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Wednesday, 3 July 2019

फर्रुखाबाद जिले के संकिसा में बौद्ध अनुयाइयों और सनातन धर्मियों के बीच फिर विवाद

रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले  के संकिसा में बौद्ध अनुयाइयों और सनातन धर्मियों के बीच फिर विवाद गहरा गया है। प्रतिवर्ष यहां लगने वाले आषाढ़ी मेले का विरोध बौद्ध अनुयाइयों ने शुरु कर दिया है। बौद्ध अनुयाई पुरातत्व विभाग के एमटीए को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे । एमटीए ने सनातन धर्मियों और थानाध्यक्ष मेरापुर पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। एमटीए ने विवादित बौद्ध स्तूप को ढहाने का खतरा बताया है। संकिसा में बौद्ध स्तूप और विषहरी देवी को लेकर बर्ष 1986 से विवाद चला आ रहा है। न्यायालय ने दोनों पूजा स्थलों पर  पूजा करने पर रोक लगा दी है। बौद्ध भिक्षु धम्मपाल थेरो का कहना है कि इस स्थान पर भगवान बुद्ध ने अखण्ड साधना की थी। उनका बनबाया हुआ स्तूप आज भी यहां मौजूद है।इस वजह से विश्व भर के बौद्ध अनुयाई यहां आकर पूजा अर्चना करते हैं। दुनियां भर के बौद्ध अनुयाइयों के लिए संकिसा तीर्थ है। विषहरी देवी संघर्ष समिति के अध्यक्ष सनातन धर्मी अतुल दीक्षित का कहना है कि यहां हिंदुओं की देवी विषहरी देवी का मंदिर है।इस बजह से यह स्थान सनातन धर्मियों के आस्था से जुड़ा हुआ है। इस लड़ाई के चलते इस स्थान तथा आस पास की भूमि पर न्यायलय ने नया निर्माण करने व पुराने को गिराने पर रोक लगा दी है। विश्व भर से बौध्द अनुयाई यहां शरद पूर्णिमा पर आते हैं। वह बुद्धा अवतरण समारोह मनाते हैं, लेकिन न्यायालय की रोक की बजह वह स्तूप पर पूजा न करके नीचे ही पूजा अर्चना करके वापस लौट जाते हैं।



 सनातन धर्मियों की ओर से यहां हर बर्ष गुरुपूर्णिमा पर  आषाढ़ी मेला लगवाया जाता है। इस बर्ष बौद्ध अनुयाइयों ने मेले का  जोर शोर से विरोध किया। लेकिन जिला प्रशासन ने मेला लगने की सशर्त परमीशन  दे दी। तब बौद्ध भिक्षु धम्मपाल थेरो ने अपने पक्ष में पुरातत्व विभाग के एमटीए इस्लामुद्दीन को ले लिया। आज इस्लामुद्दीन को लेकर बुद्ध अनुयाई जिला मुख्यालय पहुंचे। इस्लामुद्दीन ने जिलाधिकारी मोनिका रानी के समक्ष आरोप लगाया कि सनातन धर्मी अतुल दीक्षित, कुलदीप, प्रांशु,आशू, वेदप्रकाश, दामोदर मिहीलाल उसकी हत्या करवा सकते हैं।यह लोग कई वार जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। उसने कहा कि यह लोग विवादित स्थान पर मेला लगवाने जा रहे हैं। उसे विरोध करने पर नदी में फेंक देने की धमकी दे रहे हैं। उसने कहा कि यह लोग किसी भी दिन बौद्ध स्तूप को ढहा सकते हैं। इस बजह से उसे यहां से चले जाने की धमकी दे रहे है। वह पुरातत्व विभाग दिल्ली की ओर से यहां प्रतिबंधित स्थान की रखवाली व देख रेख कर रहा है। उसने कहा कि 1 जुलाई को  यहां थानाध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी चार सिपाहियों के साथ आये।उन्होंने उसे बुलाकर धमकी दी कि सनातन धर्मी जो करते हैं ,उन्हें करने दे। अगर बीच में रोड़ा बना तो उसे जेल भेज दिया जाएगा। उसने जिलाधिकारी को बताया कि पुरातत्व विभाग के अधिकारी उससे जानकारी कर रहे हैं।सही रिपोर्ट देने पर यह लोग उससे नाराज हैं। बौद्ध अनुयाइयों का कहना है कि वह भगवान  बुद्ध की तपस्थली पर मेला लगने नहीं देंगे ।

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