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Thursday, 20 September 2018

गणपति के प्रति ऐसी आस्था घर को ही बना डाला संग्रहालय-पढ़िए

कानपुर जिला संवाददाता -रवि तहकीकात न्यूज़
 
विघ्न विनाशक भगवान गणेश के रूपों को देखकर जहां भक्त मनमोहित होते हैं वहीं उनके विध्वंसक स्वरूप को देखकर पापी जनों का दिल दहल उठता है विघ्नहर्ता के रूप में अपने भक्तों के दिलो में राज करने वाले भगवान गनेश पूरे विश्व में अपने कई रूपों में विद्यमान है और उन्हीं विभिन्न रूपों के माध्यम से अपने भक्तों के पालनहार बने हुए हैं भगवान गजानन वैसे तो मूषक की सवारी करते है लेकिन अब आधुनिक युग में भगवान गणेश ने भी मोटरबाइक,कार व एरोप्लेन में सफर करना शुरु कर दिया है भक्तों का ऐसा मानना है कि कलयुग में भगवान ने अपनी सवारी का स्वरूप बदल दिया है तभी उनकी प्रतिमा के साथ आधुनिकतम वाहनों से सजोया गया है। सभी दुखो को हरने वाले विघ्नहर्ता के कई स्वरूपों की झांकियों को एक छत के नीचे मिले तो उन्हें देख कर श्रद्धा से सबका मन प्रफुल्लित हो जाता है।
 
 
 
विघ्नहर्ता के इन स्वरूपों की अदभुत मूर्तियों को बनाने वालों की रचनात्मक योग्यता का आभास भी होता है घर मे गणेश जी की मूर्तियां और पूजा तो सभी करते है लेकिन क्या कोई व्यक्ति ऐसा भी कर सकता है कि बचपन से ही अटूट श्रद्धा और अलग अलग तरह की गजानन की मूर्तियां खरिदने का शौक इतना ज्यादा हो कि उसने अपने घर पर ही अलग अलग तरह की गणपती की मूर्तियों का संग्रहालय बना दिया हो। ऐसी गजानन भगवान की अदभुत मूर्तियों को देखना है तो मिलिए इनसे।

हर माह लाते एक नई आकृति की प्रतिमा-बप्पा है विघ्नहर्ता

शहर के श्याम नगर निवासी 35 वर्षीय विकास श्रीवास्तव जो पेशे से अध्यापक है और अपनी कोचिंग चलाते हैं उन्होंने बचपन से ही अपने पिता से प्रेरित होकर गणपति के विविध स्वरूपों का संग्रह करना शुरू किया था। आज उनके पास लगभग 700 गणेश भगवान की अलग अलग तरह की अद्भुत मूर्तियों का विशाल संग्रह है इसके पीछे विकास केवल गणपति के प्रति अपनी श्रद्धा अपने परिवार के दिये हुए संस्कार को ही श्रेय देते हैं। 6 वर्ष की उम्र से ही उन्हें गणपति की प्रति श्रद्धा और मूर्तियां खरीदने का शौक हो गया। और यह उनका शौक बढ़ता ही गया
 
 
विकास का मानना है कि उनका यह संग्रह किसी रिकार्ड को स्थापित करने के लिए नहीं बल्कि इसके पीछे उनकी अटूट श्रद्धा ही है। उन्होंने एक ज़िन्दगी में हुई एक हादसे के बारे में बताया कि बचपन मे वह एक बार भगवान गजानन की मूर्ति लेने के लिए बाहर जा रहे थे तभी रास्ते में उनके साथ एक सड़क दुर्घटना घटित हुई जिसमें वह बाल बाल बच गए थे उसे वह भगवान विघ्हर्ता की देन मानते है कि उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर आये हुए हर एक विघ्न को गणपति ने हर लिया इस घटना से गणपति के प्रति उनकी श्रद्धा और भी बढ़ गई विकास ने इन मूर्तियों का संग्रह देश के विभिन्न स्थानों से किया है और सबसे बड़ी बात यह है कि उनके संग्रह में गणेश की कोई भी मूर्ती एक दूसरे से मिलती नहीं है। घर मे लगे हुए गणेश जी के संग्रह में छोटी बड़ी अद्भुत मूर्तियां आकर्षण का केंद्र है कहीं रिद्धि सिद्धि के साथ भगवान विराजमान है तो कहीं उनका बालरूप तो कहीं नारियल के रूप में भगवान की मूर्ति बहुत ही अद्भुत लगती है। छोटी बड़ी,मूर्तिया कोलकाता से लाई हुई मूर्ति समेत कई जगहों से गणेश जी की मूर्तियां उनके घर पर एक संग्रह में मौजूद हैं

 
 
हर माह खरीदते है एक मूर्ति

इतने बड़े संग्रह में प्रत्येक मूर्ती का एक दूसरे से भिन्न होना भी एक आश्चर्य है, शायद बुद्धिदाता ने विकास को ऐसी स्मृति प्रदान की है कि जब वो कोई मूर्ती का संग्रह करते हैं तो उन्हें इस बात का ज्ञान रहता है कि जो मूर्ती वो ले रहे हैं वो उनके विशाल संग्रह से भिन्न है. विकास का यह संग्रह साल -दर - साल बढ़ता ही जा रहा है, क्योंकि विकास प्रत्येक माह के पहले सप्ताह में एक मूर्ति खरीदते है और यदि उस सप्ताह में मूर्ति नही खरीद पाते तो महीने के अंत उसे पेनाल्टी समझकर दो मूर्तिया खरीदते हैं। विकास ने बताया कि गनेश जी की मूर्तियों को लाने में उनके रिश्तेदार और बाहरी जगहों पर जो उनके दोस्त है जिन्हें यह पता है कि विकास को गनेश जी की मूर्तियों का शौक है तो वह उनके लिए अलग अलग तरह की मूर्तियां ले आते है और उन्हें विकास को दे देते हैं। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनको अभी भी विघ्नहर्ता की ऐसी मूर्ती मिल भी जाती है जो उनको विशाल संग्रह में रखी मूर्तियों से अलग हो। विकास की यह लगन और विशवास को देख कर शायद गणेश जी विभिन्न स्वरूपों में उनके पास आ ही जाते हैं। विकास गनेश महोत्सव के अवसर पर हर वर्ष भगवान गजानन की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना कर उनका विसर्जन करते हैं।

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