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Saturday, 6 April 2019

फर्रुखाबाद - बोरवेल में गिरी 6 वर्षीय मासूम सीमा को बचाने का रेस्क्यू आॅपरेशन सेना ने बंद किया..

रिपोर्ट - पुनीत मिश्रा
 
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में बोरवेल में गिरी 6 वर्षीय मासूम सीमा को बचाने का रेस्क्यू आॅपरेशन सेना ने बंद कर दिया। 58 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद लगातार मिट्टी धंसने से परेशान होकर बचाव कार्य बंद किया गया है। वहीं एनडीआरएफ,एसडीआरएफ और सेना द्वारा बचाव कार्य में लगे होने के बावजूद आॅपरेशन असीम विफल होने के पीछे प्रशासन की नकामी साफ तौर पर देखने को मिली है। थाना कमालगंज के अंतर्गत गांव रशिदपुर में बुधवार दोपहर को आठ वर्षीय बच्ची सीमा 60 फिट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। उसे निकालने के लिए सेना के साथ ही पैरामिलिट्री फोर्स, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के जवान दिन-रात एक किए रहे। लेकिन बलुई मिट्टी होने के कारण बार-बार सुरंग धंस जाने की वजह से उनके बुलंद हौसले भी पस्त पड़ गए और शुक्रवार देर रात 12 बजे आॅपरेशन असीम को बंद करने का प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सेना ने फैसला लिया। इसके बाद कागजी कार्रवाई करके भारतीय सेना लौट गई। करीब 58 घंटे तक चले इस रेस्क्यू आॅपरेशन में प्रशासन की ओर से रेस्क्यू आॅरेशन का नेतृत्व कर रहे एसडीएम अमीत आसेरी की घोर लापरवाही नजर आई। वहीं रात करीब 8 45 पर घटनास्थल से मीडिया को दूर कर दिया गया। रात तकरीबन 12 बचाव कार्य बंद कर दिया गया। इसके बाद  प्रशासनिक आलाधिकारी मीडिया के कैमरे से बचते हुए भाग निकले, जब तहसीलदार प्रदीप कुमार से रेस्क्यू आॅपरेशन को बंद करने का कारण पूछा गया तो पहले वह सवाल से बचते नजर आए, लेकिन बाद में उच्च अधिकारियों द्वारा रेस्क्यू आॅपरेशन रूकवाने की बात कही
 
 
 
एसडीएम ने पीड़ित परिवार के पर प्रधान व लेखपाल से बनवाया दबाव
 
एसडीएम अमित आसेरी ने 58 घंटे तक चले असीम ऑपरेशन के विफल होने के बाद मासूम बच्ची सीमा के परिजनों पर लेखपाल अनूप मिश्रा और पूर्व प्रधान पप्पू से दबाव बनवाकर परिजनों से कागज पर बच्ची हमको नहीं चाहिए लिखवाकर ऑपरेशन रोकने की बात लिखवा ली और सेना को वापस लौटा दिया।ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजीः रेस्क्यू आॅपरेशन बीच में बंद कर बिना बच्ची की  सूचना दिए अधिकारियों के जाने से खफा ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बच्ची जिंदा या मुर्दा निकालने के साथ मुआवजे की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान संजीवनी देवी ने कहा कि हमें अपने ही घर से प्रशासन के लोगों ने सुबह से निकाल दिया था। खुदाई के कारण घरों की दीवारों पर दरारें भी आ गई है और बच्ची को भी नहीं निकाल रहे हैें। उन्होंने आरोप लगाया कि लेखपाल व प्रधान  जबरदस्ती लिखवा रहे हैं कि हम अपनी मर्जी से खुदवाई को रूकवा रहे हैं, जबकि हमारा कहना है कि भले ही हमारे घर टूट जाए लेकिन बच्ची को अब जिंदा या मुर्दा निकाले जाए। इसके अलावा ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बच्ची सीमा के चाचा सुरेंद्र को प्रशासन के अधिकारियों के साथ प्रधान हरिशचंद्र दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराने के लिए घर से उठा ले गया है।

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