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Sunday, 14 October 2018

लखनऊ -इतिहास के साथ खिलवाड़ है जिसे देश व प्रदेश की जनता स्वीकार नहीं करेगी

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ब्यूरो उत्तर प्रदेश -महेन्द्र मिश्रा
 
 मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद के नाम को प्रयागराज शीघ्र ही घोषित किये जाने की घोषणा की है और उन्होने यह भी कहा है कि राज्यपाल महोदय  ने सहमति प्रदान कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सबसे पहले प्रयागराज के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री  को यह जानकारी होनी चाहिए कि प्रयागराज पहले से ही है।
 
 प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि ऐसा कहा जाता है जब सृष्टि की रचना हुई तो सर्वप्रथम ब्रहमा जी ने प्रथम यज्ञ किया था इसलिए प्र और यज्ञ को लेकर प्रयाग नाम बना। प्रयागराज के नाम से रेलवे स्टेशन है कुम्भ का आयोजन प्रयागराज के क्षेत्र के अन्तर्गत ही होता है यह क्षेत्र लगभग 20 से 22 किमी के अन्तर्गत है। वर्ष 1526 में जब मुगल आये तो अकबर ने इलाहाबाद में एक बहुत बड़ा किला गंगा जी के किनारे बनाया और उस स्थान का नाम अल्लाहाबाद रखा। बाद में अंग्रेजों ने इसे इलाहाबाद के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। इलाहाबाद की स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ी भूमिका है। 1857 की गदर में लियाकत अली खां ने यहां का नेतृत्व किया था। गांधी युग में इलाहाबाद लोगों का प्रेरणा केन्द्र था 1888, 1892, 1910 में यहां कांग्रेस का महाधिवेशन हुआ था जिसमें देश की आजादी के लिए अनेकों योजनाएं बनी थीं 1919 में जब रोलेट एक्ट को अंग्रेजी सरकार द्वारा वापस न लेने पर जून 1920 में यहां सर्वदलीय सम्मेलन हुआ था जिसमें यह तय किया गया था कि स्कूल, कालेजों और अदालत का बहिस्कार किया जायेगा। अर्थात प्रथम असहयोग आन्दोलन और खिलाफत आन्दोलन की नींव इस धरती से पड़ी।
 
 अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद ने अल्फे्रड पार्क में अंग्रेजों द्वारा घेरे जाने पर अंग्रेजी पुलिस से मोर्चा लिया जिसमें ब्रिटिश पुलिस अध्यक्ष और पुलिस अधिकारी घायल हुए, अनेकों ब्रितानिया पुलिस को उन्होने जान से मार दिया जब एक गोली बची तो उन्होने अपने को शहीद कर लिया। स्वराज भवन इलाहाबाद में है जहां से स्वतंत्रता के आन्दोलन की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी और देश को आजाद कराया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री भी इलाहाबाद से हुए हैं। 1904 से 1949 तक यह यूनाइटेड प्राविन्स की राजधानी भी रही है। इलाहाबाद में पुलिस मुख्यालय, प्रतिष्ठित हाईकोर्ट, रेलवे का हेड आफिस, एकाउन्टेन्ट जनरल का आफिस, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन के आईजी का आफिस और सबसे बड़ी चीज इलाहाबाद विश्वविद्यालय जो विश्व विख्यात है इतने बड़े इतिहास के साथ जुड़े इलाहाबाद का नाम बदलना न्यायोचित नहीं है।
 
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने आज जारी बयान में कहा कि अगर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखा जाता है तेा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम भी प्रयागराज विश्वविद्यालय होगा ऐसी परिस्थिति में विश्वविख्यात स्तर का विश्वविद्यालय अपनी पहचान कैसे संजो पायेगा और वहां के छात्रों को क्या वैसा सम्मान मिल पायेगा जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से मिलता था उदाहरण के लिए केजी मेडिकल कालेज को सुश्री मायावती ने जब छत्रपति शाहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय का दर्जा दिया था तो उसकी महत्ता कम हो गयी थी जिसके कारण सरकार को पुनः केजीएमयू घोषित करना पड़ा।
 
 इलाहाबाद का अमरूद बहुत मशहूर है और इलाहाबादी अमरूद के नाम से वह बाजार में बेंचा जाता है ऐसे में जब इलाहाबाद रहेगा नहीं तो उसका ब्रान्ड प्रभावित होगा और मुख्यमंत्री की वन डिस्ट्रिट-वन प्रोडक्ट की योजना भी प्रभावित होगी इतना ही नहीं ऐसी तमाम चीजें हैं जिनके लिए काफी दिक्कतें पैदा होगीं। प्रयाग रेलवे स्टेशन पहले से है सरकार अगर प्रयागराज की घोषणा करना ही चाहती है तो जिस प्रकार इलाहाबाद के कुछ हिस्से को अलग कर कौशाम्बी नया जनपद बनाया है उसी प्रकार से कुछ हिस्से को अलग कर प्रयागराज जिला बनाया जा सकता है लेकिन इलाहाबाद के नाम को समाप्त करना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ खिलवाड़ है जिसे देश व प्रदेश की जनता स्वीकार नहीं करेगी।

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