हैं। जहां कही सबकुछ ठीक है वे बिजली के अभाव में नहीं चल पाते हैं। आपरेटरों की कमी भी एक बड़ी बाधा है।

जिम्मेदार अधिकारीयों का कहना है कि जिले में सिंचाई के पर्याप्त साधन मौजूद हैं। सिंचाई के लिए नहरें,नलकूप तो हैं ही तालाब-पोखरे और कुएं भी हैं।


-सिंचाई संसाधनों पर एक नजर

-नहर से सिंचित क्षेत्रफल-1511 हेक्टेयर

-राजकीय नलकूपों से सिंचित क्षेत्रफल-10631 हेक्टेयर।

-निजी नलकूपों से सिंचित क्षेत्रफल-124982 हेक्टेयर।

-अन्य स्रोत कुएं-तालाब से सिंचित क्षेत्रफल-11917 हेक्टेयर।


 
नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने को सिंचाई विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं। रही बात नलकूपों की तो इसे ठीक कराने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खेती में सिंचाई के लिए पानी की समस्या नहीं आने पाएग

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