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Friday, 28 September 2018

बस्ती-खत्म होने के कगार पर काला शीशम,काला शीशम की गुणवत्ता जाने


जिला संवाददाता- बस्ती 

 काला शीशम पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक थाती है। मजबूती व गुणवत्ता के चलते इस प्रजाति के शीशम की लकड़ी वजन के हिसाब से बिकती है। कभी-कभी मांग अधिक होने के चलते इसकी बोली लगती है।

वन विभाग इसके संरक्षण का दावा करता है, लेकिन जनपद से काला शीशम समाप्त होने के कगार पर है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह शीशम बस्ती व राम नगर रेंज के अलावा बस्ती डुमरियागंज मार्ग व बस्ती बांसी मार्ग के दोनो किनारे अधिक मात्रा में पाए जाते थे।सड़को के चौड़ीकरण में ज्यातर पेड़ काट दिए गये।इस प्रजाती के पेड़ अधेड़ी के जंगलो में भी मौजूदगी रही।यह पौधा स्वत: उगता है, इसके पौधे नहीं लगाए जाते। बर्ष 2010 में काले शीशम की कटान बड़े पैमाने पर हुआ था।जिसके कारण इस प्रजाति का शीशम बिलुप्त होने के कगार पर पहुच गया था। जो बचा, उसे बाद में चोरों ने काट लिया।इसके लिए तस्करों का अन्तर्राज्यीय गिरोह कार्य कर रहा था। अब सिर्फ कुछ पौधे ही हैं।जो सूखने व खोखला होकर खत्म होने के कगार पर है।वैसे तो इसकी लकड़ी सीधे मुरादाबाद व सहारनपुर की मंडियों में पहुंचती है। आपूर्ति कम होने पर इसकी बोली लगती है।बिभागीय लापरवाही व वन माफियावो के कारण बस्ती जनपद से यह थाती खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है।

काला शीशम की गुणवत्ता

इसकी लकड़ी प्राकृतिक रूप से कलेजी रंग की और बहुत मजबूत होती है। छह-सात फीट की मोटाई के बाद यह पूरी तरह पककर सूख जाता है। कटने के बाद इसमें कच्चापन नहीं रहता। इसकी प्राकृतिक चमक भी लोगों को आकर्षित करती है। इसकी लकड़ी मूलरूप से राइफल के बट बनाने के काम आती है। लोग फर्नीचर व दरवाजे भी बनवाते हैं।मजबूती बेमिसाल होने के कारण लकड़ी कारोबार में ग्राहको की पहली पंसद होती है।

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