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Tuesday, 15 January 2019

कानपुर देहात- खनन माफियाओं का कारोबार धड़ल्ले के साथ बहुत तेज़ी से चलता हुआ दिखाई दे रहा

रिपोर्टर- अरविन्द शर्मा
 

न्यायालय से लेकर प्रदेश सरकार ने एक तरफ जहां अवैध खनन को लेकर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दे रही है। वहीं उनके नाक के नीचे धड़ल्ले से अवैध खनन चल रहा है। शासन की इतनी सख्ती के बावजूद भी माफिया सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जहां योगी सरकार न्यायालय के आदेश का पालन कराने के लिए पूरे प्रयास मे जुटी है, वहीं अफसर भी लापरवाही का नमूना पेश कर उन्हें चुनौती देने से बाज नहीं आ रहे हैं।


पूर्व की सरकार में खनन को लेकर जहां तमाम अव्यस्थाएं फैली हुई देखी जा रहीं थीं और खनन को लेकर काफी अराजकता भी होती थी। वहीं सरकार बदलते ही प्रदेश में भाजपा जैसे ही सत्ता पर काबिज हुई। माफिया अचानक से विलुप्त हो गए थे। लेकिन आज प्रदेश सरकार के कुछ महीने गुजरने के बाद फिर से खनन माफिया सक्रिय हो गए हैं और उनका माफियाराज खनन के रूप मे शुरू हो गया है। जिसके चलते अधिकारी भी कोई कार्यवाही करते नजर नहीं आ रहे हैं। जिससे अधिकारियों की मिलीभगत होने पर सवाल उठ रहे हैं। अफसरों की लापरवाही के चलते खनन माफिया जिले के भोगनीपुर क्षेत्र में धड़ल्ले से पोकलैंड और जेसीबी से खनन कराने में मशगूल हैं और अधिकारी चैन की बंशी बजा रहे हैं।


इसका जीता जागता उदाहरण जिले के भोगनीपुर क्षेत्र के दौलतपुर घाट और सिकंदरा के खरका घाट में देखने को मिल रहा है। जहां खनन माफियाओं का कारोबार धड़ल्ले के साथ बहुत तेज़ी से चलता हुआ दिखाई दे रहा है। रात तो रात यहां तो दिन में भी खुलेआम पोकलैंड और जेसीबी से बेखौफ होकर अवैध खनन कराया जा रहा है। वहीं पर इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन पर एक दो नहीं करीब चार से पांच पोपलैंड और जेसीबी की मशीनें धड़ल्ले से चल रहीं हैं।

वहीं अभी कुछ दिन पूर्व खनन के लिए खरका घाट जा रहे तेज रफ्तार ट्रक से कुचलकर एक अंधेड़ की मौत हुई थी। जिस पर ग्रामीणों ने मार्ग जाम कर अवैध खनन बंद कराने की बात कहते हुए कार्यवाही की मांग की थी और ट्रकों में आग लगाकर तोड़फोड़ की थी। उक्त मामला जिले के समूचे अफसरों के संज्ञान मे आया था। बावजूद खनन का ये खेल अभी तक जारी है। जब इस मामले में जिले के अधिकारियों को अवगत कराया गया तो अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से चलता रहा, जिससे जिले के आला अधिकारियों पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

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