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Tuesday, 18 December 2018

कानपुर-पाश्चात्य सभ्यता को बढ़ावा दे रहे लोग भूल रहे देववाणी संस्कृत भाषा - समझिए संस्कृत की जरूरत

 
 
ब्यूरो कानपुर रवि गुप्ता
 पूरे विश्व मे भारत को एक अलग पहचान दिलाने वाली संस्कृत भाषा की पहचान कहीं न कहीं अब कम होती जा रही है इसी संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीजी पीजी कालेज में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 

वर्तमान शिक्षा में संस्कृत की है बहुत जरूरत

*संस्कृत क्यों* विषय पर हुई इस संगिष्ठी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉक्टर वाचस्पति मिश्र एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सन्तोष कुमार शुक्ल ने किया इस संगोष्ठी पर देव वाणी संस्कृत की उपयोग पर चर्चा करते हुए डॉक्टर वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा ही एक ऐसी भाषा है जो हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करती है संस्कृत की उपेक्षा का तात्पर्य भारत के अतीत का विस्मरण है आज संस्कृत भाषा के ज्ञान को लेकर छात्रो में रुचि कम हो रही है आज आवश्यकता है कि संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए अन्य विषयों के साथ इसे जोड़कर पढ़ाया जाए ताकि यह भाषा भी मुखर हो सके। कहा की वर्तमान शिक्षा में संस्कृत को किस तरह से जोड़ा जाए जो प्राचीन ज्ञान को आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके इस पर शोध करने की आवश्यकता है भाषा वैज्ञानिकों के लिए यह संस्कृत भाषा आज भी एक चुनौती बनी हुई है।
 

संस्कृत भाषा की जानकारी से रोजगार की प्रबल सम्भावनाये

संस्कृत विभाग की प्रो- डॉक्टर आशा रानी पांडे ने बताया कि आज जिस तरह से पाश्चात्य सभ्यता हमारे देश मे हावी हो रही है वह किसी भी हालत में ठीक नही है विदेशी भी अब संस्कृत भाषा का लोहा मानने लगे है और अपने कार्यो में संस्कृत भाषा के प्रयोग भी करने लगे हैं। संस्कृत कोई धर्म नही है आप मनुष्य है मनुष्य ही रहें
पाश्चात्य सभ्यता ने अपने को अपनो से कहीं न कहीं  दूर कर दिया है
 
' पर्यावरण असुरक्षित हो गया है और हम तनाव भरी जिंदगी जीने को मजबूर हो गए है लेकिन देववाणी संस्कृत एक ऐसी भाषा है जिससे जानने से मानसिक रुप से भी हम स्वस्थ रह सकते हैं संस्कृत भाषा को लोग अक्सर कठिन मानने के साथ उसकी उपेक्षा की जाती है जबकि नासा के वैज्ञानिकों ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि संस्कृत व्याकरण दुनिया का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण है जो कम्प्यूटर के लिए बहुत उचित है। संस्कृत की आज मांग बहुत ज्यादा है क्योंकि इसमें रोजगार की प्रबल सम्भावनाये है देश की सबसे बड़ी परीक्षा आईएएस,पीसीएस में भी संस्कृत विषय का अहम रोल है जिसमे  लोगों के चयनित होने की सम्भावनाये बहुत होती है इसके अलावा संस्कृत से सम्बंधित प्रचार प्रसार के लिए जगह जगह कई संस्कृत के शिविर चला करते है जिसे संस्कृत भाषा का ज्ञान होता है उनके लिए रोजगार पाना आसान हो जाता है। विदेशों में संस्कृत पर बहुत कार्य होता है अमेरिका में छोटी क्लास में संस्कृत अनिवार्य कर दी गयी है विदेशी लोग संस्कृत में शोध करने में ज्यादा जागरूक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ऋषि मुनियों द्वारा बताई गई यज्ञ विधि जो आज समाप्त सी होती जा रही है लोग भी इस ओर कम ध्यान देते है जबकि यज्ञ और हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है और आसपास भी माहौल ऊर्जावान रहता है तो संस्कृत भाषा को जानना देश हित में तो सहायक है ही साथ ही रोजगार और पर्यावरण में भी सहायक है।
 
इस अवसर पर डॉ नीलम त्रिवेदी
 
मिथिलेश गंगवार,अशोक गुप्ता,डॉ अर्चना दीक्षित,डॉ स्वाति सक्सेना,डॉ हिना,डा संध्या ठाकुर,शक्ति पांडे समेत तमाम प्रोफेसर उपस्थित रहीं।

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