लखनऊ ब्यूरो
लखनऊ। प्राउटिस्ट सर्व समाज (PSS) ने 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेन-देन से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और जीएसटी व्यवस्था को लेकर अपना आधिकारिक आर्थिक दृष्टिकोण जारी किया है। संगठन ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना।
PSS के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुव नारायण प्रसाद ने जारी बयान में कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित न हो। संगठन ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में उपभोक्ताओं के P2P और P2M भुगतान को शुल्क-मुक्त रखा गया है और भविष्य में भी आम उपभोक्ताओं के लिए यह सुविधा बनी रहनी चाहिए।
संगठन ने छोटे और स्थानीय व्यापारियों को डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्कों से राहत देने की मांग की है। PSS का कहना है कि व्यावसायिक डिजिटल लेन-देन पर लगने वाले शुल्क का प्रभाव छोटे दुकानदारों के लाभ मार्जिन पर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय और लघु व्यापारियों को डिजिटल भुगतान गेटवे शुल्क से सुरक्षा देने की आवश्यकता है।
PSS ने UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली को जन-कल्याण से जोड़ने पर जोर दिया। संगठन के अनुसार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास इस तरह होना चाहिए कि उसका लाभ व्यापक स्तर पर आम जनता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिले तथा किसी एक संस्था या कॉरपोरेट हित का एकाधिकार न बने।
बयान में सरकार और नीति-निर्धारकों से विकेंद्रीकृत तथा जनोन्मुख आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की अपील की गई। संगठन ने कहा कि डिजिटल भुगतान और कर व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिनसे आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े।
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