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Tuesday, 5 February 2019

जनता इनके खेल का हिस्सा बनकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेती है-मुद्दे से भटकाने की राजनीति

ब्यूरो गोरखपुर -कृपा शंकर चौधरी
 
भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं और इस देश का संविधान देश के नागरिकों द्वारा सरकार चुनने का अधिकार देता है । किन्तु आजादी के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों ने जो सपने संजोए थे और जिस प्रकार के भारत की परिकल्पना की थी हम उससे अभी कोसों दूर है। ग़रीबी , बेरोजगारी एवं धार्मिक उन्माद की दंस झेल रही जनता पूर्ण रूप से स्वतंत्र होने की अब भी राह जोह रही है किन्तु सत्ता लोलुप राजनेताओं द्वारा किश्म किश्म के मीठी गोलियां देकर जनता को भटका दिया जाता है और मुर्ख जनता इन नेताओं के झांसे में आकर पुनः मुर्ख बन जाती है।
 
 
राजनेता जानते हैं कि कि चुनाव के समय जनता कार्यो का आकलन करने के बाद वोट देगी और जनता के आधार भूत कार्य की अनदेखी करने वाले को सत्ता से हाथ धोना पड़ेगा इसके लिए नेताओं द्वारा जनता का ध्यान भटकाने के लिए जाति धर्म आधारित द्वेश या किसी अन्य प्रकार के मकड़जाल के द्वारा मुख्य मांगों से भटका दिया जाता है और पुनः सत्ता में आकर शोषण निरंतर जारी रहता है। विचारणीय विषय यह है कि पूंजीपतियों का जूता चाटने वाले इन नेताओं के इस कृत्य में पूंजीपतियों द्वारा भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जाता है।
 
भारत जैसे जन-धन और प्राकृतिक संपदा से भरे इस देश को नेताओं द्वारा दीमक की भांति खोखला करने का कार्य किया जा रहा है और इसका अप्रत्यक्ष रूप से पूंजीपतियों को लाभ पहुंच रहा है जिसके कारण देश की अधिकांश धन चन्द लोगों तक सीमित होकर रह गया है नतीजतन गरीब और गरीब और अमीर और अमीर बनता जा रहा है। देश में इस विषय पर किसी वर्ग द्वारा आवाज उठाने की स्थिति में आरक्षण, पेंशन, सब्सिडी आदि नाना प्रकार के प्रलोभन देकर आवाज को दबा दिया जाता है ‌। राजनीति के इस खेल में सरकार और विपक्ष दोनों मज़े हुए खिलाड़ी की भांति अपने किरदार निभाते हैं और जनता इनके खेल का हिस्सा बनकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेती है।

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