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Monday, 6 August 2018

पिछड़ा वर्ग आयोग को मिला संबैधानिक दर्जा, दोनो सदनों से मिली मंजूरी।



विश्वपति वर्मा

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को सोमवार को संसद की मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में इससे संबंधित संविधान (123वां संशोधन) विधेयक पारित कर दिया। लोकसभा से इसे पहले ही पारित कराया जा चुका है। सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इससे पिछड़े वर्ग का सशक्तिकरण होगा और आयोग की शक्तियां भी बढ़ेंगी।

ये आयोग सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए है। इस आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे। इसमें कम से कम एक महिला होगी। आयोग एक स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करेगा।

ये आयोग पिछड़े वर्गों से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगा। अब पिछड़ी जातियों की समस्याओं का निपटारा हो सकेगा। इस आयोग का गठन 1993 में किया गया था।ओबीसी तबके में जातियों को जोड़ने या हटाने के लिए राज्यपाल से परामर्श लेने का प्रस्ताव हट गया है अब राज्य सरकारों से ही परामर्श लेने का प्रावधान होगा।


ओबीसी के उत्थान को लेकर बनने वाली योजनाओं में आयोग की भूमिका में भी बदलाव किया गया है।अब आयोग सलाहकार नहीं बल्कि भागीदार की भूमिका में होगा। आयोग पिछड़े वर्गो के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भाग लेगा और सलाह देगा।

थावरचंद गहलोत ने कहा कि राज्य अपने लिए ओबीसी जातियों का निर्णय करने के बारे में स्वतंत्र हैं। यदि राज्य किसी जाति को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करना चाहते हैं तो वे सीधे केंद्र या आयोग को भेज सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से समुदाय के लोगों की विभिन्न जरूरतें पूरी होंगी और कई ऐसी समस्याओं का भी समाधान हो पाएगा जिनका हल अभी तक नहीं हो सका है।

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