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Monday, 29 April 2019

यूपी में 13 सीटों के लिए वोटिंग शुरू, डिंपल, सलमान, साक्षी और श्रीप्रकाश की किस्मत का फैसला

न्यूज़ डेस्क तहकीकात लखनऊ

यूपी में चौथे चरण में 13 सीटों के लिए सोमवार को वोटिंग शुरू हो गई है। 19 जिलों के 2.38 करोड़ मतदाता 152 उम्मीदवारों की परीक्षा लेने के लिए तैयार हैं। इस चरण में कन्नौज में मौजूदा सांसद डिंपल यादव, कानपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल व प्रदेश सरकार के मंत्री सत्यदेव पचौरी, उन्नाव में साक्षी महाराज व अनु टंडन और फर्रुखाबाद में सलमान खुर्शीद की प्रतिष्ठा दांव पर है। वर्ष 2014 में इन 13 में से 12 सीटों पर भाजपा जीती थी।फर्रुखाबाद। इस संसदीय सीट पर जातीय समीकरण साधना ही सबसे बड़ी चुनौती है। भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत ने जातियों के हिसाब से सभाएं करवाईं। क्षत्रियों के गढ़ में सीएम योगी आदित्यनाथ, यादवों को साधने के लिए पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह को बुलाया। इस सीट पर कांग्रेस के सलमान खुर्शीद की बड़ी परीक्षा है। हालांकि पिछले चुनाव में वे चौथे नंबर पर थे। सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी मनोज अग्रवाल तथा प्रसपा ने यहां से उदय पाल सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। लखीमपुर खीरी। खीरी संसदीय सीट पर जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिशों के बीच भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हो रहा है। भाजपा के अजय कुमार मिश्र को फिर धार्मिक ध्रुवीकरण की उम्मीद है।  सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी सपा की डॉ. पूर्वी वर्मा धार्मिक और जातीय समीकरणों के भरोसे हैं। उन्हें परंपरागत पिछड़े वर्ग के वोटों के साथ-साथ बसपा के दलित वोटों पर भी भरोसा है। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी जफर अली नकवी को जातीय समीकरण अपने पक्ष में नजर आ रहे हैं। 

 
शाहजहांपुर। इस सुरक्षित सीट पर ध्रुवीकरण की राजनीति में मुख्य मुकाबला भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है। एक ही बिरादरी के तीन प्रत्याशी सजातीय वोटरों को भी लुभाने में लगे हैं। भाजपा के अरुण सागर हिंदू मतों को एकजुट करने में जुटे हैं। गठबंधन से बसपा प्रत्याशी अमर चंद्र जौहर परंपरागत वोटरों के सहारे हैं। इनके लिए मुस्लिम वोटरों को सहेज पाना चुनौती बना है। कांग्रेस के ब्रह्मस्वरूप सागर न्याय योजना से युवाओं को साधने के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं पर नजरें गड़ाएं हैं।झांसी। झांसी-ललितपुर सीट पर सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा आमने सामने हैं। बसपा की ओर से अपना वोट बैंक सपा के खाते में जमा कराने की पूरी कोशिशें की जा रही हैं, जबकि भाजपा अपने परंपरागत वोट बैंक को बरकरार रखने के अलावा विपक्षी दलों के वोटों पर निशाना साधे हुए है। भाजपा प्रत्याशी अनुराग शर्मा को इस बार भी वोटों के पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण की उम्मीद है। सपा के श्यामसुंदर सिंह को इस बार बसपा वोटों का भी सहारा है। कांग्रेस प्रत्याशी शिवशरण कुशवाहा को मुस्लिम मतदाताओं से आस है। उरई। इस सुरक्षित सीट पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। कुल 1.69 लाख मतदाता होने के कारण ये जिस पक्ष में गए, उस पक्ष को लाभ मिलना तय है। भाजपा प्रत्याशी भानु प्रताप वर्मा यहां से चार बार सांसद रहे। उन्हें बिरादरी के साथ-साथ वैश्य और सवर्ण मतदाताआें पर भरोसा है। कांग्रेस प्रत्याशी बृजलाल खबरी बसपा से आए हैं। मुस्लिमों की उनकी अच्छी पहुंच मानी जा सकती है। गठबंधन के प्रत्याशी अजय पंकज का भी पूरा प्रयास है कि यदि 2014 के ही सपा व बसपा के वोट मिल गए तो जीत की राह आसान हो जाएगी।

हमीरपुर: ब्राह्मण और ओबीसी मतदाताओं पर नजर
 
हमीरपुर। इस सीट पर भाजपा, बसपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सिंह चंदेल को फिर मोदी के नाम पर वोट मिलने की उम्मीद है। गठबंधन प्रत्याशी दिलीप सिंह को अनुसूचित जाति, मुस्लिम के साथ सवर्ण मतदाताओं से भी आस है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह को अपनी लोध बिरादरी के साथ मुस्लिमों, पिछड़े वर्ग का भरोसा है। प्रियंका गांधी के आने से मुस्लिमों का रुझान कांग्रेस की ओर बढ़ा है।

