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Friday, 31 May 2019

कानपुर देहात - शादी और उसके बाद हनीमून के लिए युवक ने मासूम को किया टारगेट, नहीं सुनी होगी ऐसी अनोखी दास्तां

जिला सवांदाता - अरविन्द शर्मा

महज अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिए किसी का सबकुछ छीन लेने वाली दास्तां आपने नही सुनी होगी। कानपुर देहात में एक ऐसी ही अनोखी अपरहण की कहानी सामने आयी है। आरोप है कि गांव के एक शख्स के घर मे शादी थी और शादी के लिए उसे पैसो की ज़रूरत थी। लिहाज़ा उसने योजनाबद्ध तरीके से गांव के ही एक मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया। फिर बच्चे को डेढ़ लाख में अपने रिश्तेदार के हाँथ बेच दिया। दरअसल वह डेढ़ लाख रुपये से अपनी शादी और हनीमून के हसीन ख्वाब देख रहा था। कहते हैं बुरे काम का बुरा नतीजा। बस फिर पुलिस ने उसके ख्वाबो को चकनाचूर कर दिया और उस मासूम को बरामद कर आरोपी को जेल भेज दिया। पुलिस के इस सराहनीय कार्य के लिए जिले के पुलिस कप्तान ने पुलिस टीम को दस हजार रुपये से पुरस्कृत किया है।

शादी और हनीमून के लिए रचा था ये षणयंत्र

यह अनोखी अपहरण की घटना कानपुर देहात के बरौर थाना क्षेत्र के डुड़ियामऊ में 12 मई की है, जहां शादी और हनीमून के लिए एक मासूम का अपहरण किया गया। दरअसल इलाके के कक्षा 2 में पढ़ने वाले मासूम विवेक का अपहरण गांव के ही अभिषेक ने कर लिया और विवेक को डेढ़ लाख रुपये में अपने फूफा राजू तिवारी को बेच दिया। इधर बेऔलाद फूफा राजू तिवारी के कोई औलाद न होने पर उन्होंने सौदा कर लिया। इधर अपहरण हुए 7 साल के विवेक के परिजन बेहाल थे। विवेक के माँ बाप के आंसुओं का सैलाब थम नही रहा था और रो रोकर फरियाद कर रहे थे कि कोई उनको लाल से मिला दे।
 
 
लालच में बेरहम बन गया था प्रांशु

विवेक के माता पिता को प्रांशु मिश्रा पर शक था, क्योंकि प्रांशु और उसकी भांजी की शादी थी और उन्हें रुपयों की ज़रूरत थी। क्योंकि प्रांशु को शादी करने व उसके बाद अपनी पत्नी को लेकर बाहर घूमने जाना था। गुस्साए परिजनों ने थाने में जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आयी और प्रांशु की तलाश शुरू में जुट गई। आखिरकार 2 सप्ताह बाद पुलिस ने प्रांशु को गिरफ्तार कर ही लिया और अपहरण हुए छात्र विवेक को बरामद कर लिया। अपहरण हुआ छात्र दहशतज़दा है, वो अपहरण की कहानी बयां कर रहा है कि प्रांशु उसे गांव से अपहरण कर ले गया। फिर उसे बंद कमरे में रखा गया। उसे मां बाप की याद सताती थी, लेकिन ज़ालिम प्रांशु को मासूम बच्चे विवेक पर ज़रा भी तरस नही आया। विवेक अपहरणकर्ता के चंगुल से छूटकर खुश है।

एक तीर से दो निशाने लगा रहा था प्रांशु

वही पुलिस अपहरण हुए छात्र विवेक को बरामद कर अपनी पीठ थपथपा रही है। पुलिस भी मान रही है कि अपहरण का मुख्य उद्देश्य शादी में पैसे की जरूरत और शादी के बाद हनीमून भी। इसके साथ अपने फूफा राजू तिवारी जो बेऔलाद था, उसको विवेक के रूप में औलाद देकर उनको औलाद का सुख देना। जिसके बदले डेढ़ लाख रुपये में डील हुयी थी। जिसके आधे से ज़्यादा पैसा प्रांशु को मिल चुका था। इस घटना से एक बात साफ हो गयी कि लालच इंसान को कहां से कहां पहुंचा देता है। ऐसा ही प्रांशु के साथ भी हुआ। प्रांशु की शादी टूट गयी और जिसे दूल्हा बनकर साथ फेरे लेने थे, वो अब जेल की सलाखों के पीछे चक्कर काट रहा है।


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