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Friday, 7 June 2019

उन्नाव-सीएमओ आफिस में घोटाला


रिपोर्ट -उमेश शुक्ला

स्वास्थ्य विभाग सिर्फ और सिर्फ लूट खसोट में लगा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर मामले में सिर्फ पैसो की बंदर बांट करने में लगे हैं। सीएमओ ने बिना ई टेंडर एक करोड़ दस लाख रुपये खर्च कर दिए। इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कुछ कर्मचारियों ने डीएम को लिखित शिकायत देकर उनके भुगतान न किये जाने की बात कही थी। जिसके बाद डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में एक तीन सदस्यी जांच टीम गठित कर जांच करने का आदेश दिया। जांच में टीम ने पाया कि स्वास्थ्य विभाग में फर्नीचर खरीद में गड़बड़झाला हुआ है। और इसकी खरीद के लिए जेम पोर्टल से फर्म को फर्नीचर आपूर्ति का ऑर्डर दे दिया गया।

उन्नाव के स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ दस लाख रुपये के फर्नीचर व उपकरण खरीद में मानकों की अनदेखी की गई। तीस लाख से अधिक रकम खर्च करने की स्थिति में ई टेंडर प्रक्रिया अपनाने के निर्देश के बाद भी सीएमओ ने जेम पोर्टल के जरिए दो फर्म से करोड़ों रुपये का सामान खरीद डाला। कर्मचरियो ने डीएम से लिखित शिकायत की थी कि विभाग द्वारा उनके भुगतान नही किये जा रहे है, जिसके बाद डीएम के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम द्वारा की गई जांच में इस पूरे खेल का खुलासा हुआ है। टीम को अस्पतालों में प्रयोग होने वाले उपकरण, साज सज्जा के उत्पादों की खरीद में भी गड़बड़ी मिली है। टीम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। जांच टीम ने रिपोर्ट में बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा किया है। छह माह पूर्व सीएमओ कार्यालय में ३९८९००० रुपये खर्च कर फर्नीचर खरीदा गया था। सीएमओ ने फर्नीचर खरीद के लिए ई टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई। जेम पोर्टल के जरिए उन्होंने डीएम इंटरप्राइजेज अमीनाबाद व मेसर्स महाबली इंटरप्राइजेज इंदिरा नगर के जरिए फर्नीचर खरीदा। इसके अलावा १० लाख रुपये के उपकरण और ५७ लाख रुपये से अधिक का साज सज्जा का सामान भी जेम पोर्टल के जरिए ही खरीदा गया। फर्नीचर खरीद में गुणवत्ता की अनदेखी भी की गई। इसकी शिकायत जब डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय को मिली तो उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए। सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी व जिला समाज कल्याण अधिकारी ने जांच की। जांच में पता चला कि १५ दिन के अंदर जेम पोर्टल के जरिए १.१० करोड़ रुपये का सामान दो फर्मों से खरीदा गया। प्रत्येक खरीद में किसी भी यूनिट से मांग पत्र भी नहीं भेजा गया था। जांच टीम को फर्नीचर व उपकरणों की गुणवत्ता के संबध में भी कोई प्रमाण पत्र नहीं मिला। क्रय प्रक्रिया को वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में रखते हुए जांच टीम ने रिपोर्ट डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय को भेज दी है। सीएमओ डॉक्टर लालता प्रसाद ने बजट उपयोग करने के लिए खर्च कर दिया १० लाख। स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न सीएचसी के लिए १० लाख रुपये खर्च कर २६ उपकरण भी खरीदे हैं। जांच टीम ने उपकरणों के संबंध में जब मांग पत्र मांगे तो वह नहीं मिले। इसके अलावा उपकरणों की गुणवत्ता प्रमाण पत्र व सामग्री का मानक भी नहीं मिला है। जांच टीम ने रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है दस लाख रुपये का खर्च मात्र बजट को खपाने के उद्देश्य से किया गया। इस बड़े खेल में सीएमओ ने एक ही दिन में ५० लाख का आर्डर भेज दिया। सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में साज सज्जा के नाम पर खर्च किए गए ५० लाख रुपये में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बिना किसी मांग पत्र के ४ जून को 50 लाख रुपये का आर्डर भेज दिया था। टीम को यह खर्च वित्तीय नियम के अनुरूप नहीं मिला है। टीम ने जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने बिना मांग पत्र के रोल बैंडेज, बेड शीट का क्रय किया है।

कर्मचारियों ने जो भुगतान को लेकर शिकायत की थी उसमें भी बड़ा खेल सामने आए है। स्वास्थ्य कर्मियों को माह की ५ तारीख तक वेतन भी नहीं मिल रहा है। अधिकतर सीएचसी में 15 तारीख के बाद वेतन दिया जा रहा है। इसके अलावा सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान भी छह माह तक नहीं किया गया। जबकि विभाग को २६ अप्रैल 2018 को पहली किश्त व १६ अक्तूबर को दूसरी किश्त मिल गई थी। जांच टीम ने किसी अन्य मंशा से वेतन समय से निकालने व एरियर रोकने की रिपोर्ट डीएम को दी है।


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