अकबरपुर: मोदी बनाम अन्य में खींचतान 

अकबरपुर। अकबरपुर लोकसभा सीट पर भाजपा, कांग्रेस व गठबंधन प्रत्याशियों में मुकाबला है। यहां पर जातीय समीकरण से ज्यादा मोदी बनाम अन्य के बीच टक्कर है। भाजपा के वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह भोले फिर मोदी मैजिक के सहारे मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल को भरोसा है कि ब्राह्मण, पिछड़ी व दूसरी जातियों का समर्थन मिलेगा। गठबंधन की प्रत्याशी निशा सचान पहली बार लोकसभा चुनाव मैदान में है। 

कानपुर: मुस्लिम और ब्राह्मण धुव्रीकरण की कोशिश
 
कानपुर। इस संसदीय सीट पर भाजपा के पारंपरिक वोट और ब्राह्मणों की एकजुटता को भाजपा प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी की ताकत माना जा रहा है। लगातार तीन बार सांसद रहने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल को 2014 के चुनाव में भाजपा से झटका लगा था। गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व विधायक राम कुमार पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं। महानगर से उनका पुराना रिश्ता है लेकिन विरोधी उनकेा बाहरी होने का टैग लगाने में जुटे हैैं।उन्नाव। सपा-बसपा के साथ होने से इस बार लोकसभा का चुनाव त्रिकोणीय है। पहले भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन गठबंधन की ओर से ब्राह्मण प्रत्याशी अरुण शंकर शुक्ल को उतारने से मुकाबला कड़ा हो गया है। मोदी फैक्टर के सहारे 2014 की तरह ही जीत तय मान रहे भाजपा प्रत्याशी साक्षी महाराज को पिछड़ा और सवर्ण वोटरों में बिखराव रोकने में मशक्कत करनी पड़ रही है। 2009 में रिकाॅर्ड मतों से जीत हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी अनु टंडन इस बार भी मैदान में हैं।

उन्नाव: गठबंधन की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय
 
कन्नौज। इस सीट पर गठबंधन प्रत्याशी डिंपल यादव दो बार से लगातार जीत दर्ज कर चुकी हैं। इससे पहले अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव भी इस सीट पर कब्जा जमा चुके हैं। लगातार 20 सालों से यह सीट सपा के कब्जे में है। भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने 2014 के चुनाव में सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को कड़ी टक्कर दी थी। हार-जीत का अंतर 20 हजार से भी कम वोटों का रहा था। गठबंधन के बाद भाजपा ने भी दलित वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। 

इटावा: सवर्ण करेंगे हार जीत का फैसला
 
इटावा। इस सीट पर सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के मतदाता हैं लेकिन दो दोहरे और दो कठेरिया प्रत्याशी होने से अनुसूचित जाति के मतों में बिखराव हो सकता है। भाजपा के रामशंकर कठेरिया की बिरादरी के साथ गैर यादव ओबीसी और अनुसूचित जाति के वोटरों पर नजर है। सपा प्रत्याशी कमलेश कठेरिया अपनी बिरादरी के साथ-साथ यादव और मुस्लिम मतों को अपने पाले में करने के लिए जोर लगाए हैं। उनके सामने प्रसपा ने भी प्रत्याशी उतारा है। कांग्रेस प्रत्याशी अशोक दोहरे स्वजातीय दोहरे मतों के साथ और मुस्लिम वोटों में सेंधमारी में जुटे हैं।

हरदोई - सवर्ण और मुस्लिम जिसके, जीत उसकी
 
हरदोई। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हरदोई लोकसभा सीट पर जीत किसकी होगी, यह बहुत कुछ सवर्ण और मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर है। भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश इसी सीट से वे तीन बार सांसद रह चुके हैं। गठबंधन प्रत्याशी ऊषा वर्मा पुराना चेहरा हैं। तीन बार सपा के टिकट पर सांसद रह चुकी हैं। बसपा का वोट अगर उन्हें मिलता है तो उनकी राह आसान हो जाएगी। कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र वर्मा पूर्व में बसपा से विधायक रह चुके हैं। उनकी कोशिश हैं कि मुस्लिम वोटों के अलावा स्वजातीय वोटों को भी हासिल कर सकें।

मिश्रिख - पिछड़े वोटरों के हाथ जीत की चाभी
 
सीतापुर। मिश्रिख (सुरक्षित) संसदीय सीट पर त्रिकोणात्मक मुकाबला बन रहा है। इस सीट पर बसपा छोड़कर भगवा थामने वाले पूर्व सांसद अशोक रावत पर भाजपा ने दांव लगाया है। सपा-बसपा गठबंधन की प्रत्याशी नीलू सत्यार्थी इस क्षेत्र के लिए नया चेहरा हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मंजरी राही को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रामलाल राही की बहू होने का फायदा मिल रहा है। मिश्रिख सीट से रामलाल राही चार बार सांसद रह चुके हैं। वैसे तो यह क्षेत्र अनुसूचित जाति बहुल है। फिर पिछड़े, सामान्य और मुस्लिम मतदाता हैं।

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