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Wednesday, 5 September 2018

शिक्षक दिवस की बधाई ,समस्या के समाधान हेतु कोई घेाषणा नहीं


लखनऊ -ब्यूरो 
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षक दिवस के दिन माध्यमिक वित्तविहीन  एवं टी.ई.टी. के ऊपर लाठियां बरसाये जाने की उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी ने कड़ी निन्दा की है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज शिक्षक दिवस के दिन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री तक ने शिक्षकों को बधाई संदेश भेजा है परन्तुकिसी ने भी उनकी समस्या के समाधान हेतु कोई घेाषणा  नहीं की, उल्टे उन पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही की गयी। 

कांग्रेस ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जिससे शिक्षा का स्तर प्रदेश में निरन्तर गिरता गया। सरकार बेसिक शिक्षा के प्रति इतनी उदासीन है कि प्रदेश में तीन लाख पद शिक्षकों के खाली हैं और अभी तक भर्ती की कोई प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं की गयी है। अनेक प्रयासों के बाद 68हजार पांच सौ शिक्षकों के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया में लगभग 41हजार शिक्षकों की भर्ती की जा सकी है। 

प्रदेश के सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में लगभग एक करोड़ 16 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शिक्षा का स्तर अच्छा न होने के कारण लगभग 1 करोड़ 85 लाख बच्चे प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिनकी फीस बहुत अधिक है। यह प्राइवेट स्कूल सरकार के लाख कहने के बावजूद भी अपनी फीस कम करने के लिए तैयार नहीं हैं दूसरी तरफ प्रदेश सरकार अपने विद्यालयों में बच्चों पर मात्र 13सौ रूपये प्रतिमाह खर्च कर रही है ऐसे में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता कैसे प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले में बराबरी पा सकती है। 
जहां तक माध्यमिक विद्यालयों की बात है इस वर्ष दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में लगभग छः लाख बच्चों ने परीक्षा ही छोड़ दी जिसको मुख्यमंत्री जी ने यह कहकर अपनी पीठ थपथपाई कि नकल में सख्ती के कारण बच्चों ने परीक्षाएं छोड़ी हैं जबकि वास्तविकता यह है कि वर्ष 2017 में तीन लाख उन्तालीस हजार, वर्ष 2016 में साढ़े सात लाख और वर्ष 2015 में पांच लाख पैंतीस हजार बच्चों ने परीक्षा का बहिष्कार किया है। ऐसी स्थिति में सरकार यह विचार नहीं कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चे परीक्षा का बहिष्कार क्यों कर रहे हैं बल्कि इसे अपनी सफलता मानकर अपना उपहास करा रही है।

सरकार इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है कि एक ही कक्षा में विभिन्न प्रकार के शिक्षकों द्वारा शिक्षण का जो कार्य सम्पादित किया जा रहा है उसका प्रभाव छात्रों में बुरी तरह पड़ रहा है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा मित्र, जूनियर हाईस्कूल में अनुदेशक और डिग्री कालेजों में स्ववित्त पेाषित शिक्षकों को रेगुलर शिक्षकों के साथ जो शिक्षा प्रणाली अपनाई जा रही है वह बहुत ही दोषपूर्ण है। सरकार को जल्द से जल्द इसका समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।

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