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Sunday, 14 July 2019

चंदौली - गोवंश आश्रय स्थल के प्रभारी सीडीओ साहब ने लापरवाही पर की कड़ी कार्रवाई

चंदौली संवाददाता रितेश राय

खबर यूपी के चंदौली से है यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने निराश्रित छुट्टा घुमंतू गोवंश के लिए आश्रय स्थल बनाकर उनकी समुचित देखरेख के लिए जनवरी 2019 में एक योजना शुरू की थी | जिसको मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा गया | मुख्यमंत्री ने आदेश कर दिया और आदेश का पालन भी शुरू हो गया | लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया जिम्मेदार अधिकारी इस आदेश की अवहेलना करना भी शुरू कर दिए | हालत ये है की घुमंतू छुट्टा पकड़े गए गोवंश आश्रय स्थलों में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं | जब हमने चंदौली जिले में गोवंश आश्रय स्थल की हकीकत जानना चाहा तो हमारी आंखें गोवंश आश्रय स्थल का नजारा देखकर फटी की फटी रह गई बद से बदतर स्थिति में गोवंश को रखा गया है | उनका समुचित ध्यान नहीं रखा जा रहा है और कई गोवंश मरणासन्न स्थिति में है | जब अधिकारियों से इस बाबत बात की गई तो एक दूसरे पर दोषारोपण कर पल्ला झाड़ते दिखे | वहीं जिला में गोवंश आश्रय स्थल के प्रभारी सीडीओ साहब ने लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है लेकिन वो खुद जिले के किसी भी गोवंश आश्रय स्थल की हक़ीक़त जानने मौके पर नहीं गए |यह नजारा है चकिया नगर पंचायत के द्वारा बनाये गए गोवंश आश्रय स्थल का | यह गोवंश आश्रय स्थल पशु चिकित्सालय परिसर में बनाया गया है लेकिन मजे की बात यह है कि इनकी देखरेख करने के लिए पशु चिकित्सक नदारद है | आप देख सकते हैं किस तरह यह गोवंणश आश्रय स्थल बारिश के पानी से तालाब में तब्दील हो गया है और कीचड़ के बीच गोवंश रहने को मजबूर हैं | यही नहीं कई गोवंश मरणासन्न स्थिति में है जिनकी हालत बहुत खराब है | यहां पर तैनात कर्मचारी किसी तरह इन गोवंश का देखरेख कर खानापूर्ति कर रहे हैं |


लेकिन यहाँ पर रखे गए  गोवंश को ना समुचित भोजन मिल पा रहा है ना समुचित इनकी देखरेख हो पा रही है | इस आश्रय स्थल में रखे गए गोवंश के लिए पर्याप्त तीन शेड की व्यवस्था भी नहीं की गई है और ना ही फर्श पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है ताकि वह कीचड़ गंदगी से दूर रह सकें |आपको जानकर हैरानी होगी जब इस बाबत चकिया नगर पंचायत के अधिशासी अभियंता से बात की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए ठेकेदार पर दोषारोपण करते हुए कहा कि ठेकेदार को और टिन शेड लगाने के लिए कहां गया है और पशु चिकित्सक को भी  गोवंश की देखरेख के लिए बोला गया है | लेकिन खुद अधिशासी अभियंता साहब एक दिन भी उस गोवंश आश्रय स्थल का निरिक्षण करने नहीं जाते |प्रत्येक जिले में निराश्रित गोवंश की देखरेख और उनके आश्रय स्थल के प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी को बनाया गया है | जब हमने मुख्य विकास अधिकारी से बात की और सारे मामले से अवगत कराया तो एक बार उनको भी झटका लगा और तत्काल उन्होंने फोन पर मुख्य पशु चिकित्सक और अधिशासी अभियंता को फटकार लगाई  | सीडीओ साहब ने बचाव करते हुए कहा की मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने डॉक्टर की टीम भेज दी है इलाज किया जा रहा है अभी स्थिति ठीक है | CDO साहब ने कहा नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी वहां तय की गई है उनसे पूछा जाएगा और अगर लापरवाही हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी |

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