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Saturday, 21 November 2020

‘‘जनरूचिकारी नहीं जनहित वाली हो पत्रकारिता’’बाबूराव विष्णु पराड़कर की जयंती पर ‘‘आज की पत्रकारिता’’ गोष्ठी का आयोजन

कैलाश सिंह विकास वाराणसी

‘‘जनरूचिकारी नहीं जनहित वाली हो पत्रकारिता’’
बाबूराव विष्णु पराड़कर की जयंती पर ‘‘आज की पत्रकारिता’’ गोष्ठी का आयोजन

वाराणसी, 20 नवम्बर। बाबूराव विष्णु पराड़कर जी की जयंती पर आज पराड़कर स्मृति भवन में ‘‘आज की पत्रकारिता’’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि पत्रकारों को जनरूचिकारी नहीं बल्कि जनहितकारी समाचारों पर जोर देना चाहिए। 
संगोष्ठी के मुख्यअतिथि व जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो॰ हरिकेश सिंह ने कहा कि आज की पत्रकारिता संकट के दौर से गुजर रही है। एक समय था जब पत्रकारिता एक साधना थी। लेकिन खबरों को सबसे पहले परोसने की होड़ में यह साधना भंग हो रही है। नतीजा है कि सत्यता की परख किये बगैर खबरें लाॅंच कर दी जाती है। जिससे मीडिया की विश्वसनियता घटती जा रही है। प्रो॰ सिंह ने कहा कि पराड़कर जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम बाबूराव विष्णु पराड़कर की प्रतिमा से अपनी प्रतिभा और उनके चित्र से अपना चित्त सवारें। 
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जन सम्प्रेषण विभाग के प्रो॰ अनुराग दवे ने कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि पराड़कर जी के दौर और आज के दौर में बहुत अंतर है, तो इससे मैं सहमत नहीं हूं। पराड़कर जी के दौर में भी चुनौतियां थीं और आज भी हैं। उस दौर में भी सत्ता की खामी को उजागर करना पत्रकारों का धर्म था और आज भी है। यह हमें सोचना होगा कि क्या आज के पत्रकार इस धर्म को वास्तव में निभा पा रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि लोग मिशन और प्रोफेशन की बात करते हैं। यह सच है कि आज की पत्रकारिता मिशन नहीं प्रोफेशन हो चुकी है। आज के पत्रकार इस प्रोफेशन को आजीविका के लिए तो अपनाते हैं लेकिन वह अपने दायित्वों को भूल जाते हैं। पराड़कर जी को आज लोग इस लिए भी याद करते हैं कि तमाम संकटों के बावजूद वे अपने पत्रकारिता धर्म और दायित्वों से विमुख नहीं हुए।
महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान (काशी विद्यापीठ) के निदेशक प्रो॰ ओम प्रकाश सिंह ने आज के दौर की पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया ने मनुष्य के अति करीब जाकर देखना कम कर दिया है। यही आज के दौर की पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौति है। हमें यह भी देखना होगा की पराड़कर जी के दौर में किस तरह के लोग पत्रकारिता में थे और आज के दौर में कैसे-कैसे लोग पत्रकारिता में आ चुके हैं। इस कमी का तो खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। जरूरत यह है कि पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता करे, यही संकट का समाधान है। संगोष्ठी में काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री केडीएन राय, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश प्रताप समेत अन्य लोगों ने भी विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी संचालन प्रदीप कुमार ने व धन्यवाद ज्ञापित काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष श्री राजनाथ तिवारी ने किया। प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत संघ के महामंत्री मनोज श्रीवास्तव ने किया। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में संघ के पूर्व अध्यक्ष सुभाषचन्द्र सिंह, पूर्व महामंत्री डा॰ अत्रि भारद्वाज, वाराणसी प्रेस क्लब के मंत्री पंकज त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष शंकर चतुर्वेदी, राजेन्द्र यादव, आनन्द मौर्य, डा॰ नागेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पाण्डेय, आर संजय, जयनारायण, उमेश गुप्ता,  डा॰ जितेन्द्रनाथ मिश्र, प्रो॰ विश्वासचन्द्र श्रीवास्तव समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


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