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Monday, 8 October 2018

कानपुर-ज़िंदा मरीज को निजी अस्पताल के डॉक्टर ने मृत घोसित किया ,परिजनों का अस्पताल में हंगामा

 

ब्यूरो कानपुर -रवि  गुप्ता 
इंसान को नया जीवन देने वाले डॉक्टरों को धरती पर भगवान का दूसरा रुप माना जाता है लेकिन आजकल इन धरती के भगवानो का स्वरूप इस कदर विकृत हो गया है कि वह अब धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करने में इतने लीन है कि उन्हें अब जिंदा या मुर्दा इंसान की पहचान भी खत्म हो गयी हैऐसा ही एक मामला कानपुर के स्वरूप नगर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में देखने को मिला जहां पर धन के लालच में अंधे हो चुके डॉक्टर ने एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को मुर्दा साबित करने के साथ ही उसका पंचनामा कर पोस्टमार्टम के कागजात भी तैयार कर दिए. और परिजनों को नर्सिंग होम का बिल भी थमा दिया। यह तो ऊपरवाले की महरबानी थी कि अचानक ही नर्सिंग होम मेडिको लीगल डॉक्टर सिन्हा आये और मृत घोषित किये गए व्यक्ति का चेकअप कर उसे जिंदा बताया जिसके बाद मरीज के परिजन उसे शहर के हैलेट अस्पताल ले गए जहा उसका इलाज  एक बार फिर से  शुरू किया।इस घटना से नाराज मरीज के परिजनों ने निजी नर्सिंग होम के संचालक के खिलाफ स्वरूप नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।


फतेहपुर जनपद के थाना थरिया ग्राम बिलन्दा में रहने वाले रामपाल के 55 वर्षिय पुत्र फूल सिंह किसानी का कार्य करते है फूल सिंह के दो पुत्र कपिल व सचिन है रविवार की सुबह फूल सिंह साइकिल से बाईपास से जा रहे थे। तभी डीसीएम ने उन्हें टक्कर मार दी। जिसमें वह गम्भीर रूप से घायल हो गए। परिजनों ने उन्हें गम्भीर हालत में कानपुर के स्वरूप नगर स्थित रमा शिव हॉस्पिटल में भर्ती कराया।जहा इलाज के बाद अस्पताल के डॉक्टर ऐ के सिंह ने फूलसिंह को मृत घोषित कर दिया। और डेथ सर्टिफिकेट बनाने के साथ ही 3500 रुपये का बिल परिजनों को थमा दिया। कुछ देर बाद ही अस्पताल आये मेडिको लीगल डॉक्टर सिन्हा ने मरीज का दोबारा चेकअप किया।  पता चला की मरीज को जिंदा है  जिसके बाद परिजन अपने मरीज को लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे जहा डॉक्टरों ने मरीज को  आईसीयू में भर्ती कर फिर से इलाज शुरू किया।  इस दौरान लगभग 6 घण्टे बाद जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद फूल सिंह की मौत हो गयी। जिसके बाद परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल पहुंच कर जमकर हंगामा काटा।

सुनील यादव (घायल फूलसिंह का भतीजा)   ने कहा की अगर  निजी अस्पताल के डॉक्टर एके सिंह की लापरवाही के चलते फूल सिंह की मौत हुई है अगर समय पर उन्होंने सही उपचार किया होता तो उसकी मौत न होती और वह जिंदा बच सकते थे।

अस्पताल की डॉक्टर विभा का कहना है की हमने तो मरीज को देखा और परिजनों को केवल यह बताया था की मरीज का ब्रेन डेड   हुआ है लेकिन उनके परिजनों ने उसे मरीज को डेथ समझ लिया। इनका मेडिको लीगल भी अस्पताल में ही हुआ था। कोई भी डॉक्टर अपने मरीज को डेथ नहीं बताएगा मरीज का कोई भी बिल नहीं बना है।  कोई डेथ सार्टिफिकेट बना है केवल पी आई ही गई है थाने। उस पर परिजन अस्पताल के ऊपर गलत आरोप  लगा रहे है। 


एसपी संजीव सुमन का कहना है की रमा शिव नर्सिंग होम में एक मरीज भर्ती हुआ था जिसको मृत घोषित किया गया था | परिजन उसको लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे तो उन्हें पता चला की वह ज़िंदा है | इस घटना में लापरवाही सामने आ रही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के तहत किसी भी डाक्टर पर मुकदमा दर्ज करने से पहले मुख्य चिकित्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट की जरुरत होती है | परिजनों की तरफ से तहरीर आ चुकी है जांच रिपोर्ट के लिए मुख्य चिकित्षा अधिकारी को प्रेषित की जायेगी जांच रिपोर्ट आने पर अगर सही पाया जाएगा तो मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जायेगी

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