5018 प्रभात संगीत के सृजनकर्ता श्रीश्री आनंदमूर्ति जी को किया गया याद, रक्तदाताओं व प्रतिभागियों का सम्मान
गोरखपुर। आनंद मार्ग प्रचारक संघ गोरखपुर के तत्वावधान में सोमवार, 14 सितंबर को बक्शीपुर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में प्रभात संगीत दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मार्ग गुरु श्रीश्री आनंदमूर्ति जी (श्री प्रभात रंजन सरकार) की छायाकृति पर दीप प्रज्वलित कर की गई।
इस अवसर पर पूर्व में संस्था के मार्ग गुरु श्रीश्री आनंदमूर्ति जी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वाले 22 रक्तदाताओं, आभा सेवा सदन टीम तथा प्रभात संगीत कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर महानगर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि श्री अखिलेन्दु श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन मेजर साकेत ने किया।
प्रभात संगीत दिवस के अवसर पर हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और उर्दू भाषाओं में प्रभात संगीत प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत प्रभात संगीत से कार्यक्रम स्थल आध्यात्मिक और संगीतमय वातावरण से सराबोर रहा।
आठ वर्षों में रचे गए 5,018 प्रभात संगीत
बताते चलें कि श्रीश्री आनंदमूर्ति जी द्वारा रचित प्रभात संगीत की शुरुआत 14 सितंबर 1982 को हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका पहला प्रभात संगीत “बंधु हे नीये चलो” 14 सितंबर 1982 को देवघर में रचा गया था। इसके बाद लगभग आठ वर्षों की अवधि में उन्होंने कुल 5,018 प्रभात संगीत की रचना की।
विशेष बात यह है कि इन रचनाओं में केवल गीतों के बोल ही नहीं, बल्कि उनकी धुन और संगीत भी स्वयं श्रीश्री आनंदमूर्ति जी द्वारा तैयार किए गए थे। उनका अंतिम प्रभात संगीत 20 अक्टूबर 1990 को रचा गया, जबकि 21 अक्टूबर 1990 को उनका भौतिक जीवन समाप्त हुआ। इस प्रकार अंतिम प्रभात संगीत उनके महाप्रयाण से लगभग एक दिन पूर्व रचा गया था।
लगभग आठ वर्षों में 5,018 गीतों का सृजन उनकी असाधारण सृजनशीलता और संगीत प्रतिभा का परिचायक है। प्रभात संगीत आध्यात्मिक भाव, मानवीय संवेदना और विविध भाषाओं की अभिव्यक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
कार्यक्रम में भक्ति प्रधान संजय श्रीवास्तव, आनंद अदिति, आचार्य आनंद वेदिताचार्य, नंदिनी, साधन, संध्या, संगीता, पूजा, रूमा चक्रवर्ती, परी, कल्पना, जी. पी. गुणाकर, तनुजा एवं पूर्व भक्ति प्रधान धनीराम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
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