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Sunday, 25 March 2018

बस्ती -सांसद का गोद लिया हुआ गांव उजड़े चमन से भी ज्यादा बदहाल

ग्राउंड रिपोर्ट
विश्वपति वर्मा के साथ धर्म प्रकाश एवं बब्लू यादव ;

सच्चाई छुप  नहीं सकती बनावट के वसूलों से 
खुशबू आ नहीं सकती कागज के फूलों से। 

गांव को गोद लेने का  खाका  अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तैयार किया गया था। देश भर में इस योजना को सुचारु ढंग से लागू  करने के लिए अक्टूबर २०१४ में आदर्श ग्राम पंचायत योजना की शुरुआत की गई जिसमे प्रत्येक सांसद  को अपने लोकसभा क्षेत्र में तीन ग्रांम पंचायतों को गोद लेकर वंहा समग्र एवं समेकित विकास की सारी  योजनाएं पंहुचानी थी लेकिन गांव के लोगों के लिए यह योजना महज सपना बन कर रह गया है।

 बस्ती के सांसद  हरीश द्विवेदी ने विक्रमजोत ब्लॉक के अमोढ़ा ग्राम पंचायत को गोद  लिया है  ,1050 परिवार वाले इस गांव में 6000 की आबादी निवास करती है ,गांव में हिन्दू -मुस्लिम के साथ कई जाति के लोग निवास करते हैं जिसमे से अधिकांश  लोगों में जागरूकता का अभाव है ,गांव में सफाई की व्यवस्था शून्य हैं ,शौचालय के नाम पर केवल गांव वासियों को ठगा गया ,आवास पाने के लिए मजदूर मजबूर हैं ,पानी निकासी की व्यवस्था ठप हो गई ,गांव की सड़कों पर खड़ंजा भी नहीं लग पाया है ,शिक्षा व्यवस्था पूर्ण रूप से ध्वस्त  है ,चिकित्सा की कोई प्राथमिक सुबिधायें उपलब्ध नहीं है ,जल संररक्षण के नाम पर तालाबों में खानपूर्ति की गई ,यात्री छाजन एवं अन्य व्यवस्थाओं  के नाम पर सरकारी धन का दुरपयोग जम  कर हुआ  है।

गांव में गंदगियों का अम्बार
सरकार देश में साफ सफाई के लिए जंहा लोगों को प्रेरित कर रही है वंही गोद  लिए हुए गांवों में भी सफाई की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ,इसके लिए देश की जनता को बकायदे टैक्स भी देना पड़ रहा है। गांव में टीम तहकीकात जब पंहुची तो वंहा पर गंदगियों का जो जखीरा दिखाई दिया उससे  ऐसा लग रहा है कि  ग्राम पंचायत को गोद  नहीं लिया गया बल्कि यह क्षेत्र का कूड़ागांव  है। गांव के रहने वाले बुद्धू ने बताया कि सांसद  ने जबसे गांव को गोद लिया तबसे यंहा  की स्थिति और खराब हो गई कहा की गांव में साफ सफाई के नाम पर जो भी दावे किये जा रहे हैं वह केवल कागजी है। हकीकत देखना है तो सांसद  गांव में आएं।

घरों में नहीं बने शौचालय ,जंहा बने वंहा नहीं लगे दरवाजे
सरकार  गांव को शौच से मुक्त करने की बात तो पूरे देश में कर रही है वंही  आदर्श ग्राम पंचायत में शौचालय की स्थिति पर काफी जोर दिया गया है जिसमे हर  घर में शौचालय के साथ सार्वजनिक शौचालय का निर्माण होना था लेकिन गांव के बहुसंख्यक घरों में अभी तक शौचालय की सुबिधा नहीं है। गांव की निवासिनी रीता देवी ने बताया की रेडियो पर रोज सुनते हैं कि  सरकार  घर -घर में शौचालय बनवा रही है लेकिन ,शौचालय के लिए अर्जी  लगाते लगाते  मै थक चुकी हूँ। वंही इसी पुरवे पर और घरों में बने शौचालयों में अभी तक छत और दरवाजे भी नहीं लग पाए हैं।

छत के लिए मोहताज गरीब परिवार
अशक्त एवं कमजोर लोगों को आवास दिलाने के नाम पर  सरकार  की कई योजनाएं चल रही हैं। लेकिन अभी ऐसे पात्र लोग भारी  संख्या में हैं जिनके सर पर छत नहीं है ,गांव की गरीब महिला शाहिदा का  परिवार एक टूटी फूटी झोपडी में जीवन यापन करने के लिए मजबूर है। शाहिदा के परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया की पिछले चार वर्षों  आवास के लिए जिम्मेदारों से अर्जी लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है।

जल की बर्बादी में गांव अव्वल 
गांव के लोगों को साफ एवं शुद्ध जल मिले इसके लिए गांव में 1 करोड़ 48 लाख की लागत से पानी टंकी का निर्माण करवाया गया है ,इस पानी टंकी से पाइप लाइन के जरिये घरों एवं स्कूलों में पानी पंहुचाने का उद्देश्य था परन्तु गांव के अधिकांश जगहों पर खुली टोटी लगाकर छोड़ दिया गया है जिसके वजह से गांव में सर्बाधिक पानी का नुकसान हो रहा है।

