जो वादे देश की जनता से उन्होने किये थे वह सब झूठ और बेइमानी साबित हुए है - उमा शंकर पाण्डेय - तहकीकात न्यूज़ | Tahkikat News |National

आज की बड़ी ख़बर

Monday, 12 November 2018

जो वादे देश की जनता से उन्होने किये थे वह सब झूठ और बेइमानी साबित हुए है - उमा शंकर पाण्डेय

चीफ रिपोटर UP -  चन्द्र मोहन तिवारी 

अ0भा0 कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार नोटबन्दी की सम्पूर्ण विफलता के खिलाफ कांग्रेसजनों द्वारा पूरे देश में धरना-प्रदर्शन कर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने वाली भाजपा सरकार का पर्दाफाश किये जाने के क्रम में उ0प्र0 काग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजबब्बर सांसद के निर्देश पर आज उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटियों द्वारा पुरजोर धरना-प्रदर्शन किया गया तथा नोटबन्दी के दौरान आम जनता को हुई परेशानियों का हिसाब प्रधानमंत्री से मांगा गया।


इसके तहत राजधानी लखनऊ में जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में कांग्रेसजनों द्वारा रिजर्व बैंक आफ इण्डिया मुख्यालय, गोमतीनगर लखनऊ के सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डाॅ0 उमा शंकर पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश भर के जिला एवं शहर कांग्रेस अध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में सभी जिला/शहर मुख्यालयों में नोटबन्दी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। कानपुर में आरबीआई मुख्यालय के सामने कांग्रेसजनों द्वारा विशाल प्रदर्शन किया गया।  
प्रवक्ता ने बताया कि आर0बी0आई0 मुख्यालय के सामने हुए प्रदर्शन में मौजूद कांग्रेसजनों को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि नोटबन्दी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपरिपक्वता एवं भ्रष्टाचार में संलिप्तता का उदाहरण बन गयी है। नोटबन्दी लागू करते हुए जो वादे देश की जनता से उन्होने किये थे वह सब झूठ और बेइमानी साबित हुए है। यूपीए सरकार की तुलना में जीडीपी दो प्रतिशत गिर गई जिससे तीन लाख मिलियन डालर का नुकसान देश को झेलना पड़ा है और लाखों युवा बेरोजगार हो गये। नोटबन्दी एक संगठित लूट थी। उन्होने सरकार से नोटबन्दी पर श्वेतपत्र लाने की मांग की। साथ ही उन्होने यह भी पूछा है कि नोटबन्दी के असली लाभार्थी कहां हैं? इसका उद्देश्य काले धन को खत्म करना था किन्तु बैंकों में 99.3प्रतिशत मुद्रा वापस आ गयी तो कालाधन कहां गया?




इस मौके पर प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता दीपक सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबन्दी लागू करते हुए देश की जनता से यह वादा किया था कि मुझे मात्र 50 दिन दे दीजिए अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जायेगी, लेकिन आज नोटबन्दी के 730 दिन बीत जाने के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होने के बजाय बदहाल एवं चैपट हो गयी है। आतंकवाद, नक्सलवाद समाप्त होने का वादा भी जुमला साबित हुआ। उन्होने सरकार से पूछा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आयी, एनपीए बढ़ता जा रहा है और रिजर्व बैंक असहाय क्यों है?  
पूर्व मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी ने नोटबन्दी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तानाशाही एवं कुछ उद्यमी मित्रों को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया। उन्होने पूछा है कि मुद्रा स्फीति अपने उच्चतम स्तर पर होने के बावजूद सरकार असहाय क्यों है?


पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि नोटबन्दी सरकार प्रायोजित खुली लूट थी जिससे देश के तमाम भ्रष्ट लोगों का काला धन सफेद किया गया जो देश के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात था। उन्होने प्रधानमंत्री से पूछा कि अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में कमी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्यों नहीं कम हो रही हैं, डालर के मुकाबले रूपया लगातार कमजेार क्यों हो रहा है क्या यह नोटबन्दी एवं गलत तरीके से जीएसटी लागू करने का दुष्परिणाम नहीं है?
विधायक श्रीमती आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि नोटबन्दी से करोड़ों आम एवं मध्यम वर्गीय नागरिकों को घोर कठिनाई उठानी पड़ी थी। सैंकड़ों लोग लाइन में लगने से मौत के गाल में समां गये, लेकिन दो वर्षों के बाद नोटबन्दी का कोई भी फायदा भाजपा की मोदी सरकार नहीं बता पा रही है और नोटबन्दी पर पूछे जा रहे सवालों से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होने प्रधानमंत्री से पूछा है कि आप द्वारा जल्दबाजी में लिये गये निर्णय के कारण अपने परिवार के लिए रखी आजीवन बचत जिन महिलाओं ने खो दी उन महिलाओं के लिए उनका क्या जवाब है?    

No comments:

Post a Comment