रिपोर्ट विनोद कुमार सोनबरसा बाजार एवं जगदीशपुर गोरखपुर।
25 गांवों की छह हजार एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर उठे सवाल, समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव कुंवर प्रताप सिंह ने खोला मोर्चा।
दस वर्ष पुराने सर्किल रेट पर भूमि अधिग्रहण का विरोध, दस हजार से अधिक किसानों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका।पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर किसानों के हितों की रक्षा की उठाई मांग,दो नवंबर तक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
नया गोरखपुर शहर बसाने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण की ओर से 25 गांवों की लगभग छह हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह ने व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है। किसानों के इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शासन का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान करने और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। इधर, कुंवर प्रताप सिंह ने घोषणा की है कि यदि दो नवंबर तक किसानों की मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो तीन नवंबर से गोलघर स्थित टाउनहाल की गांधी प्रतिमा के समक्ष अहिंसात्मक आमरण अनशन शुरू करेंगे। शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कुंवर प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि नया गोरखपुर बसाने के लिए शहर के पूर्वी हिस्से के 13 और उत्तरी हिस्से के 12 गांवों की लगभग छह हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण के दायरे में लाई जा रही है। इससे दस हजार से अधिक किसानों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश ग्रामीण परिवारों की आर्थिक व्यवस्था खेती पर निर्भर है। ऐसे में जमीन से वंचित होने पर उनके सामने रोजगार, भरण-पोषण और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि का मूल्यांकन वर्ष 2016 के पुराने सर्किल रेट के आधार पर किया जा रहा है। पिछले दस वर्षों में जमीन की वास्तविक बाजार कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन सर्किल रेट का पुनर्निर्धारण नहीं होने से किसानों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर किसानों की पुश्तैनी जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर लेना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को वर्तमान बाजार मूल्य, बढ़ती महंगाई, भविष्य की आजीविका और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
कुंवर प्रताप सिंह ने भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार, 19 सितंबर 2024 को जिलाधिकारी स्तर से धारा चार के अंतर्गत अधिसूचना प्रकाशित की गई थी। इसके बाद चार जुलाई 2025 को प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से पुनः धारा चार के अंतर्गत प्रकाशन किया गया। उन्होंने पहले प्रकाशन की वैधानिक अधिकारिता पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिसूचनाओं और संपूर्ण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई है। सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जवाबदेही निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की सहमति और उनकी आपत्तियों का निस्तारण भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पक्ष है। उनका दावा है कि संबंधित ग्रामसभाओं में बड़ी संख्या में किसान अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने 80 प्रतिशत किसानों के विरोध की स्थिति में अधिग्रहण की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए संबंधित नियमों की समीक्षा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में प्रभावित किसानों की भागीदारी तथा उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।कुंवर प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि किसानों से अपेक्षाकृत कम कीमत पर जमीन लेकर भविष्य में उसी भूमि पर आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी और ऊंची कीमतों पर संपत्तियों की बिक्री होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विकास के बाद भूमि की कीमतों में वृद्धि होती है तो उसका न्यायोचित लाभ मूल भू-स्वामियों को क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन केवल आर्थिक संपत्ति नहीं,बल्कि उनके परिवारों की आजीविका,सामाजिक सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। इस प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से शासन को भेजा गया पत्र भी महत्वपूर्ण है। आठ अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में अखिलेश यादव ने कुंवर प्रताप सिंह द्वारा उठाए गए भूमि अधिग्रहण संबंधी मुद्दों का उल्लेख किया है। पत्र में कहा गया है कि नया गोरखपुर विकसित करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 25 ग्राम पंचायतों के किसानों की लगभग छह हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। प्रभावित किसान कम कीमत पर जमीन लिए जाने का विरोध कर रहे हैं और प्रस्तावित अधिग्रहण पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से पूरे प्रकरण का परीक्षण कराकर पीड़ित किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का अनुरोध किया है। कुंवर प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने भी शासन को पत्र भेजकर नया गोरखपुर बसाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने तथा गोरखपुर जनपद में वर्ष 2026 के अनुरूप नया सर्किल रेट लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि सात मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी गोरखपुर को बाजार मूल्य के अनुरूप नया सर्किल रेट जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके अनुसार इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल नए आवासीय क्षेत्र, चौड़ी सड़कें और आधुनिक सुविधाएं विकसित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। कुंवर प्रताप सिंह ने शासन-प्रशासन को दो नवंबर तक का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि नया गोरखपुर बसाने के प्रस्ताव पर किसानों के हित में निर्णय नहीं लिया गया, अधिग्रहण संबंधी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ और जनपद में नए सर्किल रेट के संबंध में ठोस पहल नहीं की गई तो वह तीन नवंबर से टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष आमरण अनशन प्रारंभ करेंगे। उन्होंने प्रभावित गांवों के किसानों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसानों की जमीन, आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का न्यायोचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। नया गोरखपुर परियोजना को लेकर अब भूमि अधिग्रहण की वैधानिकता, किसानों की सहमति,मुआवजे के निर्धारण और पुराने सर्किल रेट का मुद्दा प्रमुखता से सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पत्र और कुंवर प्रताप सिंह के आमरण अनशन के ऐलान किया है
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