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Thursday, 11 June 2020

महाराजा सुहेलदेव राजभर का 986 वां विजय दिवस शौर्य दिवस सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने मनाया

लखनऊ ब्यूरो

महाराजा सुहेलदेव राजभर का 986 वां विजय दिवस शौर्य दिवस सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने मनाया

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय ओम प्रकाश राजभर के आवाहन पर उत्तर प्रदेश के समस्त जिलों तहसीलों एवं गांवो में तथा देश के विभिन्न प्रांतों में महाराजा सुहेलदेव राजभर का 986 वां विजय दिवस शौर्य दिवस के रूप में पूरे धूमधाम से मनाया गया । इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने दीप जलाकर जहां दीपोत्सव मनाया वहीं सुहेलदेव राजभर जी के स्वर्णिम इतिहास के बारे में एक दूसरे को बताने का कार्य किया।
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महाराजा त्रिलोकचंद के वंशजों में सुहेलदेव जी का जन्म 1009 ईस्वी बसंत पंचमी के दिन को हुआ था। सुहेलदेव राजभर जी एक अत्यंत ही वीर पराक्रमी राष्ट्रभक्त होने के साथ-साथ हिंदू संस्कृति के सबसे बड़े रक्षक थे। धनुष विद्या, शब्दभेदी बाण ,तलवार, गदा एवं भाला चलाने  में निपुण सुहेलदेव राजभर जी एक उच्च कोटि के शासक थे।
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अपने राज्य -काल में उन्होंने समता, स्वतंत्रता बंधुत्व एवं न्याय का सिद्धांत लागू किया था। जिससे प्रेरित होकर कालांतर में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने भारतीय संविधान की रचना करने के बाद समता, स्वतंत्रता ,बंधुत्व एवं न्याय को ही स्लोगन के रूप में चुना। डॉक्टर अंबेडकर के साथ ही देश के अनेक महापुरुषों ने सुहेलदेव राजभर जी को अपना आदर्श माना।
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 सुहेलदेव जी के शासन काल में लोग घरों में ताला नहीं लगाते थे।
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भारतवर्ष में मजहबी उन्माद फैलाने ,मंदिरों को तोड़कर देश का खजाना लूटने तथा हमारी बहन बेटियों की इज्जत आबरू से खेलने का मंसूबा लेकर महमूद गजनवी का भांजा सैयद सालार मसूद गाजी ने 1031 ईस्वी को दिल्ली पर आक्रमण किया। हजारों मंदिरों को तोड़ा सैकड़ों रियासतों और राजाओं को जबरन धर्म परिवर्तन करवाया। हजारों बहन बेटियों को बेइज्जत किया और देश का अकूत खजाना लूटकर गजनी प्रदेश भेजता रहा। इस कुकृत्य से उसका अभिमान बढ़ता गया।
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1034 में बहराइच में उसका सामना श्रावस्ती नरेश चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर जी से हुआ । सुहेलदेव राजभर जी ने ना सिर्फ उसके लाखों सैनिकों को परास्त किया बल्कि घमासान युद्ध में सालार मसूद गाजी का वध करके एक अत्यंत ही दुर्दांत एवं खूंखार आक्रांता का अंत किया। 10 जून 1034 को गाजी मारा गया । जिसको विजय दिवस के रूप में मनाने की मान्यता रही है।
जब-जब समाज में असमानता फैली है तब तक ऐसे ही वीर पुरुषों ने पृथ्वी पर समता, स्वतंत्रता ,बंधुत्व और न्याय को स्थापित किया है।
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यह कहते हुए अत्यंत खेद होता है कि देश के इतिहासकारों ने विदेशी आक्रांताओं का तो इतिहास लिख दिया लेकिन सुहेलदेव राजभर जी ,पृथ्वीराज चौहान, अहिल्याबाई होल्कर,गुहराज निषाद ,चंद्रगुप्त मौर्य ,बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों का इतिहास लिखने में कोताही बरतने का काम किया।
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राष्ट्र रक्षक वीर योद्धा महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के दिखाए आदर्शो पर चलते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय ओम प्रकाश राजभर जी ने 18 वर्ष पूर्व समाज में फैली हुई असमानता को दूर करके पुनः समता स्वतंत्रता बंधुत्व तथा न्याय को स्थापित करने की शपत लेकर  सारनाथ में स्थापित सुहेलदेव राजभर जी की मूर्ति की पूजा के बाद "सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी" की स्थापना किया था।
 आने वाला 2022 उत्तर प्रदेश में महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की सोच उत्तर प्रदेश में लागू होने की शुभकामना के साथ सभी लोगों को शौर्य दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए माननीय ओम प्रकाश राजभर ने सबको सुहेलदेव जी के आदर्शो पर चलने का आवाहन किया।

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