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Monday, 24 September 2018

एन.एच.आर.एम. घोटाले वालो के समक्ष घूटने टेकने वाले स्वास्थ्य सेवाओं पर घडियाली आंसू बहा रहे है - मनीष शुक्ला


लखनऊ -महेंद्र मिश्रा 

 भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की साईकिल यात्रा और जन्तर-मन्तर पर हुए कार्यक्रम पर निशाना साधते हुए उसे फेल बताया। मनीष शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोंगो का विश्वास सपा और अखिलेश यादव से उठ चुका है फलतः जनता न तो साइकिल यात्रा में शामिल हुई न जन्तर-मन्तर गई। 
 शुक्ला ने कहा कि जन्तर-मन्तर पर तो स्वयं मुलायम सिंह अराजकता से दुखी नजर आये और बूढों को सम्मान करने व लडकियों से धक्का-मुक्की न करने की नसीहत दी। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अपने भी कार्यक्रम में अराजकता से बाज नहीं आ रहे है। प्रदेश की जनता उनके आचरण को गौर से देख रही है। 


 शुक्ला ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि स्वास्थ सेवायें तो बुआ-बबुआ के समय ध्वस्त थी अब तो नरेन्द्र मोदी की सरकार ने गरीबों, बेसहारा, आवासहीन, बालिकाओं, भूमिहीन, दिव्यांग, श्रमिक, दुर्बल आय वर्ग अनुसूचि जाति-जनजाति वर्ग के लोंगो के लिए 1350 तरह के मेडिकल पैकेज, सर्जरी, दवाईयों और जांच वाली आयुष्मान भारत के अन्तर्गत जन आरोग्य योजना की शुरूआत की है। जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के 1.18 करोड़ परिवारों को लगभग 6 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे ।

 आज गरीब भी मंहगें ईलाज 13000 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में करवा सकता है। उन्होंने पूछा कि अखिलेश  बताये कि आपके कार्यकाल में आपने एम्बूलेनन्स सेवा 108 का संचालन क्यों नहीं होने दिया था? एन.एच.आर.एम. के 11 करोड़ रूपये क्यों चले गए थे, सरकारी अस्पतालों में बिना सिफारिस कोई सुविधा क्यों नहीं मिलती थी? दवाईयों की खरीद में बिचैलियों की क्यों शामिल किया जाता था? शुक्ला ने पूछा अखिलेश जबाब दे कि आपकी बुआ के कार्यकाल के दौरान हुए एन.एच.आर.एम. घोटाले पर उनका क्या विचार है? एन.एच.आर.एम. के अन्तर्गत गरीबों केे इलाज कराने के लिए प्रस्तावित धन की लूट पर उनको अपना विचार अवश्य बताना चाहिए।  

 शुक्ल ने अखिलेश यादव को छदम् लोहियावादी बताते हुए कहा कि लोहिया जहां एक और राजनीति में सुचिता, सादगी, ईमानदारी के समर्थक थे वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते बंगले और परिवार के विकास में ही लगे रहे है। उन्होंने कहा कि अखिलेश  के मुंह से अम्बेडकर जी और उनके विचार को अपनाने की बात हस्यास्पद है। उन्हें याद रखना चाहिए कि गेस्ट हाउस काण्ड के बाद पूरे प्रदेश में सपाईयों ने बाबा साहब की मूर्तियों को खण्डित किया था। आज भी सबसे ज्यादा अनुसूचित वर्ग के उत्पीड़न की एफआईआर सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ही कायम है। 2012-17 का अखिलेश कार्यकाल अनुसूचित वर्ग से भेदभाव/उत्पीड़न से भरा हुआ है। 

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