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Sunday, 18 August 2019

ताजपुर ग्राम पंचायत के मौजा रनीयापुर की राजभर बस्ती डायरिया की चपेट में





बाराचवर। ताजपुर ग्राम पंचायत के मौजा रनीयापुर की राजभर बस्ती डायरिया की चपेट में आ गई है। किशोरी कुसुम(17) पुत्री हरिहर राजभर की मौत हो चुकी है जबकि उसकी दादी देवमुनिया तथा पिता सहित बस्ती के 32 लोग पीड़ित हैं। उन्हें न्यू पीएचसी ताजपुर, सीएचसी बाराचवर, जिला अस्पताल बलिया और मऊ के अलावा निजी अस्पतालों में दाखिल हैं। डायरिया की खबर से प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा वाकिफ है।



एसडीएम मुहम्मदाबाद, तहसीलदार मुहम्मदाबाद सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बस्ती का शुक्रवार को दौरा किए।

न्यू पीएचसी ताजपुर के इंचार्ज आशुतोष गुप्त ने बताया कि बस्ती में डायरिया की शिकायत सोमवार को मिली थी। उसके बाद ही बस्ती में दवा का छिड़काव, हैंडपंपों के पानी को विसंक्रमित किया गया। हर घर में जरूरी दवा वितरित की गई। कारण के सवाल पर उन्होंने बताया कि बस्ती में निकासी के अभाव में लगभग चहुंओर बारिश का पानी जमा हो गया है। डॉ.गुप्त ने दावा किया कि अब बस्ती की स्थिति नियंत्रण में है। बताए कि बस्ती की किशोरी की मौत मंगलवार को बलिया जिला अस्पताल में हुई। अन्य पीड़ितों की स्थिति में सुधार की सूचना मिल रही है। पीड़ितों में महिलाएं तथा बच्चे भी शामिल हैं। 




उधर ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के पानी के जमाव डायरिया का मुख्य कारण है। उसके साथ ही पीड़ित परिवारों ने दूषित मांस-मछली खाया।




ताजपुर ग्राम पंचायत के रहने वाले भासपा नेता शक्ति सिंह रनीयापुर मौजा की राजभर बस्ती की इस हालात के लिए सरकारी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि बड़ा सवाल है कि ग्राम पंचायत में पीएचसी के बावजूद एक मासूम किशोरी को नाहक अपनी जान क्यों गंवानी पड़ी। फिर डायरिया पीड़ितों का उपचार पड़ोसी जिलों में क्यों हो रहा है। साफ है कि ताजपुर की न्यू पीएचसी में जरूरी चिकित्सकीय संसाधन नहीं हैं। उसका भवन जर्जर है। 



राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर जब कैबिनेट मंत्री थे, तब उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र की ताजपुर ग्राम पंचायत की राजभर बस्ती समेत अन्य हिस्से में बारिश के पानी की निकासी के लिए डेढ़ किलोमीटर लंबे नाले के निर्माण और न्यू पीएचसी को उच्चकृत कर 100 बेड की सीएचसी के निर्माण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। भाजपा सरकार की भेदभाव की नीति का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है।


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