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Tuesday, 27 October 2026

सोशल मीडिया ने बेटी तक पहुंचाई पिता की अस्थियां, राप्ती में दी अंतिम विदाई


अंतिम ममता अभियान से पिपरौली निवासी पूनम गौड़ को मिली पिता की जानकारी, राजघाट पर प्राप्त किया अस्थि कलश

रिपोर्ट : विनोद कुमार, सोनबरसा बाजार एवं जगदीशपुर, गोरखपुर

गोरखपुर। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर ने एक बेटी को उसके दिवंगत पिता की अंतिम निशानी तक पहुंचा दिया। मातृ आंचल सेवा संस्थान के ‘अंतिम ममता अभियान’ के माध्यम से पिपरौली निवासी रमेश की बेटी पूनम गौड़ को अपने पिता की मृत्यु और उनकी अंत्येष्टि की जानकारी मिली। 25 अक्टूबर को पूनम ने राजघाट पहुंचकर पिता का अस्थि कलश प्राप्त किया और राप्ती नदी में अस्थियों का विसर्जन कर उन्हें अंतिम विदाई दी।

जानकारी के अनुसार, रमेश का शव 28 अगस्त 2026 को मिला था। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही परिजनों द्वारा पहचान किए जाने के लिए 72 घंटे तक इंतजार किया गया। पहचान नहीं हो पाने पर मातृ आंचल सेवा संस्थान, गोरखनाथ की ओर से दो सितंबर को राजघाट पर सनातन परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कराया गया। इसके बाद उनकी अस्थियों को सुरक्षित रखा गया था।

इधर, रमेश के परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे। 25 अक्टूबर को बेटी पूनम गौड़ की नजर सोशल मीडिया पर ‘अंतिम ममता अभियान’ से संबंधित जानकारी पर पड़ी। वह अपने पिता की तस्वीर लेकर संस्थान पहुंचीं। उपलब्ध तस्वीर और अभिलेखों के मिलान के बाद रमेश की पहचान की पुष्टि हुई। पिता के निधन की जानकारी मिलने पर पूनम भावुक हो गईं। उन्हें इस बात का मलाल रहा कि वह पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर सकीं।

राजघाट पर बेटी को सौंपा गया अस्थि कलश

संस्थान की संस्थापिका एवं संचालिका पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ पूनम के साथ राजघाट पहुंचीं और उन्हें पिता का अस्थि कलश सौंपा। इसके बाद पूनम ने राप्ती नदी में विधि-विधान के साथ पिता की अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान नगर निगम के विनोद राय भी मौजूद रहे।

पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ के मुताबिक, ‘अंतिम ममता अभियान’ के माध्यम से अज्ञात मृतकों की तस्वीरें और उपलब्ध जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की जाती है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सूचना पहुंचे और संबंधित परिवार अपने बिछड़े परिजन की पहचान कर सके।

दो अन्य परिवारों तक भी पहुंच चुकी है जानकारी

संस्थान के अनुसार, पिछले महीने भी सोशल मीडिया के माध्यम से बड़हलगंज और आजमगढ़ के दो परिवारों को अपने दिवंगत परिजनों के बारे में जानकारी मिली थी। पहचान और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों परिवारों को उनके परिजनों के अस्थि कलश सौंपे गए थे।

बेसहारा महिलाओं के लिए चल रहा ‘अम्मा आश्रय निकेतन’

मातृ आंचल सेवा संस्थान नगर निगम के सहयोग से मोहरीपुर में ‘अम्मा आश्रय निकेतन’ का संचालन भी कर रहा है। संस्थान के मुताबिक यहां बेसहारा, वृद्ध, बीमार और दिव्यांग महिलाओं को भोजन, वस्त्र, आश्रय और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।

पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ ने लोगों से ‘अंतिम ममता अभियान’ से संबंधित पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने की अपील की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर किसी परिवार को उसके बिछड़े परिजन तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

संस्थान ने जरूरतमंदों की सेवा में सहयोग के इच्छुक लोगों के लिए मोबाइल नंबर 8707243476 भी जारी किया है।

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