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Friday, 10 August 2018

लखनऊ -सपा ,बसपा ,भाजपा एवं कांग्रेस की सच्चाई जो आप नहीं जानते




ग्राउंड रिपोर्ट -
विश्वपति वर्मा _

केंद्र सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज सांसदों के गोद लिए गांवों में 4 वर्ष  बीत जाने के बाद भी बुनियादी स्तर पर बदलाव की शुरुआत नहीं हुई सांसद आदर्श ग्राम पंचायत की जननी भारतीय जनता पार्टी के साथ कांग्रेस, बसपा  एवं समाजवादी पार्टी जैसे प्रमुख दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी उत्तर प्रदेश के गावों को गोद लिया है,लेकिन इन गांवों के निवासी अपने को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं.

जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का आलम यह है कि सूबे के सांसदों द्वारा गोद लिए गए एक भी गांव की सूरत अभी तक नहीं बदली है।  माननीयों द्वारा गांव को गोद लेने के बाद ग्रामवासियों  के सपने को जो पंख लगा था अब वह टूट चुकी है। 

प्रदेश की राजधानी  लखनऊ के सांसद एवं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी लखनऊ से 27 किलोमीटर दूर गैर संसदीय क्षेत्र के सरोजनी नगर विकास खंड के अंतर्गत आने वाली पंचायत बेंती को गोद लिया था। लेकिन लगभग चार साल बीतने के बाद अभी तक गांव में बुनियादी सुबिधाओं की पंहुच भी  सुनिश्चित  नहीं हो पाई है। गांव की निवासिनी नूतन बाजपेयी ने तहकीकात न्यूज़ को बताया कि  प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई यह योजना भद्दा मजाक से कम नहीं है ,उन्होंने बताया कि राजनाथ सिंह का गोद लिया हुआ गांव होने की वजह से गांव वालों के घर जल्दी -जल्दी शौचालय निर्माण एवं पानी निकासी के लिए नाली का निर्माण किया गया लेकिन आलम यह है कि अधिकांश शौचालय एवं नाली टूट  कर जर्जर हो चुकी है।  

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में बसे तमौली गांव को गोद लिया है, भारी  बहुमत से जीत हासिल करने के बाद आज तक तमौली  वासियों को अपने सांसद से केवल उपेक्षा ही मिली है ,बता दें कि मुलायम सिंह यादव ने जिस गांव को गोद लिया है उसमे पहले की अपेक्षा कुछ खास बदलाव नहीं आई है ,अभी भी गांव विकास के रास्ते को निहार रहा है। 

टीम तहकीकात  ने जब  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आदर्श ग्राम पंचायत में पंहुची तो यंहा की स्थिति भी बदहाल मिली। सोनिया  ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राणा बेनी माधव बख्श सिंह के पैतृक गांव उड़वा को चुना है जगतपुर ब्लॉक के उड़वा गांव में टीम पंहुची तो पता चला कि गांव की 80  फीसदी आबादी अभी तक खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं गांव के निवासी राधेश्याम मौर्य एवं अखिलेश ने बताया कि गांव को गोद लेने के बाद सोनिया गाँधी अपने गांव को एक बार देखने तक नहीं आई हैं। 

गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2014 को लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी. इस योजना में गांवों को विकसित करने का कार्य अतिरिक्त धन के बजाय सांसद निधि से ही करने का प्रावधान किया गया है. यह योजना अब महज मजाक लगने लगी है.

योजना शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया. इसके बाद  बसपा प्रमुख मायावती ने भी लखनऊ के माल गांव को गोद लिया है. जबकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी के जगदीशपुर ब्लॉक के डीह गांव को गोद लिया है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश के शीर्ष नेताओं ने जब एक गांव को नहीं बदल पाया है तो वह पूरे देश की नेतृत्व की बात क्यों करते हैं ?आखिर वह कौन होगा जो नेताओं से सवाल करेगा ?आखिर कौन इस विसंगति का जिम्मेदार होगा और कौन जवाबदेही तय करेगा। 


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