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Wednesday, 22 July 2020

जब शासन से नही बना पुल तो ग्रामीणों ने खुद बना डाला लकड़ी का पुल

ब्यूरो कानपुर देहात:अरविन्द शर्मा 

जब शासन से नही बना पुल तो ग्रामीणों ने खुद बना डाला लकड़ी का पुल

जनप्रतिनिधियों ने कभी नही ली गांव की सुध,अब विधायक निर्मला संखवार ने दिया पुल बनवाने का आश्वासन।

सदन में उठाया था मुद्दा

कन्नौज जनपद की सीमा पर है बंदराहा गांव।

जब गांव में नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने थक हार कर स्वयं ही लकड़ी का पुल खड़ा कर दिया। जिसके बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं यह लकड़ी का पुल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही को भी दर्शाता है। 
        

जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मिर्जापुर लकोठिया का मजरा बन्दराहा में आज़ादी के 70 साल बाद ग्रामीण आज भी बदतर हालत में जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं। जिसका मुख्य कारण जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा है। बन्दराहा गांव रसूलाबाद विकास खंड की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है।  बन्दराहा गांव कन्नौज जनपद की सीमा पर स्थित है। इस गांव में कोई भी प्राथमिक व जूनियर विद्यालय नहीं है। साथ ही विकास कार्यों में गांव वालों से भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया जाता है। यहां के रहने वाले लोगो ने बताया कि गांव में कोई विद्यालय नहीं है जिसके चलते गांव के बच्चे नदी पार करके सिमरिया कन्नौज पढ़ने के लिए जाते हैं। लेकिन सिमरिया कन्नौज की दूरी दूसरे रास्ते से बहुत है। जिसके चलते नदी पार करने पर महज 3 किलोमीटर में ही गांव के लोग सिमरिया पहुंच जाते हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को पांडु नदी पर पुल बनाने की मांग की थी लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जिसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही पुल बनाने का बीड़ा उठाया और चंदा एकत्र करके लकड़ी मंगवाई और पिलर खड़े करके लकड़ी का पुल बना दिया। जिससे कोई भी पैदल व्यक्ति आसानी से पुल के माध्यम से पांडु नदी को पार कर जाता है। लेकिन खतरे की संभावना रहती है। गौरतलब हो जून और जुलाई में लोग तो आसानी से गुजर जाते हैं लेकिन बरसात के मौसम में भारी बारिश के बाद यह पुल बह जाता है। जिसके बाद इस गांव के बच्चे लगभग 3 महीने विद्यालय पढ़ने नहीं जा पाते ।उत्तर प्रदेश सरकार भले ही विकास के दावे करती हो लेकिन रसूलाबाद विकास खंड क्षेत्र के बन्दराहा गांव में उसकी झलक नहीं दिखती। यहां आज भी आजादी के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। यहां के रहने वाले शिवराम सिंह, हरिओम, चंद्रपाल, रामपाल,महिपाल, सर्वेश इत्यादि लोगों ने बताया कि बन्दराहा गांव से सिमरिया के लिए न बड़ा सही कम से कम एक छोटा पुल बन जाए। जिससे लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो और बच्चे भी आसानी से पढ़ने के लिए विद्यालय जा सके। ग्रामीणों ने बताया कि उनके सभी कार्य सिमरिया,औसेर गांव से होते हैं। विषधन की दूरी अधिक होने के कारण कोई नहीं जाता। इसके लिए आवश्यक है कि एक छोटे से पुल का निर्माण करा दिया जाए ताकि गांव को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

*जान जोखिम में डालकर पार करते है लकड़ी का पुल*

रसूलाबाद।  बंदराहा लकोठिया गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पुल को पार करते हैं। ग्रामीणों की माने तो उनका जनप्रतिनिधियों से भरोसा उठ गया है। यदि वह ऐसे पुल पार न करें तो गांव में आवागमन और रोजमर्रा की जिंदगी कैसे कटे।

*डूबने से हो चुकी कई मौतें*

रसूलाबाद। पुल न होने के चलते ग्रामीण तैरकर या पानी के बीच से निकलकर पांडु नदी को पार करते थे। जिसके चलते पूर्व में कई लोग अपनी जाने भी गंवा चुके हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए एक छोटे पुल का निर्माण करा दिया जाए ताकि आवागमन प्रभावित न हो।


*विधायक ने लिखा पत्र*

रसूलाबाद। रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला संखवार को जब यह बात पता चली तो उन्होंने उक्त संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों व मंत्री को पत्र लिखकर उक्त स्थान पर पुल निर्माण कराए जाने के लिए आग्रह किया। उन्होंने बताया कि पुल निर्माण के लिए वे प्रयासरत है जल्द ही बन्दराहा गांव में पुल बनेगा।


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