कानपुर - जानिए आखिर क्यों दे रहा यह शिक्षक बच्चों को निशुल्क शिक्षा - तहकीकात न्यूज़

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Thursday, 1 November 2018

कानपुर - जानिए आखिर क्यों दे रहा यह शिक्षक बच्चों को निशुल्क शिक्षा

 


 ब्यूरो कानपुर - रवि गुप्ता
 
पढ़ेंगे बच्चे तो बढ़ेंगे बच्चे का नारा लेते हुए एक युवा ने समाज के उन गरीब बच्चो के लिए मिसाल बन गया है जिनको पैसे के अभाव में शिक्षा नही मिल पाती शिक्षक अपना कीमती समय निकालकर पिछले तीन वर्षों से इन गरीब बच्चो को निशुल्क शिक्षा दे रहा है साथ ही खुद ही इन बच्चो के लिए पठन पाठन की सामग्री भी उपलब्ध करवाता है। और वह युवा 150 बच्चो को प्रतिदिन घाट किनारे  शिक्षित करता है और उस युवा ने अब सेवाभाव से जुड़े कुछ मित्रों के साथ मिलकर इन गरीब बच्चो को पढ़ाने का बीड़ा उठाया है।

सेवाभाव से मिलजुलकर बच्चो को कर रहे शिक्षित

कानपुर नगर में गंगा नदी के किनारे बसा बाबा आनंदेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है जहां गंगा किनारे परमट निवासी 28 वर्षीय युवा नितिन कुमार पिछले 3 वर्षों से गरीब बच्चो के लिए आनंदेश्वर घाट पर निशुल्क पाठशाला लगाते चले आ रहे है नितिन कुमार ने बताया कि यहां पर जो बच्चे है वे सरकारी स्कूलों के हैं ज्यादा बच्चे ऐसे है जो कटरी गंगा पार कर नाव से आते है, साथ ही जो फाइनेंसियल स्ट्रांग नही होते या ऐसे भी बच्चे जो कूड़ा बीनते है




शराब के ठेकों ,ढाबों में काम यहां तक कि भीख मांग कर गुजर बसर करते थे। ऐसे बच्चों को भी वे शिक्षित कर रहे है ऐसे बच्चो के अंदर पढ़ने की ललक तो होती है लेकिन गरीबी के चलते उनके माता पिता इन्हें पढा नही पाते और यह काम करने लग जाते हैं।  धीरे धीरे इन बच्चो को एकत्र कर उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया और प्रतिदिन 2 घण्टे उनकी यहीं कोचिंग क्लास लगाई जाती है बच्चो के अंदर पढ़ाई को लेकर उनकी इस ललक को देखते हुए  ये कारवाँ चल पड़ा। और सेवा भाव से लोगों ने जुड़कर इस मुहिम को एक नई दिशा दी जिसके बाद नितिन ने खुद की एक संस्था बनाई जिसका नाम एक नई राह फॉउंडेशन दिशा वही सोच नई के साथ मिलकर स्टाफ के 13 सदस्यों को इसमें शामिल किया साथ ही 4 संरक्षक भी इस मुहिम में सेवाभाव से कार्य कर रहे हैं।

यहां एक्टिविटीज़ क्लास भी लगती है


नितिन ने बताया कि यहां केजी से लेकर कक्षा 12 तक के बच्चे पढ़ने आते है प्रत्येक दिन क्लास लगती है यदि किसी टीचर को आने में देरी हो जाती है तो यह बच्चे खुद ही अपने आप पढ़ने में जुट जाते है।


रविवार को एक्टिविटीज़ क्लास भी देते है साथ ही संस्कृत की क्लास, फ्रेंच क्लास ,स्पोर्ट्स, म्यूजिक, डांस, कम्प्यूटर क्लास भी मुहैया करवाते है बच्चो को कॉपी किताबे, पेंसिल ,पेन भी मुहैया करवाते है। बताया कि संसाधन की कमी जरूर थी लेकिन कई साथी सहयोग और सेवाभाव के लिए तैयार हो गए जहां हर कोई अपनी तरफ से इन बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही पठन पाठन की सामग्री भी मिलजुलकर उपलब्ध करवाते है नितिन ने बताया कि हमारा मकसद है कि इन बच्चो को पढ़ाई का मतलब समझ मे आये और इन्हें स्कूलों से भी जोड़ा जाए जिसमें कुछ बच्चो का स्कूलों में एड्मिशन भी करवाया गया है। यहाँ आनंदेश्वर मंदिर है तो यहां सेवाभाव से कई भक्त बच्चो को स्टेशनरी सम्बंधित सामग्रियाँ वितरित अक्सर कर जाते है।