पानी निकासी के लिए बनाया गया  नाली खुद पानी में
गांव में पानी की जमाखोरी न हो  इसके लिए गांव में अच्छा खासा बजट बना कर नाली निर्माण करवाया गया है। लेकिन खराब गुणवक्ता एवं देखरेख की अभाव की वजह से गांव में पानी निकासी के उद्देश्य बनाया गया नाली जगह -जगह छतिग्रस्त हो गया है दूसरी तरफ  नाली में भयानक कूड़ा डंप है। गांव के निवासी विवेक सिंह ने बताया की नाली निर्माण के बाद भी गांव के पानी निकासी की व्यवस्था ठप हो गई है। जिसका नतीजा है कि गांव के बच्चे -बुजुर्ग संकर्मित बीमारियों के चपेट में रहते हैं।

आवागमन की बेहतर सुबिधायें उपलब्ध करवाने के लिए शासन द्वारा सड़कों एवं खड़ंजों का निर्माण करवाया जाता है ताकि मुसाफिरों के आवाजाही में समस्या  उत्पन्न न हो लेकिन आदर्श ग्राम पंचायत के 14 पुरवों पर जाने के लिए अभी तक सुगम सड़कों का निर्माण भी नहीं हो पाया है ,जिसकी वजह से मोटरसाइकिल पर  सवार दो लोगों में से एक को पैदल रास्ता  नापना पड़ता है।

शैक्षणिक व्यवस्था शून्य ,सांसद  को भी नहीं जानते बच्चे।
गांव के बच्चे शिक्षित एवं समझदार बने इसके लिए गांव में दो प्राथमिक एवं दो पूर्व माध्यमिक विद्यालय का निर्माण हुआ है। अमोढ़ा खास का  प्राथमिक विद्यालय  काफी दयनीय हालत में दिखाई  दी  कक्षा पांच के एक छात्र मोहन सोनकर  से बस्ती के सांसद  का नाम पूछा  गया तो उसे इसकी जानकारी नहीं थी ,उत्तर  प्रदेश और भारत  की राजधानी का नाम भी केवल दो बच्चे बता पाए। स्कूल में पेय जल के लिए लगा हैण्डपम्प वर्षों से बंद है वंही शौचालय में लगा ताला भी काफी दिन से नहीं खुला है। बगल में बने पूर्व माध्यमिक विद्यालय में जब टीम तहकीकात पंहुची तब वंहा परीक्षा चल रहा था। हालांकि  विद्यालय के बाल पेंटिंग में अभी तक बदले हुए बीएसए का नाम नहीं बदला है। इससे भी खराब व्यवस्था अन्य दो विद्यालयों की दिखाई दी जंहा  बच्चे धूल -मिट्टी में खेल रहे थे।

चिकित्सा की प्राथमिक व्यवस्था नहीं
इंसान को सभी मूलभूत सुबिधाओं के साथ चिकित्सा की सुबिधा आसान एवं त्वरित रूप से मिले यह बहुत ही अनिवार्य है। परन्तु जंहा पर आदर्श ग्राम पंचायत की बात आती है वंहा पर चिकित्सा की सेवा उपलब्ध न होना यह दर्शाता है कि  देश के जिम्मेदार लोग देश के मतदाता को अच्छी सुबिधाओं की व्यवस्था कराने के नाम पर केवल भर्मित करते हैं। गांव के निवासी पारस नाथ ने बताया की छत से गिरने की वजह से रीढ़ की हड्डी टूट गई है जिसके कारण वे दस साल से बेड पर ही पड़े हैं। उनका कहना है कि नजदीक में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता न होने के कारण हमें समस्याओं का सामना करना पड़ता है ,पारस नाथ ने बताया कि  सांसद  हरीश द्विवेदी हमारे घर तक आये थे और हमें पेंशन एवं व्हीलचेयर दिलवाने का अस्वाशन देकर गए। परन्तु आज तक इन सुबिधाओं के भी लाले पड़े हैं।

इसी प्रकार गांव के बाहर  सड़क के किनारे  तालाब  सुंदरीकरण के नाम पर दो बार पैंसा  निकाल  कर डकार लिया गया । अभी तक तालाब में जल संरक्षण के नाम पर केवल खर -पतवार एवं शौच का उपयोग दिखाई दिया।

यह सांसद के आदर्श ग्राम पंचायत की सच्चाई है जंहा पर अभी तक बुनियादी सुबिधाओं के लिए भी लोग मोहताज हैं ,गांव वासियों का कहना है कि  सांसद चौराहे पर आकर गांव के विकास की समीक्षा करते हैं लेकिन वे गांव में आना मुनासिब नहीं समझते  ,गांव के दर्जनों लोगों ने बताया की जब सांसद  ने गांव को गोद  लिया था तब लोगों को काफी उमीद थी की अब गांव में वह हर बेहतर सुबिधा उपलब्ध होगा जो अच्छे कस्बे या शहर के लोगों को मिलता है लेकिन यह तो महज सपना दिखाना था कि गांव को गोद  लेकर उसकी अच्छी परवरिस की जाएगी। गांव वासियों का मानना है कि  सांसद द्वारा इस तरहं से गांव की उपेक्षा सौतेले व्यवहार से कम  नहीं है। 

2 comments:

  1. सांसद जी को 2 दिन बैठने की जरूरत है सारी व्यवस्था सुधर जाएगी

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