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Friday, 21 September 2018

कानपुर-मोहर्रम पर मातम मनाकर निकाला करबला तक जुलूस

जिला संवाददाता -रवि तहकीकात न्यूज़
 
कानपुर। पूरे देश मे मुहर्रम का पर्व पर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए हज़ारो की संख्या में मुस्लिमो ने अपने आप को खून से लथपथ कर ताजिया निकाला और करबला जाकर मातम मनाया मुस्लिम धर्म मे मुहर्रम का एक अलग ही महत्व है इस पर्व पर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने को घायल करते हुए इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और छोटे बच्चों ,बुजुर्गो और नौजवानों द्वारा अपने आपको जंजीर और तलवार से मारकर घायल और लहूलुहान किया जाता है।
 

खुद को लहूलुहान कर किया इमाम साहब को याद

मोहर्रम के पर्व पर मुस्लिम समाज के युवा बच्चे व बुजुर्ग अपने आप को लहूलुहान करते है और करबला में जाकर मातम मनाते हैं
 
 
साथ ही मुस्लिम समाज का मानना है कि जितने जख्म  इमाम साहब के शरीर को दिए गए थे  मुस्लिम समाज उन जख्मो को याद कर उनकी तकलीफो का एहसास करता है और खुद को लहूलुहान करता है पूरे शहर से निकलने वाले मातमी जुलूस कर्बला में जाकर रुकते है और इमाम साहब को याद करते हैं। मुस्लिम समाज के लोगों ने बताया कि मुहर्रम की नौ तारीख को हज़रत इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया था हज़रत इमाम हुसैन अमन और शान्ति का सन्देश देते हुए अपने खानदान के 72 लोगों को साथ शहीद हो गए थे । मुसलनानो के सभी फिरके इस शहादत को अपने अपने तरीके से याद करते है ।इस मौके पर कानपुर में मोहर्रम बड़ी अकीदत (आस्था ) के साथ मनाया जाता है । मुसलमान कहीं कुरआन पढ़ते है तो कहीं मातम करते हैं । लेकिन कानपूर के मुहर्रम की सबसे बड़ी पहचान मातम के जुलूस की होती है कानपुर का मातम के जुलूस जिसकी लम्बाई कई किलोमीटर की होती है ।

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