कानपुर - दशहरे के दिन खुलता रावण का मंदिर, सुबह जन्मदिन - शाम को अंत्योष्ठि मनाते है श्रद्धालु। - तहकीकात न्यूज़

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Friday, 19 October 2018

कानपुर - दशहरे के दिन खुलता रावण का मंदिर, सुबह जन्मदिन - शाम को अंत्योष्ठि मनाते है श्रद्धालु।

ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता 
विजयदशमी के दिन रावण दहन कर भले ही लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हो, मगर कानपुर में पिछले  सौ साल से रावण को लेकर एक अलग ही परम्परा चली आ रही है। यहाँ के शिवालय इलाके में दशहरे के दिन सुबह रावण का बाकायदा जन्म दिन मानता है, इसके बाद शाम को उसका पुतला दहन कर दशहरा मनाया जाता है।

 

1868 में रावण के मूर्ति को किया गया था स्थापित
कानपुर के शिवालय के फूल मंडी के बगल में मौजूद है रावण का छोटा सा मंदिर। फूल मंडी के बगल में मौजूद माँ दुर्गा मंदिर के प्रांगण के बाहर मंदिर के एक तरफ दीवाल में ही एक रैक नुमा छोटे से रूम में रावण के मूर्ति को स्थापित किया गया है। 



रावण मंदिर के ट्रस्टी के के तिवारी के मुताबिक़ इस इलाके में चारो तरफ भगवान् शिव के मूर्ति स्थापित किये गए थे, ऐसे में उन्नाव के रहने वाले महाराज गुरुप्रसाद ने 1868 में यहाँ के स्थानीय निवासियों से भगवान् शंकर के सबसे बड़े भक्त के मूर्ति की स्थापना को लेकर बात की। 

केके तिवारी के मुताबिक़ महाराज जी की बात सुनकर पहले लोगो ने मना कर दिया था, मगर फिर लोगो ने इसकी इजाजत दे दी, और फिर पुरे विधि विधान से भगवान् शिव के इस भक्त की मूर्ति की स्थापना दशहरे के दिन इस छोटे से रूम स्थापित की गयी। 



इनके मुताबिक़ हर साल दशहरे के दिन रावण के मंदिर का पट एक दिन के लिए सुबह लोगो के दर्शन के लिए खोला जाता था और शाम को रावण दहन से पहले आरती करके बंद कर दिया जाता है। ये परम्परा उसी समय से चली आ रही है।  

तरोई और कद्दू के फूल के साथ सरसो तेल के दीपक से रावण की की जाती है पूजा -

केके तिवारी ने बताया कि वैसे तो श्रद्धालु रावण की पूजा गुलाब गेंदे के साथ किसी भी फूल से करते है, मगर रावण पर मुख्य रूप से तरोई और कद्दू के फूल से ही की जाती है।

इसके साथ ही रावण को दीपक दिखाने के लिए घी का प्रयोग नहीं करते बल्कि सरसो के तेल से जले दीपक दिखाया जाता है। 

एक मान्यता के मुताबिक़ जब रावण ने नौ गृह को अपने कब्जे में ले रखा था, तब शनि ने रावण को सभी ग्रहो को छोड़ने की बात कही, तब रावण ने शनि को उलटा लटका दिया था। 

रावण के क्रोध को देखते हुए शनि ने कहा था जो भी मनुष्य आपकी पूजा पुरे विधिविधान से करने के साथ सरसो के तेल में दीपक जलाकर आरती करेगे उनपर शनि का कभी प्रभाव नहीं होगा। 

यही वजह है कि रावण की आरती घी के दीपक से नहीं बल्कि सरसो के तेल के दीपक जलाते है।
  
पुरे धूम धाम से आरती की जाती है रावण की -
रावण के दर्शन को लेकर श्रधालुओ की भीड़ सुबह से लगनी शुरू हो जाती है। 

श्रद्धालु मंदिर के पट खुलने के पहले से ही श्रद्धालु मंदिर के बाहर जुटना शुरू हो जाते है। 

दशहरे के दिन मंदिर का पट खुलने के बाद रावण की मूर्ति की पहले सफाई की जाती है, रावण को गंगाजल से नहवाया जाता है।

गंगा स्नान के बाद रावण को फूलो का श्रृंगार किया जाता है। 

इसके बाद पुरे विधिविधान से रावण की आरती की जाती है, फिर पंडित जी के पूजन करने के बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन के फ्री कर दिया जाता है। 

दशहरे के दिन रावण के मंदिर को सुबह खोलने के बाद शाम को महा आरती करने के बाद बंद कर दिया जाता है। 

केके तिवारी के मुताबिक़ सुबह श्रद्धालु भगवान् शिव के सबसे बड़े भक्त और दुनिया के महान ग्यानी की पूजा अर्चना करते है, जबकि शाम को एक अहंकारी रावण का दहन किया जाता है।

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  1. UP Police admit card 2018 for UP Police Constable Re-Exam will be available to download from 21st Oct 2018. Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board (UPPRPB) has announced the new dates of the re-exam. The UP Police Constable re-exam will take place on 25th Oct & 26th Oct 2018 in two shifts. Candidates who will appear for the Re-Exam will be able to download UP Police Constable admit card 4-5 days before the exam.

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