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Wednesday, 10 October 2018

भारतीय रेल मोदी सरकार में हादसों की रेल बन चुकी है - राजबब्बर

लखनऊ -महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश
 
 
मालदाटाउन से दिल्ली जा रही न्यू फरक्का एक्सप्रेस रायबरेली के पास हरचंदपुर में पटरी से उतरकर हादसे का शिकार हो जाने के चलते लगभग 7 निर्दोष लोगों की दुःखद मृत्यु व लगभग 50 से अधिक लेागों के घायल हो जाने पर उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजबब्बर सांसद ने मृतकों एवं घायलों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने मोदीरी सरकार में बेतहाशा बढ़ रही रेल दुर्घटनाओं पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय रेल मोदी सरकार में हादसों की रेल बन चुकी है। यात्रा गंतव्य अन्तिम यात्रा साबित हो रही है। अतिशय रेल दुर्घटनाओं में अच्छे दिन आने वाले हैं की चुनावी फरेब से सत्ता हासिल करने वाली मोदी सरकार को पुनः एक जुमलावादी सरकार साबित किया है। अच्छे दिनअंतिम दिन का सफर बन गए है। 
 
  
 
 
प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता डाॅ0 मंजु दीक्षित ने आज जारी बयान में कहा कि मोदी नीत भाजपा सरकार में देश में छोटे-बड़े लगभग 586 रेल हादसे हो चुके हैं जिसमें 56 प्रतिशत की वजह कोच का रेल पटरी से उतरना है जिसकी मुख्य वजह गाड़ियों में भारी भीड़ के दबाव का रेल की पटरियों पर होना है। रेलवे सुरक्षा पर गठित उच्च स्तरीय समिति के अनुसार दुर्घटना के मुख्य कारणों में आग, टक्कर, पटरी से उतरना तथा बिना फाटक के रेलवे क्रासिंग का होना है। भारतीय रेल में करीब 50 हजार रेलवे क्रासिंग हैं जिनमें 15 हजार बिना रेल फाटक मानव रहित हैं। 
 
मोदीनीत भाजपा सरकार में सत्ता लोलुप राजनीति प्राथमिकता में मुख्य है। समाज, उसका जीवन, सरकार व रेल प्रबन्धन उपेक्षित हो गौड़ हो चुका है। प्रधानमंत्री का किसी प्रदेश का होना और उससे मुहब्बत करना और किसी राजनीतिक प्रबन्धन के फलस्वरूप किसी प्रदेश से चुना जाना दो अलग-अलग बाते हैं। 
 
 

रेल हादसों के विश्लेषणोंपरान्त उ0प्र0 की उपेक्षा चैंकाने वाली है। 26 मई 2014 जो प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण की तारीख भी है, से 10 अक्टूबर 2018(हरचन्दपुर रेल हादसा) तक 27 बड़े रेल हादसे हुए हैं जिसमें से 10 बड़े हादसे यू0पी0 में हुए हैं जो देश में हुए रेल हादसे का 40 प्रतिशत है, जिसमें 239 लोगों की मौतें हुई हैं तथा 670 लोग घायल हुए हैं। उपेक्षा से व्यथित उ0प्र0 की जनता को हादसों के स्थान तथा प्रकृति पर नजर डालना आवश्यक हो जाता है। 
 
26मई 2014 गोरखधाम एक्सप्रेस खलीलाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 25 लोगों की मौत और 50 लोग घायल हुए। 20 मार्च 2015 देहरादून-वाराणसी जनता एक्स0 रायबरेली के पास पटरी से उतर दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 58 मौतें एवं 150 लेाग घायल हुए, 25 मई 2015 मुरी एक्स0 पटरी से उतर दुघर्टनाग्रस्त हुई जिसमें 5 मौतो एवं 50 लोग घायल हुए। 20 नवम्बर 2016 को इन्दौर-राजेन्द्रनगर एक्स0 पुखरायां में पटरी से उतर दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 150 मौतें तथा 160 लोग घायल हुए। यह 2016 की विश्व की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना थी।
 
30 मार्च 2017 महाकौशल एक्स0 दुर्घटनाग्रस्त हुई, 15 अप्रैल 2017 मेरठ-लखनऊ राजधानी एक्स0 रामपुर में पटरी से उतर दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 24 लोग घायल हुए। 19 अगस्त पुरी-हरिद्वार कलिंगा उत्कल एक्स0 मुजफ्फरनगर के नजदीक खतौली में पटरी से उतर दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 23 लोगों की मृत्यु हुई एवं 97 लोग घायल हुए। 23 अगस्त 2017 को कैफिएत एक्सप्रेस औरैया में पटरी से उतर दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें 100 लोग घायल हुए। 24नवम्बर 2017 को वास्कोडिगामा-पटना एक्स. चित्रकूट में पटरी से उतर हादसे का शिकार हुई जिसमें 3 लोगों की मृत्यु हुई एवं 9 लोग घायल हुए और आज फिर 10अक्टूबर 2018 को न्यू फरक्का एक्स. हरचन्दपुर में पटरी से उतर हादसे का शिकार हुई जिसमें लगभग 7 लोगों की मौतें हो चुकी हैं एवं 50 से अधिक घायल हुए हैं।
 
 
 
 
 
 
बिहार, बंगाल को जाने वाली ज्यादातर गाड़ियां उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती हैं जो भारत के न सिर्फ ज्यादा आबादी व घनत्व वाले प्रदेश हैं बल्कि रोजगार के अभाव में प्रवासी मजदूर भी इन्हीं क्षेत्रों से आते हैं। इसके बाद भी भारतीय रेल का इस क्षेत्र को प्राथमिकता में न रखना उ0प्र0 और उत्तर प्रदेशवासियों के जीवन, जीविका तथा जीवन सुरक्षा के साथ क्रूर मजाक है। 
 
भारतीय रेल अपनी 16हजार ट्रेनों के माध्यम से 1.8करोड़ लोगों के प्रतिदिन यातायात का प्रमुख साधन है। विशेषकर समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाली उ0प्र0 एवं बिहार की श्रम शक्ति हेतु देश के दूसरे प्रदेशों के लिए यातायात का मुख्य साधन होने के बाद भी यह उपेक्षा उ0प्र0 के विकास हो हाशिये पर डालने की वर्तमान भारत सरकार की एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा लगता है। विश्ेाषकर रायबरेली में दो बड़े हादसों का होना राजनीतिक विद्वेषवश रायबरेली की उपेक्षा का द्योतक है। 
 
दुनिया में अपनी धीमी औसत गति और कन्जेशन के बाद भी भारतीय रेल दुर्घटनाओं का शिकार हो भारतीय जीवन को खो रही है, जबकि दुर्घटना तेज गति के परिणाम माने जाते हैं। दुनिया के दूसरे देशों के रेल की औसत गति और दुर्घटना अनुपात का अगर भारतीय रेल से तुलना करें तो भारतीय रेल आज की तारीख में दुनिया की सबसे लेटलतीफ और जानलेवा बन चुकी है।
 
भीड़, असमय संचालन, उपेक्षाजनित कम निवेश और इसमें भी यू0पी0 और बिहार की उपेक्षा हमारी रेल दुर्घटना और मौतों का सबब बन रही है। लोकतंत्र में आबादी जहां शक्ति का पर्याय है उ0प्र0 की आबादी भी उसकी उपेक्षा का कारण बन भारतीय राजनीति की अतिशय लोकप्रियतावादी राजनीति का शिकार हो रही है।

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