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Saturday, 27 April 2019

कत्ल हुआ नहीं फिर भी बढ़ा दी हत्या की धारा, एसओ चार घंटे न्यायिक हिरासत में

न्यूज़ डेस्क तहकीकात लखनऊ

गौरीगंज के पूर्व विधायक व भाजपा नेता जंगबहादुर सिंह के समर्थक की हत्या के दुष्प्रेरण मामले में बगैर हत्या हुए ही हत्या की धारा बढ़ाना धम्मौर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह को महंगा पड़ा। एडीजे चतुर्थ मनोज शुक्ल ने एसओ को मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का दोषी मानते हुए थानाध्यक्ष को न्यायिक अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर एसओ को दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक कस्टडी में रखा गया। हालांकि, शाम छह बजे सीजेएम आशारानी सिंह ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ने में कार्रवाई का आधार पर्याप्त नहीं पाते हुए एसओ को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने आदेश दिया। मामले को लेकर अदालत में परिसर में गहमागहमी रही। वकीलों व पुलिस कर्मियों की कोर्ट में भारी भीड़ जुटी रही। धम्मौर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह ने 17 मार्च 2019 को कुड़वार थाने के मनियारपुर निवासी हैदर अब्बास उर्फ गब्बर, सैय्यद गाफिर हसन जैदी उर्फ फारुख, जामों थाने के सूखी बाजगढ़ निवासी अजय चौहान व उदयभान सिंह उर्फ बब्लू सिंह, नरियावां निवासी शैलेंद्र प्रताप सिंह, धम्मौर थाने के कस्तूरीपुर निवासी बजरंग बहादुर सिंह और चार अज्ञात  के खिलाफ हत्या, हत्या के लिए दुष्प्रेरण, पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस की मानें तो आरोपियों ने धम्मौर थाने के खलेसरपुर नहर फाटक पिकौरा के पास से पुलिस टीम पर फायरिंग कर जानलेवा हमला किया था। घटनास्थल से पुलिस ने आरोपी हैदर अब्बस उर्फ गब्बर व सैय्यद गाफिर हसन जैदी उर्फ फारूख को तमंचे के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

 
पुलिस के मुताबिक आरोपी हैदर अब्बास ने बताया था कि जेल में रहने के दौरान उसकी दोस्ती आरोपी उदयभान सिंह उर्फ बब्लू सिंह से हो गई थी। बब्लू सिंह की दुश्मनी गौरीगंज के पूर्व विधायक व भाजपा नेता जंगबहादुर सिंह और उसके समर्थक प्रदीप सिंह उर्फ पहाड़ी सिंह से है। बब्लू सिंह ने पहाड़ी सिंह की हत्या करने के लिए पांच लाख रुपये में सुपारी दी थी। एडवांस में 10 हजार रुपये दिया गया था। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के दिन पहाड़ी सिंह की हत्या करने के लिए आरोपी जामों जाने की तैयारी में थे। जेल में निरुद्घ आरोपी सैय्यद गाफिर हसन जैदी उर्फ फारुख की जमानत अर्जी पर बचाव पक्ष की ओर से पुलिस पर आरोप लगाया गया कि बिना किसी व्यक्ति की हत्या हुए ही पुलिस ने मनमानी करते हुए आरोपी के खिलाफ हत्या की धारा में केस दर्ज कर दिया। एडीजे चतुर्थ मनोज शुक्ल ने पिछले दिनों धम्मौर एसओ प्रवीण सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर जबाव तलब किया था।इसी मामले में शुक्रवार को कोर्ट में पेश हुए एसओ प्रवीण सिंह को एडीजे मनोज शुक्ल ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का दोषी मानते हुए न्यायिक अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने सीजेएम को आदेश दिया है कि वे एसओ को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर कार्रवाई करें। कोर्ट ने मामले में जेल में निरुद्घ आरोपी सैय्यद गाफिर हसन जैदी उर्फ फारूख की जमानत मंजूर कर उसे रिहा करने का आदेश दिया। एडीजे के आदेश पर एसओ को दोपहर दो बजे कस्टडी में ले लिया गया। शाम करीब चार बजे पुलिस एसओ को लेकर एडीजे चतुर्थ की कोर्ट से सीजेएम कोर्ट में लेकर आई। वहां पर शाम छह बजे तक एसओ कस्टडी में रहे। शाम करीब छह बजे सीजेएम आशारानी सिंह ने आधार पर्याप्त नहीं पाते हुए एसओ को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। मामले को लेकर कोर्ट परिसर में भारी गहमागहमी रही। अदालत परिसर में वकीलों व पुलिस कर्मियों को भीड़ शाम तक जमा रही।

एसओ के चेहरे की उड़ गईं हवाइयां
 अदालत ने एसओ को कस्टडी में लेने का आदेश दिया तो वे सकते में आ गए। कभी हमराही रहे पुलिस कर्मियों ने अदालत के आदेश पर एसओ को कस्टडी में लेकर लॉकअप के अंदर जाने को कहा। इस दौरान धम्मौर थाने में तैनात स्टाफ के साथ ही कोतवाली नगर व अन्य थानों के पुलिस कर्मी भी कोर्ट पहुंच कर एसओ से मामले की जानकारी लेने में लगे रहे।  

मामला मैनेज करने में लगे रहे
धम्मौर एसओ प्रवीण सिंह को कस्टडी में लेने की जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारी व कई अधिवक्ता मामला मैनेज करने में जुट गए। पुलिस अधिकारी समेत कई वकील एसओ को कस्टडी से छुड़ाने में न्यायिक अधिकारियों के पास सिफारिश करने में लगे रहे।  

कोर्ट ने की थी टिप्पणी
पिछले दिनों कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह बड़ा हास्यास्पद है कि मामले में किसी की मृत्यु नहीं हुई है और हत्या का कोई मामला नहीं मिला है, फिर भी जबरन हत्या की धारा पुलिस ने बढ़ा दी है।


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