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Wednesday, 6 February 2019

फर्रुखाबाद - कुम्भ मेले में इन दिनों फ़तेहगढ़ के कैदियों द्वारा निर्मित झोलो की डिमांड खूब आ रही..

रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा

सेन्ट्रल जेल फतेहगढ़ में बनने वाले झोले आदि सामान तो वैसे भी मजबूती के मामले में बेजोड़ माना जाता है| लेकिन आम जनमानस में इसकी खरीददारी को लेकर साधन उपलब्ध नही है| लेकिन इसके बाद भी उसको खरीदने की चाहत लोगों के जगन में रहती है| अब कारोबार कम है लेकिन गुणवत्ता पहले वाली ही है| कुम्भ मेले में इन दिनों फ़तेहगढ़ के कैदियों द्वारा निर्मित झोलों की डिमांड खूब आ रही है|मेले में आने वाले विदेशी सैलानी भी इसे खूब पसंद कर रहे है| लगातार आ रही डिमांड से जेल के टेंट व सिलाई विभाग से जुड़े कर्मीयों के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ देखी जा सकती है|



वैसे तो फर्रुखाबाद कृषि के क्षेत्र में आलू,नाश्ते के मामले में दालमोट और आस्था के क्षेत्र में गंगा और छोटी काशी के नाम से जगजाहिर है| कढाई के मामले में भी जनपद का कोई जोड़ नही| यंहा की जरदोजी की कढाई की गुणवत्ता इतनी है की एक फिल्म में अभिनेत्री ने फर्रुखाबाद का बना लंहगा पहना था| वही एक और चीज है जो जानकारों के लिए गुणवत्ता का प्रतीक है| सेन्ट्रल जेल में बने सिलाई के सामान| इन दिनों प्रयागराज में कुम्भ लगा है| जिसे देखने के लिए देश व विदेश ने लाखों पर्यटक आ रहे है| उन्ही पर्यटकों के लिए इस बार सेन्ट्रल जेल फतेहगढ़ से निर्मित सिलाई व बुनाई का सामान बिक्री के लिए लगाया गया है| जिसमे इस बार सेन्ट्रल जेल में निर्मित टीसीसी झोला खास पसंद किया जा रहा है| सेन्ट्रल जेल से कई खेप झोला कुम्भ में बिक्री किया जा चुका है| विदेशी पर्यटक इसे खास पसंद कर रहे है| जिसकी कीमत लगभग 30 रूपये रखी गयी है| सेन्ट्रल जेल में जब से सिलाई का काम शुरू हुआ तब से लेकर आज तक टीसीसी झोले पीले,गहरे नीले और सफेद रंग के बनते थे| लेकिन इस बार कुम्भ मेले को देखते हुए नान ओवेन क्लाथ झोले भगवा रंग के बनाये गये है| उनके ऊपर स्वच्छ भारत का चश्मा भी चस्पा किया गया है| झोले एक कदम स्वच्छता का संदेश भी दे रहे है| इनकी कीमत भी लगभग 25 रूपये प्रति नंग रखी गयी|

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