उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों से नैनो टेक्नोलॉजी और जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से बॉयोलोजिकल ट्रीटमेंट अब हमारे शहर में उपलब्ध है अभी यूपी में केवल यह पीजीआई में ही मौजूद था अब कानपुर में भी चल रहा है इसलिए बायोलॉजिकल ट्रीटमेन्ट की सहायता से शरीर के अंगों का टेढ़ापन और विकलांगता पर रोक लगाई जा सकती है। गठिया यह एक ऑटोइम्यून डिसीज़ है
उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों से नैनो टेक्नोलॉजी और जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से बॉयोलोजिकल ट्रीटमेंट अब हमारे शहर में उपलब्ध है अभी यूपी में केवल यह पीजीआई में ही मौजूद था अब कानपुर में भी चल रहा है इसलिए बायोलॉजिकल ट्रीटमेन्ट की सहायता से शरीर के अंगों का टेढ़ापन और विकलांगता पर रोक लगाई जा सकती है। गठिया यह एक ऑटोइम्यून डिसीज़ है

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