छात्रा अंजली ने बताया कि पिता किसान है गंगा कटरी पार कर पढ़ने आते है यहां डांस,इंग्लिश सभी विषयों की शिक्षा दी जाती है  बताया कि वह पढ़ लिखकर पुलिस में भर्ती होना चाहती है। वही कक्षा 4 की छात्रा लक्ष्मी ने बताया कि वह बड़े होकर डॉक्टर बनना चाहती है।

बचपन से ही पढ़ने और पढ़ाने का था जुनून


नितिन ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी हमारी मां चौका बर्तन कर हम तीन भाई और एक बहन को पढ़ाती थी। धीरे धीरे पढ़ता गया और बस्तियों में जाकर पढ़ाने लगा तबसे यह सोच बन गयी कि अपनी पढ़ाई के दौरान काफी शिक्षा को लेकर अड़चने आयी  अक्सर स्कूल के टीचर बोला करते थे नही पढ़ोगे तो फेल हो जाओगे जिसको लेकर अक्सर डर सा बना रहता था घर पर हमने ट्यूशन पढा और बस्तियों में जाकर पढ़ाने लगा और धीरे धीरे आनंदेश्वर घाट पर यहां पहले 4 से 5 गरीब बच्चों को पढ़ाने लगा और धीरे धीरे इन बच्चो की संख्या बढ़ गयी और अब इन बच्चो की संख्या डेढ़ सौ हो गयी है वही बच्चो की संख्या बढ़ जाने के बाद इन तीन सालों में सेवाभाव से 13 लोगो का स्टाफ भी जुड़ गया है



जो इन बच्चो को शिक्षित कर रहा है। अब हमारे पास सेवाभाव से 13 लोगों का स्टाफ जुड़ा हुआ है जो इन बच्चो को शिक्षित करते है साथ ही 4 मेंटर्स भी देखरेख में संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। नितिन खुद भी पोस्ट ग्रैजुएट और अभी लॉ के स्टूडेंट है।
बताया कि बचपन से ही ऐसी जगहों से जुड़ा रहा इन्ही लोगों के बीच रहा। बताया कि बच्चों को पढ़ाने में बड़ा सकून मिलता है जो बच्चे गंगा कटरी से आते है उनके लिए अब एक नाव का भी इंतजाम कर दिया है जिससे उन्हें आने में अब तकलीफ नही होगी।

सप्ताह में तीन दिन मम्मियों की भी लगती है क्लास

खुद पढ़ न सकी लेकिन अपने बच्चो को शिक्षित देखना हर मां बाप का सपना होता है और जैसे भी हो गरीबी में भी वह अपने बच्चो को शिक्षित कर उसके अंदर सुनहरे भविष्य का सपना संजोए रहती है लेकिन समय बदल गया और ऐसी महिलाएं जिनके अंदर ज़रा सी पढ़ने की ललक है उन्हें भी नितिन और उनकी टीम शिक्षित कर रही है




गंगापार जो महिलाएं अशिक्षित है इन बच्चो की मम्मियां है उन्हें भी शिक्षित किया जाता है वहाँ सप्ताह में तीन दिन 25 से 30 महिलाएं है जहां उन्हें शिक्षित करते है। आज़ाद नगर में भी पढ़ने की ललक को लेकर हमने उन बच्चो को शिक्षित करना शुरू किया है जो पढ़ना चाहते है। सेवा भाव से जुड़े हुए शिक्षक अनन्त सिंह, विनय वर्मा, कृष्णा मिश्रा, हिमांशु गौतम, शोभित कश्यप,राघव,कुनाल, तरुण, अर्पिता, अनुराधा,हर्षिता, नम्रता और मोहिनी है जो बराबर इन बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं वहीं संरक्षक के रूप में नन्दिनी उपाध्याय, शालिनी राय,शिप्रा,सिद्धार्थ और विष्णु है।

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