सिर्फ बधाई और शुभकामनाएं के पिक्चर से महिला दिवस मनाना अर्थहीन - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

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Thursday, 8 March 2018

सिर्फ बधाई और शुभकामनाएं के पिक्चर से महिला दिवस मनाना अर्थहीन


अपनी सुरक्षा और हक की बात के साथ आप सभी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 
रीटा शर्मा
विचारक
आज महिला दिवस के अवसर पर गूगल भी डूडल के साथ सेलिब्रेट कर रहा है, पर क्या केवल 8 मार्च को ही सिर्फ महिला दिवस होता है?महिलाए तो हर रोज हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है.. सुबह सुबह बच्चों को स्कूल भेजते हुए, घर परिवार को भोजन देते हुए, परिवार की छोटी छोटी जरूरत का ख्याल रखते हुए और घर से बाहर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हुए l फिर भी ये आधी आबादी कहीं न कहीं बेचारगी से जूझ रही है l जब कोई निर्णय का वक्त आता है तो वो परिवार की तरफ ही देखती है और अगर स्वतंत्र निर्णय ले ले तो परिवार और समाज उसे कई उपाधि से नवाजने में जरा सा भी देरी नहीं करता है। 

अगर किसी लड़की को देर रात कही जाना होता है तो उसे परिवार के लोग बहुत  नसीहतों के साथ भेजते हैं।  या भेजने से मना कर देते हैं।  जबकि अगर कोई लड़का कंही भी बाहर जाये  तो बेफिक्र रहते हैं क्यूँ? ये सड़के असुरक्षित हमी बना रहे हैं जैसे बेटी को नसीहत दिया वैसे ही बेटे को भी दे कि वह सही से जाएँ  और राह चलते किसी को परेशान न करे और अगर  कोई मुसीबत में दिखे तो उसकी मदद भी करें l ऐसे संकल्प के साथ अगर महिला दिवस की बात हो तो उसके मायने होंगे l सिर्फ बधाई और शुभकामनाएं के पिक्चर से महिला दिवस मनाना अर्थहीन है l आज के दिन बैठ कर सभी को इस विषय पर चर्चा अयोजित करनी चाहिए कि कैसे हम महिला को सुरक्षित कर सकते हैं? कैसे उन्हें प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकते हैं l

महिलाए अपने निर्णय और प्राथमिकता खुद तय करें तो बे‍हतर होगा क्योंकि एक महिला की जरूरत पुरुष नहीं समझ सकता है l अभी पिछले दिनों एक मैगजीन में छपी स्तन पान कराती हुई अभिनेत्री सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय रही जबकि ये अर्थहीन विषय था वंही  दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया जब वें प्रधानमंत्री से मिलने जा रही थी रेप_रोको मुहिम के अन्तर्गत 5,55,000 समर्थन पत्रों को लेकर लेकिन ये कही भी जिक्र का विषय न था जबकि ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा स्त्री सुरक्षा से संबंधित है  l एक महिला अपने बच्चे को स्तन पान कैसे कराती है ये नितांत निजी विषय है l एक मैगजीन का कवर पेज तो सिर्फ इस संवेदनशील विषय को भुनाने के लिए ही किया गया l

भला कोई किसी को उसके निजी तौर तरीके कैसे सिखा  सकता है और इस तरह का कवर पेज भी स्त्री का बाजारवाद ही है जिसे हम   महिलावाद कह कर समर्थन करने लगते हैं जिसका फायदा बाजार को होता है ये ठीक चेहरे को फ़ेयर करने के लिए एक क्रीम के प्रचार की तरह ही है हम सब ऐसी क्रीम खरीदते और लगाते भी हैं ये जानते हुए भी कि इसका असर पल दो पल होगा और नुकसान उससे ज्यादा हैl

एक महिला होने के नाते हम सभी को खुद से वादें के साथ फर्ज अदा करना होगा कि हम अपने स्तर से गलत का विरोध करेंगे, गलत का साथ नहीं देंगे और कोई महिला मुसीबत में दिखे तो उसकी मदद करेंगे और यही संकल्प पुरुषों को भी करना चाहिए अपनी बेटी को एक सुरक्षित समाज देने के लिए क्योंकि  गलत हो या सही सब हमारे ही स्तर से होता है और हम ही इसे सुधार सकते हैं और अगर हम सब खुद को सुधारे तो समाज में किसी सुधारवादी की शायद जरूरत ही नहीं होगी l

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