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Saturday, 28 April 2018

लखनऊ-अखिलेश यादव नही हटें तो योगी सरकार ने गुस्से में हटवाया




विश्वपति वर्मा

पूर्ववर्ती सरकार द्वारा खरीदकर रखे गए पैंतालीस हजार से ज़्यादा लैपटॉप को बांटने के बजाय सिर्फ इसलिए हटाया जा  रहा है क्योंकि उनमे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर नही हट रही है।


 यूपी में नेताओं के बीच छिड़ी सियासी महाभारत का खामियाजा पैंतालीस हजार होनहार स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है. योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही दसवीं व बारहवीं के होनहार स्टूडेंट्स को लैपटॉप दिए जाने की अखिलेश राज में शुरू हुई सरकारी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. और अब सवा साल पहले ही खरीदकर रखे गए पैंतालीस हजार से ज़्यादा लैपटॉप को बांटने के बजाय सिर्फ इसलिए वापस किया जा रहा है क्योंकि उनमे पूर्व सीएम अखिलेश यादव की तस्वीर लगी हुई है.

योगी सरकार ने पहले यह कोशिश की थी कि सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रहे इन लैपटॉप्स में से अखिलेश यादव की तस्वीर को हटाकर उन्हें स्टूडेंट्स को बांट दिया जाए लेकिन यह कवायद फेल होने के बाद सरकार ने अब इन लैपटॉप्स को कंपनी में वापस करने का फरमान जारी कर दिया है।

इलाहाबाद समेत तमाम जिलों से हजारों लैपटॉप वापस भी भेजे जा चुके हैं. योगी सरकार के इस फैसले से पिछले साल चुनाव आचार संहिता लगने की वजह से लिस्ट में नाम होने के बावजूद लैपटॉप का इंतजार करने वाले छात्रों को अब मायूसी ही हाथ लगेगी. हालांकि अहम सवाल यह है कि नेताओं की अहम की लड़ाई में होनहार स्टूडेंट्स को मोहरा क्यों बनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि यूपी की पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने दसवीं और बारहवीं क्लास के होनहार स्टूडेंट्स को मुफ्त में लैपटॉप दिए जाने का एलान किया था. यह सरकारी लैपटॉप यूपी बोर्ड के साथ ही सूबे में रहकर पढ़ाई करने वाले चार दूसरे बोर्डों के स्टूडेंट्स को भी मिलने थे।

साल 2016 में अच्छे नंबरों से पास होने वाले होनहार स्टूडेंट्स को दिए जाने वाले सरकारी लैपटॉप नवम्बर 2016 से जिलों में भेजे जाने शुरू हुए थे. जिलों में किश्तों में आए ये लैपटॉप पूरी तरह बंट नहीं पाए, तभी विधानसभा चुनाव का एलान होने की वजह से सूबे में आचार संहिता लग गई. आचार संहिता लगने से लैपटॉप वितरण का काम रोक दिया गया था।


इनमें से 8958 लैपटॉप अलग-अलग जिलों में डीएम या शिक्षा विभाग के अफसरों के पास रखे हुए थे. इसके अलावा अठारह हजार लैपटॉप सप्लाई करने वाली एचपी कंपनी के वेयर हाउस में थे. यह वो लैपटॉप थे, जिन्हे जिलों तक पहुंचाया नहीं जा सका था।

सीएम के विशेषाधिकार कोटे के तहत बंटने वाले अठारह हजार लैपटॉप भी अलग जगहों पर रखे गए थे. तीनों कैटेगरी के यह पैंतालीस हजार लैपटॉप जिन होनहार छात्रों को दिए जाने थे, उनके नाम की सूची जारी की जा चुकी थी. इनके तमाम साथियों को लैपटॉप दिए भी जा चुके थे. बहरहाल आचार संहिता ख़त्म होने पर यूपी में सरकार बदल गई तो लैपटॉप वितरण का काम रोक दिया गया।

अफसरों ने सरकार से बार बार निर्देश मांगे, पर हर बार रोकने का मौखिक आदेश देकर इस पर राजनीति की गई. कुछ दिनों पहले यूपी में माध्यमिक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर डा० अवध नरेश शर्मा द्वारा जारी आदेश में तीनों कैटेगरी के बचे हुए पैंतालीस हजार लैपटॉप एचपी कंपनी को वापस लौटाए जाने का फरमान जारी किया गया. इस आदेश में यह साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि बंटने के इंतजार में रखे लैपटॉप में पूर्व सीएम की तस्वीर व डिटेल्स दर्ज हैं.


इलाहाबाद में साल 2016 में दसवीं व बारहवीं के इम्तहान अच्छे नंबरों से पास करने वाले 4962 होनहार स्टूडेंट्स को लैपटॉप बंटने थे. सप्लाई करने वाली कंपनी एचपी ने इनमे से 3217 लैपटॉप जिले तक पहुंचा भी दिए थे. इनमे से 2113 लैपटॉप बांट दिए गए थे, जबकि बाकी बचे 1104 लैपटॉप चुनाव की आचार संहिता लगने की वजह से नहीं बंट सके थे.


इलाहाबाद के डीआईओएस आर एन विश्वकर्मा के मुताबिक़ यहां बचे हुए 1104 लैपटॉप को ग्यारह अप्रैल को वापस एचपी कंपनी को भेजा जा चुका है. सरकार के आदेश के मुताबिक़ इन बचे हुए लैपटॉप्स के भुगतान के लिए जारी सरकारी रकम भी वापस कर दी गई है.

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