BANDA गजब: किसानों में पानी के लिये हाहाकार, नलकूप विभाग बना सफेद हाथी! - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

आज की बड़ी ख़बर

Monday, 30 November 2020

BANDA गजब: किसानों में पानी के लिये हाहाकार, नलकूप विभाग बना सफेद हाथी!

सलिल यादव बांदा

गजब: किसानों में पानी के लिये हाहाकार, नलकूप विभाग बना सफेद हाथी!

बांदा।जिले का नलकूप विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। सिचाई के पानी के लिये किसानों में हाहाकार हैं और विभाग कुंभ कर्णी निद्रा के रोल में सा है। हर सीजन में पानी देनें में अधिकांश सरकारी नलकूप हाथ खड़े कर देते हैं। किसान पर आफत आ जाती है।
अब फिर हालत यह हैं की खरीफ के बाद अब रबी में भी किसानों के खेत पानी के लिए तरस रहे हैं। जिले के 91 सरकारी नलकूप बंद हैं। इनमें 71 नलकूप फेल हो चुके हैं और 20 यांत्रिक या बिजली की गड़बड़ी से बंद पड़े हैं।
नतीजतन 9100 हेक्टेयर खेती की सिंचाई नहीं हो पा रही। लाखों रुपये की पूंजी लगाकर बुआई करने वाले सैकड़ों किसानों में चिंता के साथ आक्रोश भी है। नलकूप विभाग बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
जिले में कुल 747 सरकारी नलकूप हैं। इनसे 74,700 हेक्टेअर खेती की सिंचाई होती है। मौजूदा में सिर्फ 656 नलकूप ही चल रहे हैं, जिनसे 65,600 हेक्टेयर भूमि सींची जा रही है। बंद पड़े 91 नलकूपों से 9100 हेक्टेयर खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है।
यांत्रिक (मैकेनिकल) दोष से बंद नलकूप संख्या-96 (जमालपुर), 243 (पचनेही), 20 (डांड़ामऊ), 216 (भदेहदू), 203 (मुसीवां), 126 (औगासी), 73 (अलिहा), 89 (बंबिया), 24 (छिरेहुंटा), 260 (पिपरहरी) और विद्युत (इलेक्ट्रिकल) गड़बड़ी से बंद नलकूप- 170 (बेंदा), 193 (छापर), 146 (महबरा), 39 (चंदवारा), 96 (मऊ), 125 (मवई जुनारदार), 33 (तारा), 164, 163 (जौहरपुर), 21 (गजनी)।
बांदा। जिले को दो सालों से एक भी नया नलकूप शासन से आवंटित नहीं हुआ है। वर्ष 2019 में 1101 नलकूप योजना के तहत जिले को चार नलकूप मिले थे। इनमें अभी तक महज एक नलकूप भाटी (बबेरू) गांव में लगा है। तरायां (बबेरू) व मरझा (जसपुरा) गांवों के नलकूप अधूरे हैं। चौथे नलकूप के लिए स्थान चिह्नित नहीं हो सका है। प्रत्येक नलकूप की लागत लगभग 27 लाख रुपये है। चारों नलकूपों के लिए बजट आवंटित हो चुका है।
दो साल से नहीं मिला बजट
नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि फेल नलकूपों के रिबोर के लिए दो साल से बजट नहीं मिला है। खराब नलकूपों की मरम्मत के लिए पूरे साल में प्रति नलकूप आठ हजार रुपये मिलते हैं। इससे मामूली मरम्मत ही पाती है। पाइप लाइन या मोटर बदलने का काम नहीं हो सकता। शासन को समय-समय पर फेल और खराब नलकूपों के बारे में अवगत कराया जाता है।

No comments:

Post a comment

तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।