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Sunday, 11 November 2018

प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयन्ती प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व विधायक श्यामकिशोर शुक्ला की अध्यक्षता में मनायी गयी

लखनऊ - महेंद्र मिश्रा ब्यूरो उत्तर प्रदेश
 
 
 
भारत रत्न एवं देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयन्ती आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व विधायक श्यामकिशोर शुक्ला की अध्यक्षता में मनायी गयी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी जी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरूआत मौलाना आजाद के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। 
 
 
 
यह जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने बताया कि जयन्ती कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में आजाद साहब का प्रमुख योगदान रहा है। सबसे कम उम्र के कांग्रेस के अध्यक्ष बने और दो बार अध्यक्ष रहे। संविधान और धर्मनिरपेक्षता की मिसाल थे। 
 
 
तिवारी ने कहा कि मौलाना आजाद से पूछा गया कि वह भारत और पाकिस्तान में किसके साथ रहेंगे तो उन्होने जवाब दिया था कि -अगर कोई फरिश्ता मुझसे किसी मीनार पर खड़ा होकर कहे कि हम अपने देश को छोड़ दें तो भी हम भारत की मिट्टी को छोड़ने को तैयार नहीं है जहां मेरे बुजुर्ग दफन हैं। मौलाना आजाद साम्प्रदायिक सौहार्द के अलम्बरदार थे। वह ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे जहां ऊंच-नीच, जाति-धर्म का भेदभाव न हो और सभी लोग समान रूप से देश के उत्थान और विकास में भागीदारी करें।    
 
 
 
प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष नईम सिद्दीकी ने कहा कि मौलाना आजाद ने एक तरफ जहां आजादी के बाद देश में तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया और आईआईटी संस्थान, यूनिवर्सिटी ग्रान्ट कमीशन की स्थापना की, वहीं दिल्ली में विश्वविद्यालय के साथ कई शहरों में उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित किये। उन्हाने कहा कि मौलाना आजाद ने भारत के भविष्य के निर्माण की योजना बनाकर 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की और 1953 में संगीत नाटक अकादमी व साहित्य अकादमी एवं 1954 में ललित कला अकादमी की नींव रखकर भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने का काम किया।
 
इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक श्यामकिशोर शुक्ला ने कहा कि मौलाना आजाद के आदर्शों और उनके द्वारा बताये गये रास्ते पर चलकर ही भारत वास्तविक रूप में विकास कर सकता है। आज के माहौल में मौलाना के विचार और भी प्रासंगिक हो गये हैं। 
 

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