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Friday, 28 December 2018

गोरखपुर - दिसम्बर में सबसे ज्यादा अवकाश लेते हैं परिषदीय अध्यापक

ब्यूरो - कृपा शंकर चौधरी
 
जनवरी माह से लेकर दिसंबर माह तक अध्यापन कार्य करने वाले परिषदीय अध्यापकों द्वारा सबसे ज्यादा दिसम्बर माह में अवकाश लिया जाता है। सर्वे से ज्ञात होता है कि इस महीने में परिषदीय अध्यापकों को मिलने वाले 14 अवकाश का पुर्ण रुप से फायदा उठाया जाता है। 
 
 
 
जिसका नतीजा यह होता है कि इस माह में छात्रों का पठन पाठन प्रभावित रहता है। इतना ही नहीं आरोप यह भी लगाया जाता है कि कुछ अध्यापकों द्वारा मानक से अधिक अवकाश लेने के बाद भी दिसम्बर माह में अवकाश बचे रहने कह कर अवकाश लिया जाता है। दरअसल पहले लिए गए अवकाश को मिली भगत या उच्च अधिकारियों के आंखों में धूल झोंककर खत्म करा लिया जाता है और शेष छुट्टियों का फायदा उठाया जाता है। यह कार्य इस ढंग से किया जाता है कि उनके उपर बाद में कोई उंगली भी नहीं उठा पाता है।
 
विचारणीय प्रश्न यह है कि भविष्य निर्माण के पद पर कार्यरत यह अध्यापक इतना क्यो बदल गया ? दरअसल उच्च अधिकारियों की उदासीनता एवं शिक्षा सेवा न रह कर आर्थिकोपार्जन का माध्यम बनने से यह बदलाव आया है। पहले के अध्यापक शिक्षा देना अपना उत्तरदायित्व समझते थे किन्तु अब यह नौकरी हो गई है।
 
समय समय की सरकारें द्वारा इसमें बदलाव किया गया किन्तु कोई सार्थक प्रतिफल नहीं प्राप्त हुआ। सरकार द्वारा सदैव पेट की बिमारी में सर दर्द का इलाज किया जाता रहा जोअब यह बिमारी नासूर बन गया है जिसका लक्षण लोगों के सोच में दिखाई दे रहा है। एक तरफ सरकार की मशीनरी के कार्य पद्धति में गड़बड़ी है तो दुसरी तरफ लोगों के अपने उत्तरदायित्व में जिसके परिणामस्वरूप हर तरफ लूट ही लूट मची हुई है। 
 
जिस दिन आम जनता को अपने उत्तरदायित्व का बोध हो जाएगा उस दिन सारी मशीनरी और सरकार सही हो जाएगी।

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