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Thursday, 17 January 2019

वाराणसी - फाइलों में दबा "दालमंडी" के अवैध बेसमेंट का मामला

रिपोर्ट- कैलाश सिंह विकास


वाराणसी: फाइलों में दबा "दालमंडी" के अवैध बेसमेंट का मामला, एक साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, देखे क्या है पूरा मामला


दालमंडी में सील अवैध निर्माण -

वाराणसी के चौक क्षेत्र के दालमंडी में मिले अवैध बेसमेंट का मामला फाइलों में दब गया है। अब यह पूरा प्रकरण शासन के पाले में चला गया है। जब तक फैसला नहीं हो जाएगा, तब तक यह मामला उसी तरह दबा रहेगा। वीडीए ने भी बेसमेंट के दरवाजे को बंद कराकर खानापूर्ति कर ली है।

16 जनवरी की रात्रि में एसएसपी आरके भारद्वाज ने रात्रि गश्त के दौरान मंडी में एक अवैध बेसमेंट में निर्माण होते हुए पकड़ा। इसके बाद जब खुलासा हुआ तो खुफिया एजेंसियों से लेकर सभी के हाथ पांव फूल गए। पिछले कई माह से चल रहे इस निर्माण को लेकर न तो पुलिस को पता था और न ही वीडीए को।

ऐसे में यह पूरा खेल पिछले करीब छह साल से चल रहा था। बाद में वीडीए ने उसे गिराने को कहा लेकिन तब तक फाइल कमिश्नर कोर्ट पहुंच गई। कमिश्नर के आदेश पर वीडीए की ओर से जारी ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ शासन में अपील हुई तो मामला लटक गया।

मामले के अधर में लटकने के चलते ही वीडीए ने प्रवेश द्वार को बंद करा दिया। हालांकि आज तक वीडीए और पुलिस एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। पुलिस का कहना था कि अवैध निर्माण रोकने का काम पुलिस का नहीं है, जबकि वीडीए का कहना था कि रात्रि में हो रहे निर्माण पर वीडीए कारवाई नहीं कर सकता है।

मुकदमा दर्ज करने तक सिमटी पुलिस

यूपी पुलिस

इतने बड़े मामले और सुरक्षा को लेकर हो रहे खिलवाड़ के बाद भी पुलिस ने एक साल में इस मामले में मंसूर अहमद, शहीद अली, शमशेर आलम, अली जान व शायरा व राबिया बानो पर केस दर्ज करके खानापूर्ति कर दी। वीडीए भी शासन स्तर पर फाइल जाने के बाद आराम फरमाने लगा है, लेकिन हल आज तक नहीं निकल पाया। दालमंडी इलाके में अवैध बेसमेंट बनने और उस बेसमेंट के खुलने की शिकायत हुई है।

ऑनलाइन हुई इस शिकायत में पुलिस और वीडीए के अलावा जिला प्रशासन को भी पत्र लिखा गया है। भेलूपुर के एक व्यक्ति ने फिर से बेसमेंट का प्रयोग होने और नए बेसमेंट बनाने की शिकायत की है। जोनल अधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि बेसमेंट को उसी समय सील कर दिया गया था। बाद में किसी प्रकार की कोई घटना न हो। इसलिए उसे दीवार बनाकर बंद कर दिया गया। शासन के आदेश पर अगला कदम उठाया जाएगा।

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