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Friday, 30 November 2018

किसानों की कंगाली से दिख रही है उनकी दुर्दशा,किसान खेतिहर मजदूर बन गए - अखिलेश यादव

महेंद्र मिश्रा ब्यूरो  उत्तर प्रदेश    

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आज विभिन्न जनपदों से आये किसानों के प्रतिनिधिमण्डलों ने भेंट कर अपनी समस्याओं, भाजपा सरकार के दावों के विपरीत समर्थन मूल्य न मिलने और उत्पीड़न किये जाने के विषय में बताया। गन्ना का बकाया भुगतान तथा अन्य समस्याओं से अवगत कराया। 

                             फोटो  गूगल स्रोत 

अखिलेश यादव ने किसानों से मुलाकात में कहा कि किसानों ने बड़ी मेहनत करके पैदावार से अपने बोरे तो भर लिये हैं लेकिन उनकी जेबें अभी भी खाली हैं। फसल बिकने के इंतजार में खड़े किसानों के अंदर आक्रोश उफना रहा हैं क्योंकि सरकार ने एमएसपी तो घोषित कर दी है लेकिन ये नहीं बताया कि वो मिलेगी कहां से और देगा कौन?
       
अखिलेश यादव ने कहा कि केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार के लूटतंत्र के जाल में किसान फंस गये हैं। फसल बीमा योजना के नाम पर भाजपा ने किसानों के साथ धोखा किया है। किसानों को लूटा जा रहा है। फसल बीमा योजना में सन् 2016 से 2018 दो वर्ष के दौरान बीमा की दो कम्पनियों को 15795 करोड़ रूपए की आमदनी हुई। किसान को लोन तभी मिलता है जब बीमा की प्रीमियम राशि को बैंक काट लेता है। किसान को मुआवजा मिलता नहीं और अगर मिल भी गया तो उसमें पहला शेयर बैंक का होता है क्योंकि बैंक ने पहले लोन दिया। 


                     फोटो  गूगल स्रोत


सरकार किसानों के साथ कैसे धोखा करती है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है कि मक्का किसानों के लिए क्रय केन्द्र खोले बिना 1700 रूपए समर्थन मूल्य घोषित हो गया पर ये रूपए कहां और कैसे मिलेंगे इसकी व्यवस्था नहीं है। यह बात तो नीति आयोग ने भी माना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य तो घोषित है किन्तु उत्तर प्रदेश में धान खरीद के अधिकांश मामलों में किसानों को सही दाम नहीं मिल रहे हैं। सामान्य धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1750 रूपए प्रति कुंतल है जबकि किसान को 1200 रूपए प्रति क्वींटल के लाले पड़ गए है। क्रय केन्द्रों पर किसानों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। बाराबंकी में सैकड़ों ट्रक खड़े हैं धान की खरीद नहीं हो रही है।
 गन्ना किसान परेशान हैं। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं बढ़ाया है। मिलें किसानों का गन्ना नहीं खरीद रही है। कई चीनी मिलों में पेराई तक नहीं शुरू हुई है। गन्ना किसानों के भुगतान में लापरवाही बरती जा रही है। किसान को लागत मूल्य तो मिल नहीं रहा है जबकि बिजली दर, खाद, बीज, कीट नाशक, डीजल के दाम बढ़ गए हैं। लागत का डेढ़ गुना देने का भाजपा के वादे का दूर-दूर तक पता नहीं। किसानों की आमदनी दुगुना करने के नाम पर भाजपा ने अन्नदाता को धोखा दिया। दुग्ध उत्पादकों को दाम नहीं मिल रहा है। 
 पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि डाॅ0 स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट से सरकार ने मुंह फेर लिया है। भाजपा अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को बारह महीने में लागू करने की बात से पलट गयी है। सरकार की नीतियों के केन्द्र में किसान नहीं है। किसानों की हो रही दुर्दशा से अन्नदाता कंगाल हो रहे हैं। तमाम किसान खेतिहर मजदूर बन गए हैं। किसानों की सम्पूर्ण कर्जमाफी से ही अन्नदाता को राहत मिल सकती है। 
 भाजपा सरकार स्वाभाविक रूप से किसान विरोधी और कारपोरेट घरानों की समर्थक है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को लाभ पहुंचाने वाली उसकी नीतियों से किसान तबाह है और 20 साल में 03 लाख 10 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। पौने पांच वर्ष में 50 हजार किसान कंगाली में अपनी जान दे चुके हैं। मानवीय असंवेदना का यह क्रूर प्रदर्शन है।

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